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J&K Polls: जम्मू-कश्मीर में ढाल बने CAPF के एक लाख जवान, त्रिस्तरीय सुरक्षा में बिना भय के लोग कर रहे मतदान
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Jammu Kashmir
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Amar Ujala
विस्तार
जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनाव में लोग, बिना किसी भय के मतदान कर रहे हैं। दहशतगर्दों द्वारा लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा डालने की तमाम धमकियों के बीच केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के एक लाख जवानों ने राज्य में 3 टायर सिक्योरिटी सिस्टम लागू किया है। यह एक ऐसा अचूक सिस्टम है, जिसमें पॉलिटिकल पार्टी के कार्यकर्ता और आम लोग, चुनाव प्रचार से लेकर मतदान करने तक की प्रक्रिया में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर रहे हैं। बुधवार को दूसरे चरण का मतदान है। इसमें भी लोगों की भारी संख्या मतदान करने निकली है। 18 सितंबर को पहले चरण की वोटिंग में 24 सीटों पर 61 फीसदी मतदान हुआ था। जम्मू कश्मीर में तीसरे चरण के तहत एक अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे। मतगणना चार अक्तूबर को होगी।
केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के विश्वस्त सूत्रों ने बताया, ऐसे कई खुफिया अलर्ट मिलते रहे हैं, जिसमें आतंकियों द्वारा मतदान प्रक्रिया को बाधित करना भी शामिल है। चुनाव के दौरान सुरक्षा बलों के कैंप, नाके एवं बैरक को निशाना बनाने जैसे इनपुट भी मिले हैं। इनके सबके मद्देनजर जेकेपी के साथ मिलकर थ्री टायर सिक्योरिटी सिस्टम लागू किया गया है। इसमें कहीं से कोई ऐसी गुंजाइश नहीं छोड़ी गई, जिसमें किसी दहशतगर्द को मतदान केंद्र या वोटरों तक आने का मौका मिले। चुनाव आयोग के निर्देशों के मुताबिक, सभी उम्मीदवारों को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान की गई है। पहले चरण के मतदान के बाद कई जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था को और ज्यादा पुख्ता बनाया गया है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए सुरक्षा बलों को एक फुल प्रूफ सिक्योरिटी सिस्टम तैयार करने का निर्देश दिया था। जम्मू कश्मीर में मौजूद आतंकी संगठन, चुनाव में बाधा पहुंचाने का प्रयास कर सकते हैं, इसके मद्देनजर जेएंडके में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के एक लाख से अधिक जवानों को चुनाव प्रक्रिया में उतारा गया है। थ्री टायर सिस्टम के अनुसार, इलेक्शन बूथ पर जेकेपी के साथ मिलकर अचूक सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवानों ने बूथ की अचूक सुरक्षा की है। इस सुरक्षा घेरे में आतंकियों का प्रवेश करना बेहद मुश्किल है। दूसरा सुरक्षा घेरा, निकटवर्ती अप्रोच रोड पर बनाया गया है। इसके बाद तीसरा घेरा, नाका पार्टी द्वारा तैयार किया गया है। ड्रोन व सीसीटीवी कैमरे की मदद से भी चप्पे चप्पे पर नजर रखी जा रही है। केंद्रीय बलों की तैनाती का आदेश 18 अगस्त को ही जारी कर दिया गया था। राज्य में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की 465 अतिरिक्त कंपनियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा 315 कंपनियां, बाहर से बुलाई गई हैं। साथ ही राज्य में 150 कंपनियां ऐसी रही हैं, जो पहले से ही वहां पर तैनात थी।
केंद्रीय बलों की इन कंपनियों को उनके ओरिजनल प्लेस पर ही तैनात किया गया है। मतलब, जम्मू कश्मीर के जिस क्षेत्र में ये कंपनियां तैनात थी, उन्हें वहीं पर ही चुनाव में तैनात कर दिया गया है। इनमें 315 डायरेक्ट कंपनियां रहेंगी, जबकि 150 कंपनियां, ओरिजनल प्लेस वाली रहेंगी। 315 कंपनियों में से जम्मू क्षेत्र के लिए सीआरपीएफ की 55, बीएसएफ की 60, सीआईएसएफ 50, आईटीबीपी 50, एसएसबी 70 और आरपीएफ की 30 कंपनियां तैनात की गई हैं। इनमें से किसी भी कंपनी को कश्मीर जोन में तैनात नहीं किया गया है। ओरिजनल प्लेस वाली 150 कंपनियों में से कश्मीर के लिए सीआरपीएफ की 105, बीएसएफ की 15 और एसएसबी 05 कंपनियां लगाई गई हैं। जम्मू के लिए उक्त कंपनियों में से सीआरपीएफ की 20 और बीएसएफ की 05 कंपनियां तैनात की गई हैं।
कुल मिलाकर कश्मीर जोन में सीएपीएफ की 512 कंपनियां तैनात की गई हैं। जम्मू के लिए 488 कंपनियों को तैनात किया गया है। यानी जम्मू कश्मीर में शांतिपूर्ण तरीके से विधानसभा चुनाव संपन्न कराने के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के एक लाख जवानों को तैनाती मिली है। उक्त संख्या में सीएपीएफ की 535 कंपनियां ऐसी हैं, जो पहले से जम्मू कश्मीर में हैं। उन्हें भी चुनावी ड्यूटी के लिए रोका गया है। अब एक हजार कंपनियों में से कश्मीर क्षेत्र के लिए सीआरपीएफ की 268, बीएसएफ की 128, सीआईएसएफ 00, आईटीबीपी 45, एसएसबी 71 और आरपीएफ की 00 कंपनियां तैनात की गई हैं। जम्मू क्षेत्र के लिए सीआरपीएफ की 127, बीएसएफ की 85, सीआईएसएफ 100, आईटीबीपी 55, एसएसबी 91 और आरपीएफ की 30 कंपनियां तैनात रहेंगी। एक कंपनी में लगभग सौ जवान रहते हैं।