मायावती का PM पर निशाना, तैयारियां होतीं तो नहीं करनी पड़ती भावनात्मक ड्रामेबाजी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मायावती ने कहा कि विरोधी पार्टियों खासकर बसपा के लिए ये कहना कि दाल में कुछ काला है ठीक नहीं है। बसपा राजनीतिक पार्टी बाद में है पहले एक मूवमेंट है। गरीब, मेहनतकश और मध्यम वर्ग के खून पसीने की कमाई की सदस्यता और सहयोग ने इसे यहां तक पहुंचाया है। हम उन पार्टियों की तरह नहीं जो पूंजीपतियों, धन्नासेठों और फर्जी सदस्य बनाते हैं।
मायावती ने प्रधानमंत्री के बयान कि दस महीने से तैयारियां चल रही थीं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब तैयारियां चल रही थीं तो इतनी अफरातफरी क्यों है और फिर पचास दिन का समय अब क्यों। अगर दस महीने से तैयारियां होती तो भावनात्मक ड्रामेबाजी नहीं करनी पड़ती। वास्तव में दस महीनों में पीएम ने तैयारी जरूर की लेकिन धन्नासेठों, कुछ पूंजीपतियों और पार्टी के नेताओं का कालाधन ठिकाने लगवाने में। जबकि गरीब, किसान, मजदूर लाइन में खड़ा है।
'प्रधानमंत्री ने जापान में नोटबंदी पर ऐसे कहा जैसे बहुत बड़ा तीर मारा है'
उन्होंने कहा कि फैसले के बाद प्रधानमंत्री ने जापान में नोटबंदी पर ऐसे कहा जैसे बहुत बड़ा तीर मारा है। फिर अगले दिन गाजीपुर की रैली में भीड़ कैसे जुटाई गई। दूसरों को सलाह देने से पहले अपने गिरेबां में झांके। कर्नाटक के अपने नेता और सबसे बडे़ खनन माफिया जो बेटी की शादी में पांच सौ करोड़ खर्च कर रहा है उसे ही पकड़ लें । यूपी में आप पॉवर में तो आ नहीं रहे हैं लेकिन खनन माफिया से पकड़ी गई रकम यूपी में लगा दें तो कुछ जनता साथ आएगी और कृपा हो जाएगी।
मायावती ने कहा कि ढाई साल वादे पूरे न करने वाली सरकार ने पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव जिसमें यूपी, पंजाब और उत्तराखंड शामिल हैं को देखते हुए नोटबंदी की है। प्रधानमंत्री जरूर नींद की गोली खाकर सो रहे हैं। पांचों राज्यों की जनता सजा देगी। उन्होंने उंगुली में काला निशान लगाने के फैसले पर कहा कि 2019 में होने वाली वोटिंग अभी हो जाए।