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CRPF के नौ जांबाजों की कहानी, जिन्होंने आतंकियों को चटाई थी धूल, राष्ट्रपति करेंगे सम्मानित

Wed, 14 Aug 2019 09:18 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 14 Aug 2019 09:18 PM IST
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On 15th August CRPF commandos will be award by president police medal for Karan Nagar encounter
सीआरपीएफ करन नगर मुठभेड़ - फोटो : फाइल फोटो

फरवरी 2018 में जम्मू के सुंजवान इलाके में सेना पर हमला हुआ था। इसके दो दिन बाद ही खुफिया अलर्ट आया था कि पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा कश्मीर में तैनात सुरक्षा बलों को अपना निशाना बना सकता है। 12 फरवरी को हुए उस आतंकी हमले को सीआरपीएफ के जांबाजों ने नाकाम करते हुए दोनों आतंकियों को ढेर कर दिया था। अब स्वतंत्रता दिवस पर उन्हीं नौ जवानों, जिनमें से दो को राष्ट्रपति का पुलिस वीरता पदक (एक को मरणोपरांत) और बाकी को पुलिस वीरता पदक से सम्मानित करने का एलान किया गया है।

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कश्मीरी पंडित और अर्ध सैन्य बलों के परिवार थे निशाना

12 फरवरी को बर्फबारी हो रही थी और सूरज भी पूरी तरह नहीं दिख रहा था। लिहाजा इसी का फायदा उठाकर दोनों आतंकी निर्माणाधीन बिल्डिंग में घुस गए। हालांकि गेट पर तैनात सिपाही रघुनाथ ने उन्हें रोकने के लिए फायरिंग की, लेकिन अंधेरे का फायदा उठा कर वे बिल्डिंग तक पहुंच गए। उनका मकसद था कि अंदर रह रहे कश्मीरी पंडितों के साथ-साथ अर्ध सैन्य बलों के परिजनों को भी निशाना बनाया जाए। सीआरपीएफ की क्विक एक्शन टीम (क्यूएटी) 23 बटालियन के सेकेंड इन कमांड एमके बिसवास, डिप्टी कमांडेंट जगबीर सिंह, नॉर्थ रेंज क्यूएटी 49 और वेली क्यूएटी की टीम मौके पर पहुंच गई।

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वेली क्यूएटी में सेकेंड इन कमांड रतुल दास, एल. इबोमछा सिंह व रवि शर्मा थे। इन सभी ने सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया। चूंकि आसपास सिविल आबादी थी, इसलिए आतंकियों पर सीधे धावा बोलना संभव नहीं था। बुलेटप्रूफ वाहनों की मदद से लोगों को परिसर से बाहर निकाला गया। इस बीच कवर फायर जारी रहा। तब तक आतंकियों की सही लोकेशन भी पता चल गई। वे डीआईजी नॉर्थ श्रीनगर के दफ़्तर के समीप एक निर्माणाधीन बिल्डिंग में छिपे बैठे थे।

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बुलेटप्रूफ जैकेटों पर लगी दर्जनों गोलियां

इबोमछा सिंह और सिपाही देवसंत कुमार, रवि शर्मा व संतराम कुमार और अभे थॉमस के साथ सिपाही बुद्धि सिंह ने आगे बढ़ना शुरु किया। बिल्डिंग के किसी भी हिस्से से आतंकी फायरिंग कर देते थे, जवानों ने इसकी परवाह नहीं की। उनकी बुलेटप्रूफ जैकेटों पर दर्जनों गोलियां लगीं और आतंकियों ने कई हैंड ग्रेनेड भी फेंके। सिपाही मजाहिद खान ने रतुल दास, एमके बिसवास और जसबीर सिंह को कवर फायर दिया, लेकिन उन्हें आतंकियों की गोली लग गई। इसी दौरान इबोमछा सिंह व देवसंत कुमार रेंगते हुए बिल्डिंग की तरफ बढ़ने लगे।


उन्होंने बिल्डिंग के बाहर वाली पोस्ट से घायल मजाहिद खान को बाहर निकालकर उसे एमआई रुम में शिफ़्ट कर दिया। इसके बाद रतुल दास ने एमजीएल फायर कर दिया। आरएल कमांडर रंजन कुमार को मौके पर बुलाया गया। जब उन्हें बिल्डिंग के करीब लाया जा रहा था, तो आतंकियों ने एक के बाद एक दर्जनों फायर कर दिए।

यूएवी और ड्रोन को भी निशाना बनाने की कोशिश

दोनों आतंकी बिल्डिंग के भीतर से हैंड ग्रेनेड फेंक रहे थे, इसलिए अगली सुबह उन्हें ठिकाने लगाने के लिए नई रणनीति बनाई गई। प्लान था कि माइनिंग प्रोटेक्टेड व्हीकल की मदद से बिल्डिंग में आईईडी लगाकर उसे उड़ा दिया जाए। लेकिन प्लान के अंजाम तक पहुंचने से पहले ही आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। यहां तक कि आतंकियों ने यूएवी और ड्रोन को भी निशाना बनाने की कोशिश की। इस बीच इबोमछा, रवि शर्मा और अभे थॉमस की टीम ने गोलियों की परवाह न करते हुए बिल्डिंग में घुसने का फैसला लिया।

अलग-अलग दिशा से बिल्डिंग में घुसे कमांडो

उन्हें कवर फायर मिला, लेकिन उनके आसपास कई हैंड ग्रेनेड भी आकर गिरे। वे आगे बढ़ते रहे और एक आतंकी को मार गिराया। इसके बाद ये टीम बाहर आ गई। रंजन कुमार ने बिल्डिंग में सीजीआरएल और एमजीएल फायर कर दिया। जब इसके बाद भी दूसरे आतंकी का कुछ पता नहीं चला तो ऐसे ऑपरेशंस में माहिर रहे सहायक कमांडेंट नरेश कुमार को बुलाया गया। इस बार तीन टीमों ने अलग-अलग दिशा से बिल्डिंग में घुसने का प्रयास किया और अंदर बैठे आतंकी को मार गिराया। मौके से चाइनिज हैंड ग्रेनेड, दो एके 47 और चार मैगजीन व दूसरी विस्फोटक सामग्री बरामद की गई।

ये हैं वे नौ जांबाज, जिन्हें मिला है वीरता पदक...

एल. इबोमोछा सिंह को राष्ट्रपति का पुलिस वीरता पदक (प्रेसीडेंट पुलिस मेडल फॉर गैलेंट्री), मोहम्मद मजाहिद खान को भी पीपीएमजी (मरणोपरांत), रवि शर्मा को पुलिस वीरता पदक (पुलिस मेडल फॉर गैलेंट्री), नरेश कुमार को पीएमजी, अबे थॉमस को पीएमजी, बुधि सिंह को पीएमजी, रंजन कुमार को पीएमजी, देवसंत कुमार को पीएमजी और संतराम सिंह को भी पीएमजी से सम्मानित करने की घोषणा की गई है।

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