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दुनिया में सबसे लंबे समय तक चलने वाले स्टूडियो पर पड़ा ताला
रीता तिवारी/ अमर उजाला, कोलकाता
Updated Sat, 18 Jun 2016 04:36 AM IST
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दुनिया में सबसे लंबे समय तक चलने वाला फोटो स्टूडियो बोर्न एंड शेफर्ड (बी एंड एस) अब खुद इतिहास बन गया है। करीब पौने दो सौ तक ब्रिटिश राज और हिंदुस्तान के इतिहास को कैमरे की नजर से देखते रहे इस स्टूडियो पर ताला पड़ गया। यह स्टूडियो जिस इमारत में चलता था, अप्रैल में भारतीय जीवन बीमा निगम ने उसका अधिग्रहण कर लिया। वर्ष 1839 में फ्रांस और लंदन में व्यावसायिक फोटोग्राफी शुरू होने के साल भर बाद विलियम हावर्ड ने कलकत्ता में इस स्टूडियो की स्थापना की थी।
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इस स्टूडियो ने बीते 176 वर्षों के सफर में न जाने कितने ही ऐतिहासिक क्षणों को समेटा था। इनमें सबसे मशहूर तस्वीर रामकृष्ण परमहंस की है, जो स्वामी विवेकानंद के कहने पर सन् 1886 में उनकी मौत के कुछ महीने पहले खींची गई थी। वर्ष 1863 में सैमुएल बोर्न और चार्ल्स शेफर्ड ने विलियम के साथ हाथ मिलाया था। तब इस स्टूडियो का नाम हावर्ड, बोर्न एंड शेफर्ड रखा गया। वर्ष 1866 में हावर्ड के जाने के बाद इसका नाम बोर्न एंड शेफर्ड हो गया। वर्ष 1870 में बोर्न भी भारत छोड़कर चले गए।
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वर्ष 1911 में किंग जार्ज पंचम और क्वीन मैरी के भारत के सम्राट और साम्राज्ञी के तौर पर राज्याभिषेक के मौके पर आयोजित दिल्ली दरबार में अधिकृत फोटोग्राफर होने का गौरव इसी स्टूडियो को मिला था। इसके पहले 1877 और 1903 में हुए दिल्ली दरबार की तस्वीरें भी इसी स्टूडियो ने बनाई थीं।
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सन् 1930 से 64 के दौरान कई बार इसका मालिकाना हक बदला। इसके मौजूदा मालिक जयंत गांधी बताते हैं कि अपनी बढ़ती उम्र के चलते उनके लिए अब स्टूडियो चलाना संभव नहीं है। दरअसल, वर्ष 1991 में लगी भयावह आग के बाद यह स्टूडियो कभी उबर नहीं सका। आग में स्टूडियो की पूरी लाइब्रेरी जल कर राख हो गई थी। उस आग और फोटोग्राफी के फिल्म से डिजिटल पर आने की प्रक्रिया ने भी स्टूडियो के बंद होने में भूमिका निभाई।
पहले यह स्टूडियो साढ़े चार हजार वर्ग फीट में फैला था, लेकिन आगजनी के बाद वह तीन हजार वर्ग फीट तक सिमट गया। वर्ष 1962 से ही यह स्टूडियो 30 पैसे वर्ग फीट की दर से हर महीने किराए के तौर पर महज नौ सौ रुपये का भुगतान कर रहा था। अब इसे अधिग्रहीत करने वाले जीवन बीमा निगम ने कहा है कि अगर कोई नया मालिक इसका अधिग्रहण करके बाजार दर पर किराया देना कबूल करे, तो यह स्टूडियो चलता रह सकता है। लेकिन उस इलाके में मौजूदा बाजार भाव तीन लाख रुपये प्रति वर्ग फीट है। इस लिहाज से इसके फिर से चलने की संभावना नहीं के बराबर ही है।
बुजुर्ग फोटोग्राफर निमाई घोष कहते हैं कि इस स्टूडियो में जाना उनके लिए तीर्थ पर जाने के समान था। इसमें आग लगने पर सत्यजित रे काफी व्यथित हुए थे। जाने-माने लेखक शंकर कहते हैं कि विश्व के बेहतरीन स्टूडियो में शुमार बोर्न एंड शेफर्ड का बंद होना दुखद है। सरकार या किसी संगठन को इसका अधिग्रहण कर लेना चाहिए था।
Published By Rahul Sankrityayan