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30 फीसदी तक सस्ता हो सकता है तेल, मेथेनॉल इकोनॉमी से क्रांति लाएगा नीति आयोग

Wed, 06 Jun 2018 04:28 AM IST
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 06 Jun 2018 04:28 AM IST
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Oil may be up to 30% cheaper, Policy Commission to bring revolution from Methanol Economy
niti aayog
नीति आयोग की मानें तो जल्द ही देश में मेथेनॉल आधारित अर्थव्यवस्था लागू करने की योजना पर काम कर रहा है। नीति आयोग इसे लागू करने के लिए रोडमैप तैयार कर रहा है, जिससे न केवल प्रदूषण कम होगा बल्कि तेल आयात पर भी निर्भरता कम होगी। 
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विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर सराकर के थिंक टैंक नीति आयोग ने कहा कि उन्होंने 20 फीसदी कच्चे तेल के आयात की जगह मेथेनॉल को इस्तेमाल को लेकर एक व्यापक योजना बनाई है। आयोग के मुताबिक इतनी मात्रा में मेथेनॉल के इस्तेमाल से देश में प्रदूषण को 40 फीसदी तक कम किया जा सकता है। 
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नीति आयोग के मुताबिक एक निर्धारित समय के भीतर डीजल का इस्तेमाल भी पूरी तरह से खत्म किया जा सकता है। आयोग का कहना है कि अकेले भारतीय रेलवे हर साल 3 अरब लीटर डीजल खर्च करता है और उसकी योजना है कि 6 हजार डीजल इंजनों को 100 फीसदी मेथेनॉल के इस्तेमाल के लायक बनाया जाए, ताकि रेलवे को कार्बन तटस्थ संगठन बनाया जा सके। 
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आयोग के मुताबिक उसका प्रयास है कि मेथनॉल के साथ तेल के विकल्प को समुद्री क्षेत्र और ऊर्जा क्षेत्र में भी इस्तेमाल किया जा सके। आयोग के मुताबिक मेथनॉल को अपनाने से भारत का अपना स्वदेशी ईंधन मौजूदा उपलब्ध ईंधन के मुकाबले लगभग 19 रुपए लीटर प्रति लीटर कम से कम 30% सस्ता हो सकता है।

इसके अलावा मेथेनॉल ईंधन के इस्तेमाल से पर्यावऱण को भी फायदा पहुंचेगा और शहरों में प्रदूषण की समस्या से निबटने में आसानी होगी। आयोग का कहना है कि अगले 5 से 7 सालों में डीजल की खपत में 20 फीसदी कमी लाने से 20 हजार करोड़ सालाना की बचत होगी। इसके अलावा अगले 3 सालों में एलपीजी के बिल में भी सालाना 6 हजार करोड़ की बचत होगी। साथ ही पेट्रोल में मेथेनॉल मिलाने से अगले 3 सालों में ईंधन खर्च पर सालाना 5 हजार करोड़ रुपयों की बचत की जा सकेगी। 


आयोग के मुताबिक मेथेनॉल टिकाऊ ईंधन है, जिसे प्राकृतिक गैस, कोयले, बॉयो-मास, नगरपालिका के ठोस कूड़े और यहां तक कि कार्बन डाई आक्साइड से भी उत्पादित किया जा सकता है। इससे पहले मेथेनॉल अर्थव्यवस्था को चीन, इटली, स्वीडन, इजरायल, अमेरिका, आस्ट्रेलिया, जापान और कई यूरोपियन देशों में सक्रीय रूप से लागू कर चुके हैं। वहीं चीन में परिवहन क्षेत्र में 10 प्रतिशत ईंधन मेथनॉल है। आयोग के मुताबिक हमारे देश में भी परिवहन क्षेत्र में 15 फीसदी मेथेनॉल के सम्मिश्रण को लेकर फील्ड ट्रायल चल रहे हैं। 
 
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