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ओडिशा: ब्रेन डेड लड़की के माता-पिता ने किया सराहनीय काम; लीवर दान कर बचाई दिल्ली के शख्स की जान

Fri, 23 Feb 2024 11:57 PM IST
यशोधन शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर Published by: यशोधन शर्मा Updated Fri, 23 Feb 2024 11:57 PM IST
सार

एक अधिकारी ने बताया कि लड़की का नाम दमयंती महंत है और वह क्रोनिक किडनी रोग से पीड़ित थी। नाबालिग का पिछले कुछ महीनों से डायलिसिस चल रहा था।

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Odisha brain dead girl parents donate liver save unknown person Delhi
(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Social Media

विस्तार

एम्स भुवनेश्वर में पहली बार सर्जनों ने शुक्रवार को एक 14 वर्षीय ब्रेन डेड लड़की का लीवर दान किया। प्रमुख संस्थान के कार्यकारी निदेशक डॉक्टर आशुतोष बिस्वास ने बताया कि लड़की का सफलतापूर्वक लीवर निकालकर ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से नई दिल्ली के एक अस्पताल में भेजा गया।

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क्रोनिक किडनी रोग से जूझ रही थी नाबालिग
एक अधिकारी ने बताया कि लड़की का नाम दमयंती महंत है और वह क्रोनिक किडनी रोग से पीड़ित थी। नाबालिग का पिछले कुछ महीनों से डायलिसिस चल रहा था।  दमयंती के माता-पिता बनिता औऱ दुखबंधु मूल रूप से ओडिशा के क्योंझर जिले के निवासी हैं। वर्तमान में भुवनेश्वर रहते हैं। दोनों ने डॉक्टरों द्वारा उसे ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद उसके उपयोगी अंगों को दान करने का फैसला किया। 
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कोमा में चली गई थीं दमयंती
दमयंती को ब्रेन स्ट्रोक हुआ, जिसके चलते उन्हें 15 फरवरी को एम्स भुवनेश्वर के मेडिसिन विभाग में भर्ती कराया गया। इसके बाद, वह कोमा में चली गईं और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। बिस्वास ने कहा कि सुधार के कोई लक्षण नहीं दिखने पर एम्स भुवनेश्वर की एक विशेषज्ञ समिति ने कई परीक्षणों के बाद उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। 
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दमयंती के माता-पिता के मानवीय भाव के लिए आभार व्यक्त करते हुए, बिस्वास ने राष्ट्रीय संस्थान में पहले मृत दाता अंग पुनर्प्राप्ति को सफलतापूर्वक आयोजित करने के लिए पूरी प्रत्यारोपण टीम की भी सराहना की। डॉक्टर ने इस बात पर जोर दिया कि दमयंती के योगदान को मानवता के एक महत्वपूर्ण कार्य के रूप में याद किया जाएगा। 

किसी को जीवन देने पर है खुशी...
दमयंती के पिता दुखबंधु महंत एक ऑटो-चालक हैं, उन्होंने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा, 'हम जानते हैं कि हमने अपनी बेटी को हमेशा के लिए खो दिया है। अगर उसके शरीर के अंग किसी अन्य व्यक्ति की मदद कर सकते हैं, तो इससे बेहतर कुछ नहीं है। हम हमारी बेटी को खोने के कारण टूट गए हैं, लेकिन, खुशी भी है कि एक और व्यक्ति को जीवन मिलेगा।'


इलाज करने वाले चिकित्सक श्रीकांत बेहरा ने सहमति प्राप्त करने सहित पूरी प्रक्रिया का समन्वय किया। वहीं, इस गैस्ट्रो सर्जरी विभाग के एक संकाय सदस्य ब्रुम्हदत्त पटनायक सर्जरी टीम का हिस्सा थे।


 
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