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ओडिशा: महिला सशक्तिकरण पर श्रेय लेने की होड़, भाजपा और बीजद में छिड़ी जुबानी जंग
Mon, 13 Apr 2026 01:05 AM IST
Nirmal Kant
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर।
Published by: Nirmal Kant
Updated Mon, 13 Apr 2026 01:05 AM IST
सार
संसद के विशेष सत्र से पहले ओडिशा में भाजपा और बीजद के बीच महिला आरक्षण को लेकर जुबानी जंग छिड़ गई है। दोनों दल इसे अपने-अपने नेताओं की उपलब्धि बता रहे हैं। महिला आरक्षण कानून के तहत 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है, लेकिन इसे 2029 से लागू करने के लिए परिसीमन और जनगणना के चलते कानून में संशोधन जरूरी है। पढ़िए रिपोर्ट-
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ओडिशा की उपमुख्यमंत्री प्रवती परिदा
- फोटो : एक्स/प्रवती परिदा
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विस्तार
संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र से पहले ओडिशा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और बीजू जनता दल (बीजद) के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है। दोनों ही दल खुद को महिला सशक्तिकरण का असली समर्थक बता रहे हैं। संसद में महिला आरक्षण कानून में प्रस्तावित संशोधनों पर चर्चा और इसके पारित होने की संभावना है।
सत्तारूढ़ भाजपा ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण का पूरा श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया। वहीं, बीजद ने दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक और ओडिशा विधानसभा में विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने इस तरह के आरक्षण के लिए लड़ाई लड़ी थी।
महिला आरक्षण कानून के तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 816 हो जाएगी। इनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान 2023 में संविधान संशोधन के जरिये लाया गया था।
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हालांकि, महिला आरक्षण 2027 की जनगणना के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू होना था। इसका मतलब यह था कि अगर मौजूदा कानून यथावत रहता, तो आरक्षण 2034 से पहले लागू नहीं हो पाता। इसे 2029 के लोकसभा चुनावों से लागू करने के लिए कानून में बदलाव जरूरी है, इसलिए सरकार विशेष सत्र बुला रही है।
ओडिशा की उपमुख्यमंत्री परिदा ने क्या कहा?
ओडिशा की उपमुख्यमंत्री प्रवती परिदा ने कहा कि दशकों तक देश की महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित रखा गया। उन्होंने बताया कि महिलाएं लगभग 48.5 प्रतिशत आबादी हैं, फिर भी उनकी राजनीतिक भागीदारी सीमित रही है। उन्होंने कहा कि अब समय बदल रहा है।
परिदा ने कहा, 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' एक मजबूत कदम है, जो महिलाओं को निर्णय लेने की मुख्यधारा में लाएगा। इस कानून के तहत संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। वह महिला एवं बाल विकास और मिशन शक्ति विभाग की भी जिम्मेदारी संभाल रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पीएम मोदी ने महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए प्रयास किए हैं।
ये भी पढ़ें: कर्नाटक में मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट: CM सिद्धारमैया ने तोड़ी चुप्पी, विरोधियों को भी दिया जवाब
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं। इनमें प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, हर घर जल जीवन मिशन के तहत पाइप से पानी, जन धन योजना के तहत बैंक खाते और लखपति दीदी योजना शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ओडिशा की 'सुभद्रा योजना' महिला सशक्तिकरण में अग्रणी बन गई है।
बीजद ने क्या प्रतिक्रिया दी?
परिदा के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजद नेता टुकुनी साहू ने कहा कि 1990 से 1995 के बीच मुख्यमंत्री रहे बीजू पटनायक ने त्रि-स्तरीय पंचायत प्रणाली में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण शुरू किया था। उन्होंने कहा कि बीजू बाबू ने अपने समय में महिला आरक्षण के लिए काम किया था, इसलिए असली श्रेय उन्हें मिलना चाहिए। बीजद प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने बयान में कहा कि ओडिशा ने अपने सुधार वाले प्रयासों में आगे बढ़कर काम किया है।
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सत्तारूढ़ भाजपा ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण का पूरा श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया। वहीं, बीजद ने दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक और ओडिशा विधानसभा में विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने इस तरह के आरक्षण के लिए लड़ाई लड़ी थी।
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महिला आरक्षण कानून के तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 816 हो जाएगी। इनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान 2023 में संविधान संशोधन के जरिये लाया गया था।
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हालांकि, महिला आरक्षण 2027 की जनगणना के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू होना था। इसका मतलब यह था कि अगर मौजूदा कानून यथावत रहता, तो आरक्षण 2034 से पहले लागू नहीं हो पाता। इसे 2029 के लोकसभा चुनावों से लागू करने के लिए कानून में बदलाव जरूरी है, इसलिए सरकार विशेष सत्र बुला रही है।
ओडिशा की उपमुख्यमंत्री परिदा ने क्या कहा?
ओडिशा की उपमुख्यमंत्री प्रवती परिदा ने कहा कि दशकों तक देश की महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित रखा गया। उन्होंने बताया कि महिलाएं लगभग 48.5 प्रतिशत आबादी हैं, फिर भी उनकी राजनीतिक भागीदारी सीमित रही है। उन्होंने कहा कि अब समय बदल रहा है।
परिदा ने कहा, 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' एक मजबूत कदम है, जो महिलाओं को निर्णय लेने की मुख्यधारा में लाएगा। इस कानून के तहत संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। वह महिला एवं बाल विकास और मिशन शक्ति विभाग की भी जिम्मेदारी संभाल रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पीएम मोदी ने महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए प्रयास किए हैं।
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उपमुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं। इनमें प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, हर घर जल जीवन मिशन के तहत पाइप से पानी, जन धन योजना के तहत बैंक खाते और लखपति दीदी योजना शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ओडिशा की 'सुभद्रा योजना' महिला सशक्तिकरण में अग्रणी बन गई है।
बीजद ने क्या प्रतिक्रिया दी?
परिदा के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजद नेता टुकुनी साहू ने कहा कि 1990 से 1995 के बीच मुख्यमंत्री रहे बीजू पटनायक ने त्रि-स्तरीय पंचायत प्रणाली में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण शुरू किया था। उन्होंने कहा कि बीजू बाबू ने अपने समय में महिला आरक्षण के लिए काम किया था, इसलिए असली श्रेय उन्हें मिलना चाहिए। बीजद प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने बयान में कहा कि ओडिशा ने अपने सुधार वाले प्रयासों में आगे बढ़कर काम किया है।