बेहद दिलचस्प है असम में एनआरसी के आंकड़ों की गुमशुदगी की कहानी, नहीं मिल रही 'चाबी'
- एनआरसी लेकर आया उबाल, लेकिन असम में चल रही है कुछ और कहानी
- ठेके की कर्मचारी ने इस्तीफा देने का बाद भी नहीं दिया रिकार्ड
- पासवर्ड नहीं बताने पर स्टेट कोआर्डिनेटर ने दर्ज कराए मुकदमे
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यह डाटा विप्रो जैसी प्रतिष्ठित आईटी कंपनी की अधिकारी के कंट्रोल में है। यह अधिकारी इस्तीफा देकर पिछले साल जा चुकी है और बार-बार स्टेट एनआरसी कोआर्डिनेटर के पत्र लिखने के बाद भी डाटा तक पहुंचने के लिए पासवर्ड उपलब्ध नहीं करा रही है। यह डेटा 15 दिसंबर से 2019 से ऑफ लाइन है। हार कर उसके पास असम के पलटन बाजार थाना क्षेत्र में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
असम में इस कहानी पर केंद्रीय गृह मंत्रालय के पूर्व सचिव ने आश्चर्य जताया है। नाम न छापने की शर्त पर सूत्र का कहना है कि इतने संवेदनशील मामले में इस तरह का यह अनोखा उदाहरण है। पूर्व अधिकारी का कहना है कि यह मामला ही एक अलग जांच का विषय है। एनआरसी के स्टेट कोआर्डिनेटर (असम) हितेश देव शर्मा का कहना है कि 11 नवंबर को महिला अधिकारी ने इस्तीफा दे दिया था।
15 दिसंबर से डाटा ऑफ लाइन है। 24 दिसंबर को उन्होंने बतौर स्टेट कोआर्डिनेटर ज्वाइन किया है। तब से कई बार पूर्व अधिकारी को पत्र लिखा जा चुका है। डाटा की मांग की, लेकिन अभी तक इसने उपलब्ध नहीं कराया।
स्टेट कोआर्डिनेटर का कहना है कि एनआरसी से आंकड़ों में यदि कोई छेड़छाड़ की जाती है, तो इसका आसानी से पता चल जाएगा। हालांकि उनका कहना है कि पासवर्ड न देने के पीछे अभी आंकड़ों से छेड़छाड़ किए जाने का उद्दश्य नहीं मानते।
स्टेट कोआर्डिनेटर के अनुसार पूर्व की अधिकारी संविदा पर थी। शर्मा का कहना है कि पूर्व अधिकारी ने इस मामले में सीक्रेट ऑफिसियल एक्ट का सीधा-सीधा उल्लंघन किया है।