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इलेक्ट्रिक इंजन से दौड़ेगी ट्रेन, 1700 करोड़ रुपये बचाएगी सरकार, होंगे कई फायदे
नवनीत शरण/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 21 Nov 2017 03:52 AM IST
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रेलवे से भाप इंजन की तरह ही डीजल इंजन की भी विदाई हो जाएगी। आने वाले समय में रेल ट्रैक पर केवल इलेक्ट्रिक इंजन ही दौड़ेंगे। रेल विभाग ने डीजल इंजन को चरणबद्ध तरीके से हटाने का खाका तैयार कर लिया है। इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेनों को रफ्तार तो मिलेगी ही यह किफायती भी होगा। डीजल इंजन हटने से सालाना 1700 करोड़ रुपये की बचत होगी।
मंत्रालय ने रेल ट्रैक से डीजल इंजन को पूरी तरह हटाने की कवायद शुरू कर दी है। लोको शेड में अब इलेक्ट्रिक इंजन ही बनाया जा रहा है।
पहले चितरंजन लोकोमोटिव वर्क्स में इलेक्ट्रिक इंजन तैयार किया जाता था, लेकिन अब वाराणसी स्थित डीजल लोकोमोटिव वर्क्स में भी इलेक्ट्रिक इंजन बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। प्रतिवर्ष ढाई सौ इलेक्ट्रिक इंजन का निर्माण किया जा रहा है।
डीजल इंजन हटने के फायदे
अधिकारियों के अनुसार इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेन चलाने से सालाना 1700 करोड़ रुपये की बचत होगी। साथ ही वायु प्रदूषण भी कम होगा। प्रतिवर्ष 2.8 बिलियन लीटर डीजल की खपत कम हो जाएगी।
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रेलवे के बेड़े में अभी कुल 10,773 इंजन हैं। इनमें 5,016 इलेक्ट्रिक इंजन, 5,714 डीजल इंजन और 43 भाप इंजन हैं।
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मंत्रालय ने रेल ट्रैक से डीजल इंजन को पूरी तरह हटाने की कवायद शुरू कर दी है। लोको शेड में अब इलेक्ट्रिक इंजन ही बनाया जा रहा है।
पहले चितरंजन लोकोमोटिव वर्क्स में इलेक्ट्रिक इंजन तैयार किया जाता था, लेकिन अब वाराणसी स्थित डीजल लोकोमोटिव वर्क्स में भी इलेक्ट्रिक इंजन बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। प्रतिवर्ष ढाई सौ इलेक्ट्रिक इंजन का निर्माण किया जा रहा है।
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डीजल इंजन हटने के फायदे
अधिकारियों के अनुसार इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेन चलाने से सालाना 1700 करोड़ रुपये की बचत होगी। साथ ही वायु प्रदूषण भी कम होगा। प्रतिवर्ष 2.8 बिलियन लीटर डीजल की खपत कम हो जाएगी।
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रेलवे के बेड़े में अभी कुल 10,773 इंजन हैं। इनमें 5,016 इलेक्ट्रिक इंजन, 5,714 डीजल इंजन और 43 भाप इंजन हैं।