फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Now the school going to be freed from homework till Second Class students

अब चलेगी मस्ती की पाठशाला, दूसरी तक के छात्रों को होमवर्क से मुक्ति

Tue, 27 Nov 2018 12:43 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 27 Nov 2018 12:43 AM IST
विज्ञापन
Now the school going to be freed from homework till Second Class students
school bag
सरकार ने छोटे बच्चों से पढ़ाई का बोझ कम करने के लिए उन्हें होमवर्क से मुक्ति दे दी है। पूरे देश में पहली और दूसरी कक्षा के छात्रों को होमवर्क से निजात के साथ ही बस्ते का बोझ भी कम किया गया है। 10वीं तक के छात्रों के बस्ते का वजन तय कर दिया गया है। अब बस्ते का न्यूनतम वजन डेढ़ किलो और अधिकतम पांच किलो होगा।
विज्ञापन


मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश जारी किया और कहा कि वह केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन करवाएं। सभी स्कूलों से पहली और दूसरी कक्षा के छात्रों को होमवर्क न देने का निर्देश दिया है। स्कूलों से यह भी कहा गया है कि वह निर्धारित विषय के अलावा किसी अन्य विषय को न पढ़ाएं। नया नियम स्टेट बोर्ड, केंद्रीय विद्यालय, सीबीएसई और सीआईएससीई के स्कूलों पर सत्र 2019-20 से लागू होगा। इस कवायद से बच्चों को खेलकूद का मौका मिलेगा और पढ़ाई में अरुचि नहीं होगी।
विज्ञापन


घटा बस्ते का बोझ
कक्षा             वजन (किग्रा में)
1-2              1.5
3-5              2-3
5-6              4.0
7-9              4.5
10               5.0
Trending Videos

अतिरिक्त किताबें खरीदने का दबाव नहीं बनाएंगे स्कूल

मंत्रालय के शिक्षा विभाग के सचिव ए. हमजा ने 20 नवंबर को जारी निर्देश में कहा कि अतिरिक्त किताब, अध्ययन सामग्री खरीदने का दबाव भी किसी विद्यार्थी पर नहीं डाला जाएगा।

दूसरी कक्षा तक मात्र गणित व भाषा की पढ़ाई
मंत्रालय ने पहली और दूसरी कक्षा के छात्रों को केवल गणित और भाषा पढ़ाने के लिए कहा है। तीसरी से पांचवीं कक्षा के छात्रों को गणित, भाषा और सामान्य विज्ञान पढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, जिसे एनसीईआरटी द्वारा मान्यता दी गई है।

लंबे अर्से से चल रही थी मुहिम
स्कूली बैग का वजन कम कराने की मुहिम लंबे समय से चल रही थी। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियैट्रिक्स ने भी बस्ते के वजन को खतरनाक बताते हुए इसे कम करने की मांग की थी। उसका कहना था कि ज्यादा वजन का असर बच्चों की हड्डियों पर पड़ रहा है। 

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed