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Ravi-Beas Water Tribunal: अब एक साल बाद आएगी रावी-ब्यास जल न्यायाधिकरण की रिपोर्ट, केंद्र ने बढ़ाई समयसीमा
Fri, 11 Jul 2025 03:05 PM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: बशु जैन
Updated Fri, 11 Jul 2025 03:05 PM IST
सार
अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम 1956 के तहत गठित रावी ब्यास न्यायाधिकरण को पंजाब जल समझौते को लेकर केंद्र सरकार को रिपोर्ट सौंपनी है। मगर सरकार ने रिपोर्ट सौंपने की समयसीमा एक साल के लिए बढ़ा दी है।
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सीआर पाटिल, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री
- फोटो : X / @CRPaatil
विस्तार
पंजाब जल समझौते से जुड़े मामलों के समाधान में लगातार देरी हो रही है। अब इसमें एक साल का अतिरिक्त समय लगेगा। केंद्र ने रावी और ब्यास जल न्यायाधिकरण के लिए अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने की समय सीमा एक साल के लिए बढ़ा दी है। अब न्यायाधिकरण को पांच अगस्त, 2026 तक रिपोर्ट पेश करनी होगी।
अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम 1956 के तहत गठित रावी ब्यास न्यायाधिकरण को पंजाब और उसके पड़ोसी राज्यों के बीच रावी और ब्यास नदी के पानी के वितरण से संबंधित मामलों का निपटारा करने का काम सौंपा गया है। न्यायाधिकरण का गठन दो अप्रैल 1986 को किया गया था। जल समझौतों को लेकर न्यायाधिकरण ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट 30 जनवरी, 1987 को केंद्र सरकार को सौंप दी थी।
ये भी पढ़ें: कई महीने की रणनीति के बाद पकड़े कोयंबटूर बम विस्फोट के आरोपी, करीब तीन दशकों बाद मिली सफलता
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इसके बाद केंद्र ने न्यायाधिकरण से समझौतों को लेकर और स्पष्टीकरण मांगे। ऐसे में समझौतों को लेकर समीक्षा प्रक्रिया चलती रही। करीब चार दशक से चल रही समीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद न्यायाधिकरण को रिपोर्ट सौंपनी थी। मगर जल शक्ति मंत्रालय ने एक बार फिर रिपोर्ट सौंपने की समयसीमा में इजाफा कर दिया।
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जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जारी एक राजपत्र अधिसूचना के अनुसार सरकार ने विस्तार के लिए न्यायाधिकरण द्वारा चिह्नित कार्य की अनिवार्यताओं का हवाला दिया। साथ ही रिपोर्ट सौंपने की सीमा को पांच अगस्त 2026 तक के लिए बढ़ा दिया।
सतलुज-यमुना लिंक नहर विवाद दूर करने पर हरियाणा-पंजाब सहमत
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय में अंतर-राज्यीय जल विवाद पर चर्चा के लिए हुई बैठक में पंजाब-हरियाणा सतलुज-यमुना लिंक नहर विवाद को दूर करने पर सहमत हो गए थे। पंजाब और हरियाणा के बीच जल बंटवारे के लिए दशकों पहले बनाई गई एसवाईएल नहर वर्षों से कानूनी और राजनीतिक विवाद का केंद्र है। जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा कि मंत्रालय जल संसाधनों के न्यायसंगत और बेहतर प्रबंधन के लिए दोनों राज्यों को पूरा सहयोग प्रदान करेगा।
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अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम 1956 के तहत गठित रावी ब्यास न्यायाधिकरण को पंजाब और उसके पड़ोसी राज्यों के बीच रावी और ब्यास नदी के पानी के वितरण से संबंधित मामलों का निपटारा करने का काम सौंपा गया है। न्यायाधिकरण का गठन दो अप्रैल 1986 को किया गया था। जल समझौतों को लेकर न्यायाधिकरण ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट 30 जनवरी, 1987 को केंद्र सरकार को सौंप दी थी।
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इसके बाद केंद्र ने न्यायाधिकरण से समझौतों को लेकर और स्पष्टीकरण मांगे। ऐसे में समझौतों को लेकर समीक्षा प्रक्रिया चलती रही। करीब चार दशक से चल रही समीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद न्यायाधिकरण को रिपोर्ट सौंपनी थी। मगर जल शक्ति मंत्रालय ने एक बार फिर रिपोर्ट सौंपने की समयसीमा में इजाफा कर दिया।
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जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जारी एक राजपत्र अधिसूचना के अनुसार सरकार ने विस्तार के लिए न्यायाधिकरण द्वारा चिह्नित कार्य की अनिवार्यताओं का हवाला दिया। साथ ही रिपोर्ट सौंपने की सीमा को पांच अगस्त 2026 तक के लिए बढ़ा दिया।
सतलुज-यमुना लिंक नहर विवाद दूर करने पर हरियाणा-पंजाब सहमत
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय में अंतर-राज्यीय जल विवाद पर चर्चा के लिए हुई बैठक में पंजाब-हरियाणा सतलुज-यमुना लिंक नहर विवाद को दूर करने पर सहमत हो गए थे। पंजाब और हरियाणा के बीच जल बंटवारे के लिए दशकों पहले बनाई गई एसवाईएल नहर वर्षों से कानूनी और राजनीतिक विवाद का केंद्र है। जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा कि मंत्रालय जल संसाधनों के न्यायसंगत और बेहतर प्रबंधन के लिए दोनों राज्यों को पूरा सहयोग प्रदान करेगा।