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अफसर से माननीय बनने की होड़: किसी ने बनाई पार्टी, किसी ने बदला दल; क्या वोटों में बदलेगा प्रशासनिक रुतबा?
Tue, 27 Oct 2026 04:32 AM IST
शिवम गर्ग
अजीत खरे, नई दिल्ली।
अजीत खरे, नई दिल्ली।
Published by: शिवम गर्ग
Updated Tue, 27 Oct 2026 04:32 AM IST
सार
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व नौकरशाह अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने में जुटे हैं। कुछ नई पार्टियां बना रहे हैं, तो कुछ बड़े दलों का सहारा ले रहे हैं। लेकिन क्या इस बार प्रशासनिक अनुभव वोटों में बदल पाएगा? आइए, जानते हैं...
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चुनावी रण में पूर्व नौकरशाहों की होड़
- फोटो : Amar Ujala Graphics
विस्तार
खुद की पार्टी बना कर अपनी सियासी हसरतें पूरी करने का चलन चुनावों की आहट के साथ तेज होता जा रहा है। महीने भर में जहां दो पूर्व नौकरशाह ने अपनी नई पार्टी का एलान कर दिया, तो वहीं सियासी राह मेें भटकते हुए अनुभवी हो चुके पूर्व नौकरशाह दलबदल कर अपनी मंजिल पाने में जुट गए हैं। चुनावी इतिहास गवाह है कि राज्य में नौकरशाहों को सियासी कामयाबी ज्यादा नहीं मिली। इसके उलट डीएम रहे कई अधिकारी उसी जिले से चुनाव लड़ने पहुंचे तो जनता ने नकार दिया।
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सीबीआई के पूर्व निदेशक नागेश्वर राव ने हाल में सर्वजन समाज पार्टी के गठन का एलान किया। उससे पहले पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल ने जन नीति भारत पार्टी बनाने की बात कही। वह तो चुनाव लड़ने की भी तैयारी में है। माना जा रहा है कि यूपी विधानसभा चुनाव में आधा दर्जन से ज्यादा आईएएस, आईपीएस व पीसीएस अधिकारी राजनीति के मैदान मेें अपनी किस्मत आजमाने की तैयारी कर रहे हैं। कुछ आईएएस अधिकारी नौकरी के बाद विभिन्न दलों में चुनाव लड़ने के बजाय रणनीति बना रहे हैं।
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प्रमुख सचिव गृह रहे कुंवर फतेह बहादुर पूर्व आईएएस राम बहादुर को जब भाजपा में अपना भविष्य नहीं दिखा तो वह सपा में शामिल हो गए। प्रमुख सचिव गृह रहे कुंवर फतेह बहादुर पहले से ही सपा में हैं। यह दोनों बसपा प्रमुख मायावती के करीबी अफसरों में माने जाते थे। पूर्व आईएएस अधिकारी प्रवीण प्रकाश ने हाल में कांग्रेस का दामन थाम लिया है।
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खुद की बनाई पार्टी, पर नहीं मिली कामयाबी
उत्तर प्रदेश आईएएस अधिकारियों में महाभ्रष्ट चिन्हित करने की जंग छेड़ने वाले विजय शंकर पांडेय ने अपनी लोकगठबंधन पार्टी बनाई और फैजाबाद लोकसभा चुनाव लड़ा, उन्हें ढाई हजार वोट भी नहीं मिले। खास बात यह कि फैजाबाद के डीएम भी रहे। पूर्व आईएएस चंद्रपाल ने आदर्श समाज पार्टी बनाई। इससे पहले पत्नी विमला पाल ने भी कई बार अलग-अलग दलों से विधानसभा चुनाव लड़ाया। कोई कामयाबी नहीं।
प्रमुख सचिव रहे हरीश चंद्रा ने राष्ट्रीय जनवादी पार्टी क्रांतिकारी बनाई। राम बहादुर ने नागरिक एकता पार्टी बनाई। वह गोंडा के डीएम रह चुके थे लेकिन गोंडा लोकसभा चुनाव हार गए। यूपी के पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह ने अलग बुंदेलखंड राज्य के सवाल पर बुंदेलखंड लोकतांत्रिक पार्टी बनाई। लेकिन चुनाव नहीं लड़ा। पूर्व आईआरएस उदित राज ने पहले इंडियन जस्टिस पार्टी बनाई। भाजपा में रह कर सांसद बने। अब कांग्रेस में हैं। पिछले दिनों पूर्व पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा बनाया। उनकी पार्टी सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है।
बड़े दलों में सक्रिय नहीं पूरी हुई मुराद
आईएएस अफसर एसडी वागला सेवानिवृत्त होकर भाजपा में शामिल हो गए, लेकिन उन्हें चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिला। मायावती के प्रमुख सचिव रहे राय सिंह भी कांग्रेस में शामिल हुए। इलाहाबाद के मंडलायुक्त रहे बादल चटर्जी ने इलाहाबाद उत्तरी से निर्दलीय विधानसभा चुनाव लड़ा हार गए। खनन सचिव रहे एस के वर्मा रालोद के जरिए चांदपुर सीट से लड़े, बाद में भाजपा में शामिल हो गए।