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सुप्रीम कोर्ट: CJI बोले- महिला वकीलों के बार रूम का फंड जारी करे सरकार; 14 राज्य रिटायरमेंट एज 62 करने पर सहमत

Tue, 27 Oct 2026 04:42 AM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला। Published by: ज्योति भास्कर Updated Tue, 27 Oct 2026 04:42 AM IST
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Supreme Court Updates Govt Fund Women Bar room CJI Bench Judicial officers retirement issue other case hearing
सुप्रीम कोर्ट अपडेट - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जिला और तालुका अदालतों में महिला वकीलों के लिए बार रूम, वॉशरूम और अन्य बुनियादी सुविधाएं बनाने के लिए फंड आवंटित करने का निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची, न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने यह निर्देश महिला वकीलों के एक समूह की याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी किए। पीठ ने इस मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर के लिए तय की है।

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पीठ ने महिला वकीलों के लिए बार रूम न होने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि महिला वकीलों की संख्या चाहे जो भी हो, उन्हें सुविधाएं मिलनी ही चाहिए। पीठ ने कहा, अगर महिला वकीलों के लिए बार रूम नहीं हैं, तो हम इस पर कड़ी आपत्ति जताते हैं। पीठ ने आगे कहा कि सभी हाईकोर्ट और राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है कि जहां भी महिला वकील प्रैक्टिस कर रही हैं, वहां उन्हें जरूरी सुविधाओं से युक्त अलग बार रूम मुहैया कराया जाए।
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महिला वकीलों ने उठाया था सुविधाएं न होने का मुद्दा
सुप्रीम कोर्ट में महिला वकीलों के समूह की दायर याचिका में कानूनी पेशे में महिलाओं की पहुंच, समावेशिता और लंबे वक्त तक काम करने की संभावनाओं से जुड़े मुद्दे उठाए गए थे। इसमें कहा गया था कि देश की अधिकांश अदालतों, ट्रिब्यूनलों और आयोगों में महिला वकीलों के लिए पर्याप्त सुविधाओं वाले बार रूम और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं का अभाव है।
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14 राज्य न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति की उम्र 60 से बढ़ाकर 62 साल करने को तैयार
एक अन्य मामले में चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने रिटायमेंट की आयु बढ़ाने पर टिप्पणी की। सोमवार को पीठ ने कहा कि 14 राज्य जिला न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति उम्र 60 से बढ़ाकर 62 साल करने पर सहमत हो गए हैं। हमें उम्मीद है कि दूसरे राज्य भी इसका पालन करेंगे। शीर्ष अदालत ने सेवानिवृत्ति के करीब पहुंचे या हाल ही में रिटायर हुए न्यायिक अधिकारियों की अलग-अलग याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई से इन्कार कर दिया।

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