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अब बांग्लादेश को जरूरी सामानों के निर्यात के लिए रेलमार्ग का इस्तेमाल
Tue, 12 May 2020 10:09 PM IST
मुकेश कुमार झा
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, ढाका
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, ढाका
Published by: मुकेश कुमार झा
Updated Tue, 12 May 2020 10:09 PM IST
सार
- पश्चिम बंगाल ने नहीं खोली सड़क सीमा, तो केंद्र ने अपनाया नया रास्ता
- बांग्लादेश के लिए 2 हजार टन प्याज़ की पहली खेप रेल मार्ग से रवाना
- दोनों देशों के बीच व्यापार शुरु करने की कोशिशों में जुटा गृह मंत्रालय
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नरेंद्र मोदी-शेख हसीना
- फोटो : ANI
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विस्तार
केंद्र के लगातार निर्देश के बावजूद पश्चिम बंगाल सरकार ने भारत-बांग्लादेश की सड़क सीमा खोलने से इनकार कर दिया है, ऐसी स्थिति में दोनों देशों के बीच व्यापारिक आवाजाही शुरू करने के लिए केंद्र ने अब रेलमार्ग खोलने का फैसला किया है।
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अब भारत से बांग्लादेश निर्यात किए जाने वाले तमाम जरूरी सामान और खाद्य सामग्री रेल के रास्ते जाएंगे। इसकी शुरुआत 2000 टन प्याज के कन्साइनमेंट के साथ हो गई है और कहा जा रहा है कि प्याज की ये खेप जल्दी ही बांग्लादेश पहुंच जाएगी।
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रमज़ान और ईद को ध्यान में रखते हुए सरकार ने ये फैसला किया है। इस वक्त बांग्लादेश में प्याज़ से लेकर तमाम जरूरी सामानों की कीमतें आसमान छू रही हैं। ऐसे में प्याज या चावल जैसी जरूरी चीजों के पहुंचने से वहां कीमतें गिरने का अनुमान लगाया जा रहा है।
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महाराष्ट्र से भेजा गया प्याज़ का यह कन्साइनमेंट 56 घंटों में बांग्लादेश पहुंच जाएगा। इसके बाद इसकी दूसरी खेप रवाना की जाएगी। माना जा रहा है कि रेल के रास्ते जाने में प्याज या जरूरी खाद्य सामग्रियों के खराब होने का खतरा भी कम रहेगा और वो बेहतर स्थिति और क्वालिटी के साथ वहां के बाजारों में उपलब्ध हो सकेंगी।
पिछले महीने केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भारत बांग्लादेश की पेट्रापोल रोड सीमा खोलने और वहां लंबे समय से खड़े सामानों से लदे ट्रकों को जाने की इजाजत दे दी थी, लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार ने सीमा खोलने से यह कहकर मना कर दिया था कि इससे कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा और बढ़ जाएगा।
केंद्र के दोबारा मिले निर्देश को भी राज्य सरकार ने नहीं माना तब केंद्र ने रेलमार्ग से सामान भेजने का विकल्प खोल दिया। अब केन्द्र को ये रास्ता ज्यादा बेहतर लग रहा है और माना ये जा रहा है कि भारत से बांग्लादेश निर्यात किए जाने वाले सामानों के लिए आने वाले वक्त में भी रेल मार्ग ज्यादा बेहतर विकल्प होगा और इसमें राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं रह जाएगी।