{"_id":"5beb3df0bdec226988377063","slug":"now-chikungunya-treatment-can-be-done-from-tamarind","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब इमली से हो सकेगा चिकनगुनिया का इलाज","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
अब इमली से हो सकेगा चिकनगुनिया का इलाज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 14 Nov 2018 02:41 AM IST
विज्ञापन
इमली
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अब इमली से जानलेवा बीमारी चिकनगुनिया का इलाज संभव हो सकेगा। आईआईटी रुड़की के दो प्रोफेसरों ने दावा किया है कि उन्होंने इमली के बीजों में एक प्रोटीन लैक्टिन का पता लगाया है। इसमें विषाणु रोधी गुण हैं। इसका इस्तेमाल चिकनगुनिया के उपचार की दवाई बनाने में किया जा सकता है।
आईआईटी रुड़की के शोधकर्ताओं के इस दल ने इमली के विषाणुरोधी प्रोटीन लेक्टिन वाले एंटीवायरल कम्पोजीशन के पेटेंट के लिए आवेदन किया है। अब वे इससे चिकनगुनिया के उपचार के लिए औषधि तैयार कर रहे हैं।
एक प्रोफेसर शैली तोमर ने बताया, ‘अध्ययन में पाया गया कि इमली के बीज से निकले लैक्टिन ग्लाइकेन्स को ऐसे शुगर मॉलिक्यूल्स के साथ मिल जाता है, जिसमें एन एसिटिलग्लूकोसामीन (एनएजी) होता है। इससे मूल कोशिकाओं में जीवाणु घुस नहीं पाता। शोधकर्ताओं का कहना है कि चिकनगुनिया के उपचार में यह काफी कारगर साबित हो सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
आईआईटी रुड़की के शोधकर्ताओं के इस दल ने इमली के विषाणुरोधी प्रोटीन लेक्टिन वाले एंटीवायरल कम्पोजीशन के पेटेंट के लिए आवेदन किया है। अब वे इससे चिकनगुनिया के उपचार के लिए औषधि तैयार कर रहे हैं।
विज्ञापन
एक प्रोफेसर शैली तोमर ने बताया, ‘अध्ययन में पाया गया कि इमली के बीज से निकले लैक्टिन ग्लाइकेन्स को ऐसे शुगर मॉलिक्यूल्स के साथ मिल जाता है, जिसमें एन एसिटिलग्लूकोसामीन (एनएजी) होता है। इससे मूल कोशिकाओं में जीवाणु घुस नहीं पाता। शोधकर्ताओं का कहना है कि चिकनगुनिया के उपचार में यह काफी कारगर साबित हो सकता है।
विज्ञापन