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वीजा धोखाधड़ी: कोर्ट ने नवाब मलिक के बेटे-बहू को दी अग्रिम जमानत, कहा- फर्जी दस्तावेज बनाने का कोई सबूत नहीं

Wed, 25 Jan 2023 08:07 PM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: गुलाम अहमद Updated Wed, 25 Jan 2023 08:07 PM IST
सार

फराज मलिक और उनकी पत्नी को अग्रिम जमानत देते हुए मुंबई की एक अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह साबित करने के लिए कुछ भी नहीं है कि दंपती ने धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज बनाने का अपराध किया था। अदालत ने कहा कि मुंबई पुलिस ने दंपती को पकड़ने के लिए समय से पहले ही निष्कर्ष निकाल लिया था।

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nothing to show Nawab Malik son daughter-in-law committed offence of creating bogus documents for visa Court
नवाब मलिक - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

मुंबई की एक अदालत ने महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री नवाब मलिक के बेटे फराज मलिक और उनकी फ्रांसीसी पत्नी लौरा हेमेलिन उर्फ आयशा को वीजा धोखाधड़ी मामले में बुधवार को अग्रिम जमानत दे दी। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह साबित करने के लिए कुछ भी नहीं है कि फराज और आयशा ने धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज बनाने का अपराध किया था। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मुंबई पुलिस ने जोड़े को पकड़ने के लिए समय से पहले ही निष्कर्ष निकाल लिया था। अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी के दूरगामी परिणाम होते हैं, जिसका असर सिर्फ आरोपी ही नहीं बल्कि उनके परिवार के सदस्य भी जीवन भर महसूस करते हैं।

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मुंबई के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एमजी देशपांडे ने वीजा विस्तार के लिए जाली दस्तावेजों को कथित रूप से प्रस्तुत करने के मामले में गिरफ्तारी से पहले 23 जनवरी को फराज मलिक और उनकी पत्नी आयशा को जमानत दे दी। दंपती ने अपनी याचिका में एजेंट विजय कुमार राय के हाथों धोखाधड़ी का शिकार होने का दावा किया है, जिसके जरिए उन्होंने विवाह प्रमाणपत्र प्राप्त बनवाया था। दावा किया गया है कि राय ने फराज मलिक और उनकी पत्नी (फ्रांसीसी नागरिक) के अलावा 18 अन्य लोगों के साथ भी धोखाधड़ी की है।
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एजेंट ने फर्जी स्टांप का इस्तेमाल किया
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि एजेंट विजय कुमार राय को लोगों को विभिन्न प्रमाणपत्र जारी करने के लिए अधिकारियों के फर्जी स्टांप का इस्तेमाल करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और फिलहाल वह जमानत पर बाहर है। न्यायाधीश ने कहा कि जो भी विवाह प्रमाण पत्र आवेदकों (फराज मलिक और उनकी पत्नी आयशा) को प्राप्त हुआ था, वह विजय कुमार राय द्वारा प्राप्त किया गया था। इसलिए प्रथम दृष्टया ऐसा कुछ भी नहीं दर्शाता है कि आवेदक धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज बनाने के अपराध में शामिल थे।
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जांच अधिकारी ने पहले ही गिरफ्तार करने की राय बना ली...
अग्रिम जमानत के लिए दंपती की याचिका का विरोध करने के लिए पुलिस के तर्क का जिक्र करते हुए न्यायाधीश ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह इंगित करता है कि जांच अधिकारी (IO) ने पहले ही दोनों आवेदकों को गिरफ्तार करने और फिर अदालत से उनकी हिरासत मांगने का इरादा बना लिया है। अदालत ने कहा कि पुलिस के पास यह बताने के लिए कुछ नहीं है कि जांच अधिकारी दोनों आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए कैसे और क्यों इस नतीजे पर पहुंचे।

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