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जज लोया केस में कुछ भी गुप्त नहीं रहना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

Wed, 17 Jan 2018 03:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Updated Wed, 17 Jan 2018 03:58 AM IST
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  Nothing should remain secret in the judge's Loya case: Supreme Court
Judge Loya - फोटो : Live Law.in
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि सीबीआई के विशेष जज बीएस लोया की मौत किन परिस्थितियों में हुई, यह सभी लोगों को जानना चाहिए। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने कहा, यह ऐसा मामला है जिसमें कुछ भी गुप्त नहीं रहना चाहिए। हालांकि शीर्ष अदालत ने यह फैसला महाराष्ट्र सरकार पर छोड़ दिया कि वह जस्टिस लोया की मौत से जुड़ा कौन सा दस्तावेज याचिकाकर्ता को देना चाहती है।
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सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड आदेश के अनुसार, दस्तावेज सात दिन के अंदर पेश करने होंगे। अगर इन्हें उचित माना जाता है तो इसकी प्रतियां याचिकाकर्ता को उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही इन्हें उचित बेंच के समक्ष पेश किया जाएगा। राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले का ट्रायल करने वाले जज लोया की वर्ष 2014 में मौत हो गई थी।
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शीर्ष अदालत में एक याचिका दायर कर इस मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है। मंगलवार को महाराष्ट्र सरकार ने सीलबंद लिफाफे में जस्टिस लोया की मेडिकल रिपोर्ट कोर्ट में सौंपी। साथ ही याचिकाकर्ता की उस मांग पर भी एतराज जताया कि पूरी सामग्री उन्हें देखने के लिए मिलनी चाहिए।
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आखिर रिपोर्ट में क्या गोपनीय हो सकता है

  Nothing should remain secret in the judge's Loya case: Supreme Court
supreme court
इसके बाद महाराष्ट्र के वकील ने कहा, वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे समेत हमारी वकीलों की टीम संबंधित विभागों की मदद से इन दस्तावेज को स्कैन और सत्यापित करेगी। इसके बाद इन्हें सौंपने के बारे में फैसला लिया जाएगा। इससे पहले, पीठ ने महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे से रिपोर्ट की प्रति याचिकाकर्ताओं को देने के लिए कहा।

इस पर साल्वे ने कहा कि याचिकाकर्ताओं द्वारा यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि रिपोर्ट सार्वजनिक न हो। जवाब में पीठ ने कहा, ‘आखिर रिपोर्ट में क्या गोपनीय हो सकता है। अच्छा तो यह रहेगा कि याचिकाकर्ताओं को सब कुछ पता हो। सब लोगों को सभी चीजें मालूम होनी चाहिए।’

पीठ ने साल्वे से कहा,वह रिपोर्ट को पढ़े और उन बातों को चिह्नित करें जिन्हें सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए। इसके बाद रिपोर्ट की प्रति सात दिनों के भीतर याचिकाकर्ताओं को मुहैया कराई जाए। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकीलों ने पीठ को आश्वस्त किया कि रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जाएगी। शीर्ष अदालत तहसीन पूनावाला और पत्रकार बीआर लोने की जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। याचिकाओं में जज लोया की मौत की निष्पक्ष जांच कराने की गुहार लगाई गई है। 
 
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