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Maharashtra: उद्धव-राज ठाकरे की मुलाकात पर सियासत तेज, संजय राउत बोले- इसमें कुछ राजनीतिक नहीं
Mon, 23 Dec 2024 07:13 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: श्वेता महतो
Updated Mon, 23 Dec 2024 07:13 PM IST
सार
संजय राउत ने कहा कि उद्धव और राज ठाकरे परिवार के सदस्य हैं। राकांपा प्रमुख अजित पवार भी अपने चाचा शरद पवार से मिलते हैं। राकांपा-एसपी नेता रोहित पवार भी अजित पवार से मिलते हैं।
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संजय राउत
- फोटो : एएनआई
विस्तार
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और उनके चचेरे भाई और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के प्रमुख राज ठाकरे एक शादी समारोह में एक साथ दिखे। वे मुंबई में अपने भांजे की शादी में पहुंचे थे। राज ठाकरे की बड़ी बहन जयवंती देशपांडे के बेटे यश देशपांडे की शादी में उद्धव ठाकरे के साथ उनके परिवार के सदस्य भी मौजूद थे। राजनीतिक रूप से अलग थलग पड़े दोनों भाइयों को साथ देखकर महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चा तेज हो गई है। इसे देखते हुए शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने उद्धव और राज ठाकरे के बीच राजनीतिक पुनर्मिलन का सुझाव देना जल्दबाजी है।
संजय राउत ने पत्रकारों से कहा, "महाराष्ट्र का ठाकरे परिवार से गहरा लगाव है। अगर उद्धव और राज एकसाथ आते हैं तो महाराष्ट्र खुशहाल हो जाएगा। राज ठाकरे एक अलग पार्टी के प्रमुख हैं। उनके आदर्श प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और देवेंद्र फडणवीस हैं। हमारे लिए वे महाराष्ट्र के दुश्मन हैं।"
राजनीतिक पुनर्मिलन की अटकलों को किया खारिज
दोनों चचेरे भाइयों के बीच राजनीतिक पुनर्मिलन की अटकलों को खारिज करते हुए संजय राउत ने कहा कि उद्धव और राज ठाकरे परिवार के सदस्य हैं। उन्होंने आगे कहा, "राकांपा प्रमुख अजित पवार भी अपने चाचा शरद पवार से मिलते हैं। राकांपा-एसपी नेता रोहित पवार भी अजित पवार से मिलते हैं। पंकजा मुंडे और उनके चचेरे भाई धनंजय मुंडे अलग अलग पार्टी के सदस्य हैं। पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे के बेटे भी अलग-अलग पार्टी से हैं।"
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संजय राउत ने कहा, "पारिवारिक आयोजनों में उद्धव और राज ठाकरे की मुलाकातों को राजनीतिक तौर से देखना जल्दबाजी होगी।" दादर में आयोजित समारोह में राज और उद्धव ठाकरे अपने परिवार के साथ शामिल हुए थे। उद्धव ठाकरे के बड़े भाई जयदेव ठाकरे की पूर्व पत्नी स्मिता ठाकरे भी इस समारोह में नजर आईं।
विधानसभा चुनाव में दोनों भाइयों का खराब प्रदर्शन
बता दें कि 2006 में शिवसेना से अलग होने के बाद राज ठाकरे ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) की स्थापना की। इसके बाद से ही दोनों भाइयों के बीच मतभेद बढ़ते गए। इस साल राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे की पार्टियों ने बहुत ही खराब प्रदर्शन किया। जहां शिवसेना (यूबीटी) महज 20 सीटों पर सिमट कर रह गई तो वहीं एमएनएस को एक भी सीट नहीं मिली।
संबंधित वीडियो
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संजय राउत ने पत्रकारों से कहा, "महाराष्ट्र का ठाकरे परिवार से गहरा लगाव है। अगर उद्धव और राज एकसाथ आते हैं तो महाराष्ट्र खुशहाल हो जाएगा। राज ठाकरे एक अलग पार्टी के प्रमुख हैं। उनके आदर्श प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और देवेंद्र फडणवीस हैं। हमारे लिए वे महाराष्ट्र के दुश्मन हैं।"
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राजनीतिक पुनर्मिलन की अटकलों को किया खारिज
दोनों चचेरे भाइयों के बीच राजनीतिक पुनर्मिलन की अटकलों को खारिज करते हुए संजय राउत ने कहा कि उद्धव और राज ठाकरे परिवार के सदस्य हैं। उन्होंने आगे कहा, "राकांपा प्रमुख अजित पवार भी अपने चाचा शरद पवार से मिलते हैं। राकांपा-एसपी नेता रोहित पवार भी अजित पवार से मिलते हैं। पंकजा मुंडे और उनके चचेरे भाई धनंजय मुंडे अलग अलग पार्टी के सदस्य हैं। पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे के बेटे भी अलग-अलग पार्टी से हैं।"
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संजय राउत ने कहा, "पारिवारिक आयोजनों में उद्धव और राज ठाकरे की मुलाकातों को राजनीतिक तौर से देखना जल्दबाजी होगी।" दादर में आयोजित समारोह में राज और उद्धव ठाकरे अपने परिवार के साथ शामिल हुए थे। उद्धव ठाकरे के बड़े भाई जयदेव ठाकरे की पूर्व पत्नी स्मिता ठाकरे भी इस समारोह में नजर आईं।
विधानसभा चुनाव में दोनों भाइयों का खराब प्रदर्शन
बता दें कि 2006 में शिवसेना से अलग होने के बाद राज ठाकरे ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) की स्थापना की। इसके बाद से ही दोनों भाइयों के बीच मतभेद बढ़ते गए। इस साल राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे की पार्टियों ने बहुत ही खराब प्रदर्शन किया। जहां शिवसेना (यूबीटी) महज 20 सीटों पर सिमट कर रह गई तो वहीं एमएनएस को एक भी सीट नहीं मिली।
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