आर्ट ऑफ लिविंग के पास 200 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति
दिल्ली में यमुना नदी के किनारे वर्ल्ड कल्चरल फेस्टिवल कराने वाले गैर सरकारी संस्थान आर्ट ऑफ लिविंग(एओएल) के पास भले ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की तरफ से लगाया गया पांच करोड़ का जुर्माना देने के लिए पैसा नहीं है। पर आर्ट ऑफ लिविंग के पास दुनिया भर में 200 करोड़ की संपत्ति और 80 करोड़ का राजस्व है। यह दावा द कारवां ने किया है।
11 से 13 मार्च, 2016 के बीच दिल्ली में यमुना नदी के किनारे आर्ट ऑफ लिविंग ने एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया था। इस कार्यक्रम के जरिए एकता और शांति की शक्ति कितनी है, उसका प्रदर्शन किया गया था। आंकड़ो पर गौर करें तो पाएंगे कि इस कार्यक्रम में करीब 35 लाख लोगों ने हिस्सा ने लिया था।
इस कार्यक्रम के आयोजन को लेकर तभी सवाल उठने लगे थे कि इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ काटे गए थे। साथ ही मैदान को समतल करने के लिए कई लोगों के खेतों को भी समतल कर दिया गया था। इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए 1200 फुट लंबा एक स्टेज बनाया गया था। इस स्टेज की चौड़ाई 200 फुट और ऊंचाई 40 फुट थी।
'नगद रुपए की जगह 4.75 करोड़ रुपए की बैक गारंटी को स्वीकार करे'
कार्यक्रम होने से पहले ही एनजीटी की एक टीम ने इस जगह का निरीक्षण किया था। कमेटी ने अपने निरीक्षण में पाया कि इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए यमुना किनारे के इलाके को पूरी तरह से समतल कर दिया गया था। इससे वहां पर होने वाले नुकसान को देखते हुए एनजीटी ने एओएल पर पांच करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया था।
एनजीटी ने एओएल को आदेश देते हुए कहा था कि कार्यक्रम के आयोजन से पहले ही जुर्माना जमा कराया जाए। बाद में एओएल के अधीन एक ट्रस्ट व्यक्ति विकास केंद्र इंडिया की 69 वर्षीय महिला तृप्ति धवन ने एनजीटी में अंडरटेकिंग देते हुए कहा था कि अभी हम जुर्मान के 25 लाख रुपए जमा कर रहे हैं। बाकी के 4.75 करोड़ रुपए तीन सप्ताह में जमा कर देंगे। बीते 1 अप्रैल को यह समय सीमा खत्म हो गई। तब एओएल ने एनजीटी से कहा कि ट्रस्ट आपसे निवेदन करता है कि नगद रुपए की जगह 4.75 करोड़ रुपए की बैक गारंटी को स्वीकार करे।
उस समय एनजीटी की बेंच ने यह सवाल उठाया था कि आप नगद पैसा क्यों नही जमा कर रहे हैं। एओएल ने एनजीटी में बयान देते हुए कहा था कि हमारे पास इतना पैसा नहीं है और हम अपने फॉलोअर्स की तरफ से दिए जाने वाले चंदे पर ही निर्भर हैं। पर एओएल की तरफ से दी गई यह दलील सच से बहुत दूर मालूम पड़ती है।
विदेशों में भी एओएल की ट्रस्ट तेजी के साथ काम कर रहा
कारवां ने जब अपनी छानबीन की तो एक दूसरा ही सच सामने आया। विदेशों में भी एओएल की ट्रस्ट तेजी के साथ काम कर रहा है। अमेरिका, ब्रिटेन, नीदरलैंड और जर्मनी में भी इसकी कई शाखाएं काम कर रही हैं। कारवां ने जब स्विटजरलैंड की कर्मिशयल रजिस्ट्रर से फाउंडेशन और कंपनी के खातों के बारे में जानकारी मांगी तो उन्होंने जानकारी देने से साफ मना कर दिया।
कारवां को अपनी पड़ताल में यह पता चला कि एओएल के संस्थापक आध्यतमिक संस्थापक रवि के पास करीब 234 करोड़ रुपए की सपंत्ति है और सिर्फ उनको अमेरिका, ब्रिटेन और नीदरलैंड से ही 81 करोड़ रुपए को राजस्व प्राप्त होता है। एओएल की वेबसाइट पर जाने पर पता चलता है कि फाउंडेशन की दुनिया भर में 155 शाखाएं चलती हैं। है। वहीं अफ्रीका, मध्य एशिया, दक्षिण पूर्वी एशिया, आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड से फाउंडेशन के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। वहां पर टेक्निकल, लॉजिस्टिक और बैंकिंग इश्यू बता कर जानकारी देने से मना कर दिया गया।
सोर्स-द कारवां
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