Karnataka: 'जातिगत सर्वेक्षण के विरोध में नहीं हूं, बल्कि..'; खरगे की आपत्ति के बाद डीके शिवकुमार की सफाई
Karnataka: जातिगत सर्वेक्षण को लेकर कांग्रेस के कर्नाटक प्रमुख डीके शिवकुमार ने कहा कि वह इसके खिलाफ नहीं हैं, बल्कि चाहते हैं कि यह वैज्ञानिक और व्यस्थित तरीके से हो।
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जाति जनगणना पर कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के रुख पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आपत्ति जताई थी। लेकिन, अब शिवकुमार ने अपनी सफाई दी है। उन्होंने कहा कि वह इसके विरोध में नहीं हैं, लेकिन चाहते हैं कि यह वैज्ञानिक और व्यस्थित तरीके से हो।
राज्यसभा में भाजपा सांसद सुशील कुमार मोदी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए खरगे ने सोमवार को कहा था कि कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री शिवकुमार ने खुद एक याचिका पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें उन्होंने सरकार से जाति जनगणना को रद्द करने का आग्रह किया है।
राज्य के दो प्रभावशाली समुदायों वोक्कालिगा और लिंगायत ने जाति सर्वेक्षण पर आपत्ति जताई है और इसे अवैज्ञानिक बताया है। उन्होंने मांग की है कि इसे खारिज कर दिया जाए और नया सर्वेक्षण कराया जाए।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय से हैं। उन्होंने कुछ अन्य मंत्रियों के साथ समुदाय द्वारा मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को सौंपे गए एक ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें आंकड़ों के साथ रिपोर्ट को अस्वीकार करने का आग्रह किया गया था।
अखिल भारतीय वीरशैव महासभा (लिंगायतों की शीर्ष संस्था) ने भी सर्वेक्षण को अवैज्ञानिक बताते हुए इस पर अपनी अस्वीकृति व्यक्त की है और नए सिरे से सर्वेक्षण कराने की मांग की है। इस संस्था के प्रमुख कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक शामनुरु शिवशंकरप्पा हैं।
उन्होंने कहा, मैंने कहीं भी इसका विरोध नहीं किया है। यह हमारी पार्टी की नीति है और हमारी सरकार ने कर्नाटक में यह (जाति जनगणना) की। हमारे बहुत सारे विधायक और मंत्रियों ने हमसे बात की। हम उचित जनगणना चाहते हैं, क्योंकि जनगणना बहुत व्यस्थित तरीके से की जानी चाहिए।
उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा कि 2015 में सिद्धरमैया के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान हुई जातिगत जनगणना के दौरान उनके अपने घर को कवर नहीं किया गया था। उन्होंने कहा, किसी ने आकर मुझसे नहीं पूछा। मैंने कई विधायकों के साथ भी जांच की।