मिशनरी से केवल 280 बच्चे नहीं हैं गायब, मानव तस्करी का बुरी तरह शिकार है भारत
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रांची के ईस्ट जेल रोड की मिशनरी 'निर्मल हृदय' से बच्चों की बिक्री का मामला अब देशव्यापी मानव तस्करी का पर्दाफाश कर रहा है। झारखंड ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश, केरल, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में बच्चों को बेचने की बात सामने आ रही है।
पहले इन आंकड़ों पर गौर कर लीजिए
देश के विभिन्न हिस्सों में बच्चों के चोरी हो जाने का जो डर है उसे पूरी तरह बेबुनियाद नहीं कहा जा सकता। खासतौर पर गृह मंत्रालय की ओर से जारी वर्ष 2016 के आंकड़ों को देखते हुए जिनके मुताबिक उस वर्ष भारत से करीब 55,000 बच्चों को अगवा किया गया है। यह आंकड़ा एक वर्ष पहले के आंकड़ों के मुकाबले 30 फीसदी अधिक है। गृह मंत्रालय की 2017-18 की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2016 में 54,723 बच्चे अगवा हुए लेकिन केवल 40.4 फीसदी मामलों में ही आरोप पत्र दाखिल किए गए।
वर्ष 2016 में बच्चों के अपहरण के मामलों में दोष साबित होने की दर महज 22.7 फीसदी रही। वर्ष 2015 में ऐसे 41,893 मामले दर्ज किए गए जबकि वर्ष 2014 में यह संख्या 37,854 थी। वर्ष 2017 के आंकड़े अभी पेश नहीं किए गए हैं। मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, ‘हाल में हुए पीट-पीटकर हत्या के ज्यादातर मामलों के पीछे सोशल मीडिया पर बच्चा उठाने की अफवाहें थी। आंकड़े बताते हैं कि बच्चों के अपहरण का डर, खासकर ग्रामीण इलाकों में, पूरी तरह से बेबुनियाद नहीं है।
'निर्मल हृदय' का काला सच
बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी), जिला समाज कल्याण अधिकारी (डीएसडब्ल्यूओ), पुलिस और अन्य अधिकारियों की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि निर्मल हृदय में रहीं पीड़िताओं से जन्मे और शिशु भवन में रखे गए 280 बच्चों का कोई अता-पता नहीं है। अब तक की जांच के दौरान जब्त किए गए कागजात के अनुसार 2015 से 2018 तक उक्त दोनों जगहों (निर्मल हृदय, शिशु भवन) में 450 गर्भवती पीड़िताओं को भर्ती कराया गया। इनसे जन्मे 170 बच्चों को सीडब्ल्यूसी के समक्ष प्रस्तुत किया गया या जानकारी दी गई। शेष 280 बच्चों का कोई अता-पता नहीं है।
क्या है पूरा मामला?
इसकी गहन जांच की जा रही है कि ये बच्चे कहां हैं। यह खेल लंबे समय से चल रहा है। इस काले धंधे से जुड़े लोगों की पहुंच इतनी है कि बच्चों की खरीद-बिक्री के खेल पर हाथ डालने वाले सीडब्ल्यूसी के तत्कालीन अध्यक्ष ओमप्रकाश सिंह और सदस्य मु. अफजल को इन्होंने बर्खास्त करा दिया था। इन दोनों अधिकारियों पर छेड़छाड़ का आरोप मढ़कर सुनियोजित साजिश रचकर हटवा दिया गया था। मामला 2015 का है। अध्यक्ष और सदस्य डोरंडा स्थित शिशु भवन का निरीक्षण करने गए थे। इस दौरान उन्हें वहां घुसने से रोका गया था। जबरन जांच की बात कह घुसे तो छेड़छाड़ का आरोप लगाकर बर्खास्त करा दिया गया।
मिशनरीज ऑफ चैरिटी की ओर से संचालित ‘निर्मल हृदय’ आश्रम से नाबालिग अविवाहित मां के दो माह के बच्चे को बेच दिया गया था। आश्रम की स्टाफ और सिस्टर की मिलीभगत से इस घटना को अंजाम दिया गया। मामले में रांची बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) ने कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई। इसे लेकर निर्मल हृदय में काम करने वाली स्टाफ अनिमा इंदवार और सिस्टर कांसिलिया को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।
हाल ही गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से उन घटनाओं का पता लगाने को कहा था जिनमें सोशल मीडिया पर बच्चा उठाने की अफवाहों के बाद भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या की घटना को अंजाम दिया। बीते दो महीने में बच्चा चोरी के संदेह में 20 से ज्यादा लोगों की पीट-पीटकर हत्या की जा चुकी है। हाल की घटना एक जुलाई को महाराष्ट्र के धुले में हुई जिसमें बच्चा चोर होने के शक में पांच लोगों की हत्या कर दी गई।
मानव तस्करी के 8000 मामले
गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार साल 2016 में देश में मानव तस्करी के 8132 मामले दर्ज किए गए। बच्चों के खिलाफ अपराध के 1.06 लाख मामले भी दर्ज किए गए। ये साल 2015 की तुलना में 13.6 फीसदी अधिक थे।