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हिसाब-किताब नहीं देने पर NGO के खिलाफ दर्ज होगा मामला

Wed, 11 Jan 2017 05:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 11 Jan 2017 05:30 AM IST
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not enough to put NGO in black list, government should take action: Supreme Court

वार्षिक लेखा-जोखा न देने वाले गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) को सिर्फ काली सूची में डालने को अपर्याप्त बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को ऐसे एनजीओ केखिलाफ दीवानी और आपराधिक कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया है। साथ ही शीर्ष अदालत ने सरकार को देशभर केकरीब 32 लाख गैर सरकारी संगठनों(एनजीओ) के खातों की ऑडिट करने का निर्देश दिया है। सरकार को अदालत में ऑडिट रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है।

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चीफ जस्टिस जेएस खेहड़ की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा पब्लिक फंड की अनियमितता में शामिल होने और वार्षिक लेखा-जोखा न देने वाले एनजीओ को सिर्फ काली सूची में डालना पर्याप्त नहीं है। पीठ ने सरकार को ऐसे एनजीओ के खिलाफ फंड की अनियमितता और रकम की वसूली की कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
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पीठ ने कहा कि एनजीओ को मिलने वाला फंड वास्तव में आम लोगों का पैसा होता है, लिहाजा इसके दुरूपयोग की इजाजत कतई नहीं दी जा सकती। पीठ ने कहा कि एनजीओ को अपना वार्षिक लेखा-जोखा देना जरूरी है।

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एनजीओ को जवाबदेह बनाना जरूरी

not enough to put NGO in black list, government should take action: Supreme Court

पीठ ने सरकार से तीन महीने केभीतर स्वयंसेवी और गैर सरकारी सरकारी संगठनों के मान्यता देने संबंधी दिशानिर्देश बनाने के लिए कहा है। पीठ ने कहा कि एनजीओ को जवाबदेह बनाना जरूरी है। पीठ ने सरकार से कहा कि आपको एनजीओ को रेगुलेट करना चाहिए।

अगर सीएजी का कहना है कि एनजीओ को लेकर कोई रेगुलेशन नहीं है तो आपको रेगुलेट करने का तंत्र विकसित करने की जरूरत है।Óसुनवाई केदौरान अमाइकस क्यूरी राकेश द्विवेदी ने पीठ के समक्ष कहा कि रिपोर्ट के मुताबिक, हर वर्ष एनजीओं के लिए करीब 950 करोड़ रुपये का फंड जारी किया जाता है। इस पर पीठ ने कहा कि हम इस प्रवाह को हमेशा जारी रखने की इजाजत नहीं दे सकते। सरकार को एनजीओ का लेखा-जोखा रखना ही चाहिए। पीठ ने कहा कि

एनजीओ को मिलने वाला फंड आम लोगों का पैसा है न कि सरकार का। अदालत वकील एमएल शर्मा द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। मंगलवार को सुनवाई केदौरान स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पीठ ने कपार्ट के निदेशक को लंच के बाद पेश होने के लिए कहा था।

निदेशक ने बताया कि स्वयंसेवी संगठनों पर नियंत्रण केलिए जनरल फाइनेंसियल रूल्स, 2005 प्रभावी है। पीठ ने सरकार को सभी एनजीओ का ऑडिट करने के लिए कहा है और 31 मार्च तक रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा है। साथ ही पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार यह सुनिश्चित करें कि उसकी ओर से संयुक्त सचिव के नीचे केअधिकारी हलफनामा दायर नहीं करेंगे। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट में दायर रिपोर्ट में कहा गया है कि देशभर में  3209044 संगठन सोसायटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत पंजीकृत हैं लेकिन महज 307072 संगठन ही अपना वार्षिक लेखा-जोखा पेश करते हैं।

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