कर्नाटक: PM मोदी के करिश्मे के भरोसे नहीं बल्कि इस रणनीति से लड़ेगी भाजपा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अगले महीने होने वाले कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करिश्मे के भरोसे नहीं रहेगी। चुनाव जीतने के लिए उसने माइक्रो लेवल की रणनीति बनाई है। अब तक भाजपा पन्ना प्रमुख के सहारे चुनाव लड़ती थी। पन्ना प्रमुख यानी मतदाता सूची के एक पृष्ठ पर अंकित मतदाताओं का मतदान पार्टी के पक्ष में कराने का प्रभारी। वे हर मतदाता से संपर्क में रहते हैं और मतदान के दिन घर से पोलिंग बूथ तक लाकर मतदान सुनिश्चित कराते हैं।
दो पन्नों पर लगभग 100 मतदाताओं के नाम होते हैं। एक व्यक्ति के लिए इतने लोगों को संभालना कठिन हो रहा था। इसलिए कर्नाटक के मुश्किल चुनाव में नैया पार लगाने के लिए पार्टी ने हर पन्ने पर दो प्रभारी नियुक्त किए हैं। इन्हें अर्धपन्ना प्रमुख कहा जा रहा है। यानी हर पेज का अलग प्रभारी। इन अर्धपन्ना प्रमुखों के ऊपर पन्ना प्रमुख होगा। उसके ऊपर बूथ प्रमुख। उसके ऊपर एरिया प्रमुख और फिर चुनाव क्षेत्र प्रभारी।
कर्नाटक में जुटे देश भर के नेता
पार्टी ने देश भर से अपने नेताओं को कर्नाटक में चुनाव प्रबंधन में लगा दिया है। एरिया प्रमुख की जिम्मेदारी एक विधायक के पास होगी और हर चुनाव क्षेत्र का इंचार्ज एक सांसद होगा। यानी 223 विधानसभा क्षेत्रों के लिए 223 सांसदों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। हर जिले का प्रभारी एक केंद्रीय मंत्री होगा।
चुनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी राष्ट्रीय महासचिव मुरलीधर राव के पास है, जबकि मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर भी चुनाव प्रभारी हैं। इनके अलावा बंगलूरू स्थित मुख्यालय पर प्रचार और मीडिया का काम देखने के लिए अलग से लोग भेजे जा रहे हैं। प्रचार प्रभारी का काम दिल्ली और दूसरे प्रदेशों के स्टार प्रचारकों की सभाएं, रोड शो सुचारु रूप से आयोजित करना है।
अमित शाह ने इजाद की थी रणनीति
मीडिया प्रभारी भी केंद्र से
मीडिया प्रभारी पर समाचार पत्रों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में जाने वाली सामग्री तय करने की जिम्मेदारी है। विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों का तुरंत और सटीक जवाब देना भी उनका ही काम होगा, ताकि राष्ट्रीय और प्रादेशिक मीडिया में पार्टी का पक्ष प्रभावी रूप से रखा जा सके।
यूपी में ईजाद हुई रणनीति
दरअसल, पन्ना प्रमुखों की रणनीति पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान ईजाद की थी। तब वे उत्तर प्रदेश के प्रभारी महासचिव थे। इसी वजह से वहां भाजपा सहयोगी दल के साथ 80 में से 73 सीटें जीतने में सफल रही थी। इसी के सहारे उन्होंने 2017 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 403 में से 325 सींटें जीतीं। त्रिपुरा में भी पार्टी की अप्रत्याशित जीत की वजह भी यही रणनीति रही।
पहली बार अर्धपन्ना प्रमुख
प्रधानमंत्री और पार्टी अध्यक्ष के गृहराज्य गुजरात में बहुत कम अंतर से हुई जीत ने उन्हें अपनी रणनीति पर विचार कर उसे और धार देने की प्रेरणा दी। यही वजह है कि कर्नाटक में पार्टी पहली बार अर्धपन्ना प्रमुखों का इस्तेमाल कर रही है।