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पूर्वोत्तर में बीमारियों का कहर: असम में अफ्रीकन स्वाइन फीवर से हड़कंप, मिजोरम में इस बीमारी से बढ़ी चिंता

Mon, 17 Nov 2025 12:13 AM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी/आईजोल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी/आईजोल Published by: हिमांशु चंदेल Updated Mon, 17 Nov 2025 12:13 AM IST
सार

पूर्वोत्तर भारत में असम और मिजोरम दोनों गंभीर स्वास्थ्य संकट से जूझ रहे हैं। असम में अफ्रीकन स्वाइन फीवर तेजी से फैल रहा है, जिसके चलते सरकार ने जीवित सूअरों की अंतर-जिला आवाजाही और सात जिलों में पोर्क बिक्री पर रोक लगा दी है। वहीं, मिजोरम के लॉन्गतलाई जिले में गैस्ट्रोएंटेराइटिस से अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है और 84 लोग संक्रमित हैं।

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Northeast Diseases  African swine fever Assam Gastroenteritis outbreak toll rises to 6 in Mizoram Lawngtlai
नॉर्थ ईस्ट में बीमारियों का कहर। (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पूर्वोत्तर भारत इस समय दो गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों से जूझ रहा है। असम में अफ्रीकन स्वाइन फीवर (एएसएफ) की तेजी से बढ़ती घटनाओं ने सूअर पालन उद्योग को भारी नुकसान पहुंचाया है, जबकि मिजोरम के लॉन्गतलाई जिले में गैस्ट्रोएंटेराइटिस के फैलाव ने जनस्वास्थ्य को लेकर अफसरों की चिंता बढ़ा दी है। दोनों राज्यों में हालात नियंत्रित करने के लिए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी सतर्कता के साथ काम कर रहे हैं।

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असम सरकार ने रविवार को राज्यभर में जीवित सूअरों के अंतर-जिला परिवहन पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया। पशुपालन व पशु चिकित्सा विभाग ने आदेश जारी करते हुए बताया कि एएसएफ के मामले पूरे राज्य में चिंताजनक रूप से बढ़ रहे हैं और यह बीमारी अब लगभग सभी जिलों में फैल चुकी है। आदेश में कहा गया है कि जनवरी से अब तक 297 संक्रमित केंद्र मिले हैं और सिर्फ अक्टूबर में 84 नए केंद्रों की पहचान की गई है। स्थिति को देखते हुए सात जिलों धीमाजी, कामरूप, लखीमपुर, शिवसागर, दरांग, जोरहाट और डिब्रूगढ़ में सूअर मांस की बिक्री भी रोक दी गई है।
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100% मृत्युदर वाली बीमारी ने उद्योग को झकझोरा
असम सरकार के अनुसार एएसएफ पूरी तरह घातक बीमारी है, जिसकी मृत्युदर 100% मानी जाती है। आदेश में कहा गया कि एएसएफ ने राज्य के सूअर पालन उद्योग को “तहस-नहस” कर दिया है और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। महामारी फैलने से हजारों पालतू सूअरों की मौत हो चुकी है और किसानों के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। संक्रमण फैलने के चलते वैज्ञानिक टीमों और पशु चिकित्सकों को हाई-अलर्ट पर रखा गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध आगे आदेश जारी होने तक जारी रहेगा।
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मिजोरम में गैस्ट्रोएंटेराइटिस से बिगड़े हालात
उधर, मिजोरम के लॉन्गतलाई जिले में गैस्ट्रोएंटेराइटिस के मामलों में खतरनाक वृद्धि ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। जिले के काखिच्हुआ गांव में 4 नवंबर को पहला मामला सामने आया था और तब से अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है। गांव में लगभग 130 परिवार रहते हैं और यहां के लोग म्यांमार सीमा से सटे होने के कारण लगातार आवाजाही में रहते हैं। अधिकारियों का मानना है कि बीमारी संभवतः म्यांमार से आए लोगों के जरिए फैली। फिलहाल 84 लोग संक्रमित हैं और गांव में मेडिकल टीमों की तैनाती के बाद लगातार निगरानी चल रही है।


स्वास्थ्य टीम की सख्त निगरानी
लॉन्गतलाई जिला अस्पताल के चिकित्सा अधिकारी डॉ. मालसावतलुआंगा ने बताया कि कई मरीज ऐसे परिवारों से जुड़े हैं जहां साफ पानी की व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने कहा कि लोगों को उबला पानी पीने, भोजन और घर की सफाई बनाए रखने तथा पेट दर्द और दस्त जैसे लक्षण दिखते ही स्वास्थ्यकर्मियों से संपर्क करने की सलाह दी गई है। इसके अलावा दक्षिण मिजोरम के सियाहा जिले में भी इसी बीमारी से अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है। मेडिकल टीमें गांव में लगातार उपचार और जागरूकता अभियान चला रही हैं।

मिजोरम प्रशासन अलर्ट मोड पर
लॉन्गतलाई के उपायुक्त डॉनी लालरुआतसांगा ने रविवार को प्रभावित गांव का दौरा कर स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने बताया कि गांव को कंटेनमेंट ज़ोन घोषित कर दिया गया है और दो महीने तक म्यांमार सीमा के पार आवाजाही प्रतिबंधित की गई है। आवश्यक दवाओं और स्वास्थ्य सुविधाओं को लगातार गांव तक पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों को सतर्क रहने और स्वच्छता के कड़े मानकों का पालन करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि बीमारी को रोकने के लिए अगले कुछ हफ्ते बेहद महत्वपूर्ण होंगे।



 

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