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गैर-बासमती चावल: निर्यात पर रोक से देश में कितने घटे दाम, US-कनाडा में किराने की दुकानों में मारामारी क्यों?

Mon, 24 Jul 2023 08:03 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Mon, 24 Jul 2023 08:03 PM IST
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सार
Non-Basmati Rice Export Ban: भारत ने गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया। इस फैसले से देश में तो चावल की कीमत में गिरावट शुरू हो गई है, लेकिन दुनियाभर में चावल के दाम बढ़ने लगे हैं। इसका असर अमेरिका और कनाडा में रहने वाले एनआरआई के बीच देखा जा रहा है।
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Non-Basmati Rice Export Ban Impact and why the NRIs in US-Canada are bringing dozens of bags to home
गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात पर रोक - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

भारत ने गुरुवार को गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया था। केंद्र ने यह कदम घरेलू बाजार में कीमतें थामने के लिए उठाया है। हालांकि, इस फैसले से दुनियाभर के देशों में चावल की कीमतें बढ़ने का खतरा उत्पन्न हो गया। अब अमेरिका और कनाडा में रहने वाले भारतवंशियों ने चावल की बोरियां इकट्ठी करनी शुरू कर दी हैं और यहां चावल को खरीदने के लिए लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं। 


भारत दुनियाभर में चावल का सबसे बड़ा निर्यातक देश है। लिहाजा इसके किसी भी फैसले से अनाज की कीमतों में भारी असर पड़ने की आशंका रहती है। इस सबके बीच जानना जरूरी है कि आखिर भारत ने गैर-बासमती चावल को लेकर क्या फैसला लिया है? सरकार ने यह पाबंदी क्यों लगाई? भारत किन देशों में यह चावल निर्यात करता है? इसका कोई असर हो रहा है? भारत के बाहर इसका क्या प्रभाव पड़ रहा है? 

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
भारत ने गैर-बासमती चावल को लेकर क्या फैसला लिया?
गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात को लेकर विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने एक अधिसूचना जारी की। इसके मुताबिक, गैर-बासमती सफेद चावल की निर्यात नीति को मुक्त से प्रतिबंधित कर दिया गया है। हालांकि, कुछ शर्तों के साथ निर्यात की अनुमति होगी। अधिसूचना से पहले जहाजों में जिस चावल की लोडिंग शुरू हो गई थी, तो उसके निर्यात की मंजूरी दी गई। साथ ही उन मामलों में भी निर्यात हो सकेगा, जहां सरकार ने दूसरे देशों को इसकी इजाजत दे रखी है। सरकार ने कुछ देशों की खाद्य सुरक्षा की जरूरतों को देखते हुए उपरोक्त मंजूरी दी है। पिछले साल सितंबर में सरकार ने टूटे हुए चावल के निर्यात पर रोक लगा दी थी। साथ ही कई तरह के चावल के निर्यात पर 20 फीसदी ड्यूटी लगाई गई थी।

करनाल में बारिश के दौरान धान के खेत में भरा पानी।
करनाल में बारिश के दौरान धान के खेत में भरा पानी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सरकार ने यह पाबंदी क्यों लगाई? 
मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार विधानसभा चुनावों और उसके बाद अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले देश में अधिक महंगाई के जोखिम से बचना चाहती है। इसके अलावा खराब मौसम की वजह से प्रमुख उत्पादक राज्यों में चावल की बुवाई पर असर पड़ा है। इसलिए गैर-बासमती चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया है। आने वाले त्योहारी सीजन में चावल की कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। 

14 जुलाई तक के आंकड़ों के मुताबिक, खरीफ की बुवाई दो फीसदी कम हुई है। पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम बारिश की वजह से फसल की कम बुवाई हुई है। सरकार के फैसले से 80 फीसदी चावल का निर्यात प्रभावित हो सकता है। इससे देश में तो चावल की कीमत में गिरावट आएगी, लेकिन दुनियाभर में चावल की कीमतें बढ़ सकती है। 

चावल (फाइल फोटो)
चावल (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
भारत किन देशों में यह चावल निर्यात करता है?
भारत दुनिया में चावल का सबसे बड़ा निर्यातक है। वहीं देश से निर्यात होने वाले कुल चावल में गैर-बासमती सफेद चावल की हिस्सेदारी लगभग 25 फीसदी है। जानकारी के मुताबिक, भारत से गैर-बासमती सफेद चावल का कुल निर्यात वित्त वर्ष 2022-23 में 42 लाख डॉलर के करीब था। इससे पिछले साल में निर्यात 26.2 लाख डॉलर बताया गया था। भारत प्रमुख रूप से थाईलैंड, इटली, स्पेन, श्रीलंका और अमेरिका को गैर-बासमती चावल निर्यात करता है।

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कुल करीब 15.54 लाख टन सफेद चावल का निर्यात हुआ था। एक साल पहले समान अवधि में 11.55 लाख टन की तुलना में इसमें 35% की तेजी आई है। घरेलू बाजार में चावल की खुदरा कीमतें एक साल में 11.5% व एक माह में 3% तक बढ़ गई हैं। 2022-23 में इस चावल के निर्यात का मूल्य 42 लाख डॉलर था। उसके पहले के साल में 26.2 लाख डॉलर था।

छत्तीसगढ़ में चावल की किस्में
छत्तीसगढ़ में चावल की किस्में - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसका कोई असर हो रहा है? 
गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात पर प्रतिबंध से देश में उपभोक्ताओं के लिए कीमतें कम होंगी। गैर-बासमती चावल (उसना चावल) और बासमती चावल की निर्यात नीति में कोई बदलाव नहीं करने को लेकर कहा गया कि इससे यह सुनिश्चित होगा कि किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में लाभकारी कीमतों का लाभ मिलता रहेगा। हालांकि, इस चावल की खेप को कुछ शर्तों के तहत निर्यात करने की अनुमति दी जाएगी।

सरकार के इस फैसले का कुछ हद तक असर भी देखने को मिल रहा है। उपभोक्ता मामलों के विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 20 जुलाई से 24 जुलाई के बीच कई शहरों में एक किलो चावल की कीमतों में एक से लेकर पांच रुपये तक की कमी आई है। सबसे ज्यादा कौशांबी, चामराजनगर और अरियालुर में पांच रुपये/किलो दाम कम हुए हैं। इसके बाद बीदर, यादगीर और हरिद्वार में लोग पहले से तीन रुपये सस्ता चावल खरीद रहे हैं। अररिया, मधेपुरा, धनबाद, रामपुर, सीवान, अमृतसर, गिरिडीह, भिंड, सीधी, शहडोल, चित्रकूट और बक्सर में ये कीमतें प्रति किलो दो रूपये घट गई हैं। 

चावल के लिए लगी एनआरआई लोगों की भीड़
चावल के लिए लगी एनआरआई लोगों की भीड़ - फोटो : SOCIAL MEDIA
भारत के बाहर क्या प्रभाव हो रहा है?
भारत के इस फैसले से देश में तो चावल की कीमत में गिरावट शुरू हो गई है, लेकिन दुनियाभर में चावल की कीमतें बढ़नी शुरू हो गई हैं। अल-नीनो प्रभाव के कारण खाद्य महंगाई से पहले से ही जूझ रहे दुनियाभर के देशों में चावल की कीमतें बढ़ने से खाद्य संकट का खतरा भी हो सकता है। वैश्विक चावल निर्यात में भारत की 40 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी है।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गैर-बासमती चावल के निर्यात पर पाबंदी लगाने के सरकार के फैसले भारत के करीब 80 फीसदी चावल निर्यात पर असर पड़ सकता है। चावल दुनिया की लगभग आधी आबादी का मुख्य भोजन है। एशिया में वैश्विक आपूर्ति का करीब 90 फीसदी चावल उपभोग के लिए इस्तेमाल होता है।

भारत के इस कदम के कारण वैश्विक बाजारों में अन्य एशियाई देशों से चावल की कीमतें बढ़ गईं। हालिया फैसले का असर अमेरिका और कनाडा में रहने वाले एनआरआई के बीच देखा जा रहा है। यहां किराने की दुकानों के बाहर लंबी कतारें लगने लगी हैं। भीड़ में लोग चावल के बैग लेने के लिए अलमारियों पर चढ़ रहे हैं। टेक्सास, मिशिगन और न्यू जर्सी जैसे प्रमुख अमेरिकी शहरों में इसकी बानगी देखी गई। हालात को संभालने के लिए कुछ दुकानों ने बिक्री सीमा लगा दी है, जिससे ग्राहकों को केवल एक चावल बैग खरीदने तक सीमित कर दिया गया है। वहीं चावल की जमाखोरी की चिंता भी बढ़ गई है।
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