फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   No third-party insurance cover, no fuel:  Supreme Court directs Centre to launch pilot project

Supreme Court: '56 फीसदी वाहनों का बीमा नहीं, करें चालान', सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दिए क्या निर्देश?

Tue, 04 Aug 2026 09:56 PM IST
राहुल कुमार पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Tue, 04 Aug 2026 09:56 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में मंगलवार को ‘थर्ड पार्टी’ बीमा कवर के बिना बड़ी संख्या में चल रहे वाहनों पर गंभीर चिंता जताई और केंद्र सरकार को एक प्रायोगिक परियोजना तैयार करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही ये अहम निर्देश भी दिए हैं। 

विज्ञापन
No third-party insurance cover, no fuel:  Supreme Court directs Centre to launch pilot project
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

देश की सड़कों पर बिना थर्ड पार्टी बीमा के बिना दौड़ रहे वाहनों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में बिना 'थर्ड पार्टी' बीमा के बड़ी संख्या में सड़कों पर चल रहे वाहनों पर गंभीर चिंता जताई। अदालत ने केंद्र सरकार को एक प्रायोगिक (पायलट) परियोजना तैयार करने का निर्देश दिया, जिसके तहत वैध बीमा नहीं होने पर पेट्रोल पंपों पर ऐसे वाहनों को ईंधन देने से इनकार किया जा सके।
विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क दुर्घटनाओं की संख्या और टोल प्लाजा पर लंबी कतारों के प्रभाव पर भी ध्यान दिया। अदालत ने केंद्र सरकार को कुछ चुनिंदा गलियारों में ऐसी पायलट परियोजनाएं लागू करने का निर्देश दिया, जिनके तहत टोल प्लाजा पर वाहनों को रोकने के बजाय टोल बिंदुओं से गुजरने वाले वाहनों की स्वचालित पहचान की व्यवस्था की जाए।
विज्ञापन


न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम के उन प्रावधानों का पर्याप्त पालन नहीं हो रहा है, जिनके तहत सभी वाहनों के लिए 'थर्ड पार्टी' जोखिम को कवर करने वाला वैध बीमा अनिवार्य है। पीठ ने कहा कि वित्त संबंधी स्थायी समिति की 2024-25 की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय सड़कों पर चल रहे लगभग 56 प्रतिशत वाहन बिना बीमा के हैं, जो अत्यंत चिंताजनक है।
विज्ञापन
विज्ञापन


'पेट्रोल पंप पर बीमा से जुड़ेगी ईंधन आपूर्ति'
पीठ ने कहा कि अदालत में हुई चर्चा के अनुसार भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के साथ विचार-विमर्श कर ऐसी पायलट परियोजना तैयार करे, जिसके तहत वाहनों को ईंधन दिए जाने को उनके वैध बीमा की स्थिति से जोड़ा जाए।अदालत ने कहा कि यदि किसी वाहन का वैध बीमा नहीं होगा तो उसे तब तक पेट्रोल पंप पर ईंधन नहीं दिया जाएगा, जब तक वह वैध बीमा नहीं करा लेता।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस व्यवस्था से दोहरे लाभ होंगे। इससे बिना बीमा या बिना पंजीकरण वाले वाहनों की पहचान करने में मदद मिलेगी और वाहन मालिकों को वैध बीमा कराने के लिए भी प्रेरित किया जा सकेगा।

पीठ ने कहा कि ऐसी परियोजनाएं मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के वैधानिक प्रावधानों का जमीनी स्तर पर अनुपालन सुनिश्चित करेंगी। इसके लिए एएनपीआर (स्वचालित नंबर प्लेट पहचान) कैमरों का उपयोग किया जा सकता है। अदालत ने यह भी कहा कि पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय को भी सिद्धांततः इस पर कोई आपत्ति नहीं है।

नए वाहनों के लिए बीमा अवधि बढ़ाने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 2018 में उसने नए चारपहिया वाहनों के लिए खरीद या पंजीकरण के समय तीन वर्ष तथा दोपहिया वाहनों के लिए पांच वर्ष की 'थर्ड पार्टी' बीमा पॉलिसी लेना अनिवार्य किया था।अदालत ने कहा कि उस निर्देश के आठ वर्ष बाद भी बड़ी संख्या में वाहन बिना बीमा के हैं। हालांकि इरडा और जनरल इंश्योरेंस काउंसिल ने इस अवधि को न बढ़ाने की सिफारिश की है, लेकिन अदालत का मत है कि सड़क सुरक्षा के हित में इस अवधि को एक वर्ष बढ़ाया जाना चाहिए। पीठ ने निर्देश दिया कि अब से नए चारपहिया वाहनों के लिए चार वर्ष तथा नए दोपहिया वाहनों के लिए छह वर्ष की 'थर्ड पार्टी' बीमा पॉलिसी खरीदना अनिवार्य होगा। इरडा को तत्काल आवश्यक निर्देश जारी करने के लिए कहा गया है।

16.54 करोड़ वाहन बिना बीमा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश में 30.48 करोड़ वाहनों में से 16.54 करोड़ वाहन बिना बीमा के हैं। इसका परिणाम यह होता है कि सड़क दुर्घटना पीड़ितों को मुआवजा देने का वैधानिक संरक्षण या तो विलंबित हो जाता है या कई मामलों में निष्प्रभावी हो जाता है। पीठ ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के तहत अनिवार्य बीमा का उद्देश्य केवल सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को मुआवजा दिलाना नहीं, बल्कि उन्हें लंबी कानूनी लड़ाई से भी बचाना है।

अदालत ने कहा कि बिना बीमा वाले वाहनों के कारण दुर्घटना पीड़ितों और उनके परिवारों को समय पर पर्याप्त मुआवजा नहीं मिल पाता। ऐसे मामलों में मुआवजे की राशि और दायित्व तय करने के लिए लंबी मुकदमेबाजी करनी पड़ती है। यदि दुर्घटना में किसी की मृत्यु हो जाती है या वह स्थायी रूप से दिव्यांग हो जाता है तो उसके परिवार पर आर्थिक बोझ और अधिक बढ़ जाता है।

टोल प्लाजा पर ANPR कैमरे और ई-चालान की व्यवस्था
सुप्रीम कोर्ट ने न्यायहित में इरडा और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को निर्देश दिया कि वे कुछ राज्यों में बीमा सूचना ब्यूरो और 'वाहन' पोर्टल के आंकड़ों से जुड़े एएनपीआर कैमरे लगाएं, ताकि बिना बीमा वाले वाहनों के लिए स्वत: ई-चालान जारी किए जा सकें।अदालत ने कहा कि फिलहाल राज्य पुलिस के पास मौके पर बीमा की स्थिति जांचने की कोई समान व्यवस्था नहीं है। इसलिए राज्य पुलिस को बीमा सूचना ब्यूरो और 'वाहन' पोर्टल से जुड़े हैंडहेल्ड उपकरण या डाउनलोड किए जा सकने वाले एप उपलब्ध कराए जाएं। पीठ ने कहा कि इससे वाहनों के बीमा की वास्तविक समय में निगरानी की जा सकेगी और उल्लंघन की स्थिति में चालान जारी कर अनिवार्य बीमा का जमीनी स्तर पर अनुपालन सुनिश्चित किया जा सकेगा। अदालत ने वैधानिक प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को भी कहा।


बीमा पॉलिसी के अधिक विकल्प उपलब्ध कराने के भी निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने इरडा को यह भी निर्देश दिया कि वह निजी वाहन मालिकों के लिए मोटर वाहन अधिनियम के तहत निर्धारित न्यूनतम कवरेज वाली मूल पॉलिसी के साथ-साथ ऐड-ऑन, व्यक्तिगत दुर्घटना कवर और स्वयं के वाहन की क्षति कवर जैसी विभिन्न पॉलिसी विकल्प भी उपलब्ध कराए। मोटर दुर्घटना दावा मामलों में कई निर्देश जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत में सड़क सुरक्षा की यह दुर्भाग्यपूर्ण सच्चाई है कि 'थर्ड पार्टी' मोटर बीमा को अनिवार्य बनाने वाला वैधानिक ढांचा होने के बावजूद उसका पर्याप्त अनुपालन नहीं हो रहा है। अदालत ने कहा कि इसके परिणामस्वरूप सड़क दुर्घटनाओं से प्रभावित लोगों या उनके परिजनों को मुआवजा पाने के लिए दर-दर भटकना पड़ता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed