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Bengal: हाईकोर्ट ने 'द डायरी ऑफ वेस्ट बंगाल' की रिलीज पर पारित नहीं किया अंतरिम आदेश, तीन हफ्ते बाद सुनवाई
Thu, 29 Aug 2024 06:42 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: श्वेता महतो
Updated Thu, 29 Aug 2024 06:42 PM IST
सार
याचिकाकर्ता जय साहा ने दावा किया कि सनोज मिश्र द्वारा निर्देशित फिल्म का उद्देश्य दो समुदाय के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देना है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) में फिल्म को रद्द करने की मांग कर सकता है।
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कलकत्ता हाई कोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
कलकत्ता हाई कोर्ट ने एक हिंदी फिल्म की रिलीज पर कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया। अदालत ने कहा कि लोकतांत्रिक देश में किसी भी स्वस्थ आलोचना को नहीं रोकना चाहिए। द डायरी ऑफ वेस्ट बंगाल की रिलीज पर रोक लगाने के लिए याचिका दायर की गई थी। इस याचिका में दावा किया गया था कि फिल्म के जरिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की छवि को खराब करने की कोशिश की गई है। यह फिल्म 30 अगस्त को रिलीज होने वाली है।
मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणनम की अध्यक्षता वाली पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि वह याचिका पर विचार करने को लेकर इच्छुक नहीं थे, लेकिन एक वरिष्ठ वकील ने याचिका दायर की थी, इसलिए मामला लंबित है। इस मामले को तीन हफ्ते बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। टीएस शिवगणनम ने कहा, "हम एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में है और बायोपिक के माध्यम से यहां किसी भी स्वस्थ आलोचना को नहीं रोकना चाहिए। जस्टिस हिरण्मय भट्टाचार्य ने पश्चिम बंगाल को एक सहिष्णु समाज बताया।
याचिकाकर्ता जय साहा ने दावा किया कि सनोज मिश्र द्वारा निर्देशित फिल्म का उद्देश्य दो समुदाय के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देना है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) में फिल्म को रद्द करने की मांग कर सकता है। सीबीएफसी का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने बताया कि उन्होंने फिल्म की रिलीज के लिए प्रमाणपत्र दे दिया है।
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मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणनम की अध्यक्षता वाली पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि वह याचिका पर विचार करने को लेकर इच्छुक नहीं थे, लेकिन एक वरिष्ठ वकील ने याचिका दायर की थी, इसलिए मामला लंबित है। इस मामले को तीन हफ्ते बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। टीएस शिवगणनम ने कहा, "हम एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में है और बायोपिक के माध्यम से यहां किसी भी स्वस्थ आलोचना को नहीं रोकना चाहिए। जस्टिस हिरण्मय भट्टाचार्य ने पश्चिम बंगाल को एक सहिष्णु समाज बताया।
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याचिकाकर्ता जय साहा ने दावा किया कि सनोज मिश्र द्वारा निर्देशित फिल्म का उद्देश्य दो समुदाय के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देना है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) में फिल्म को रद्द करने की मांग कर सकता है। सीबीएफसी का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने बताया कि उन्होंने फिल्म की रिलीज के लिए प्रमाणपत्र दे दिया है।
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