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पश्चिम बंगाल में अब दंगाइयों की खैर नहीं: संपत्ति जब्त कर वसूला जाएगा नुकसान, सुवेंदु सरकार ला रही सख्त कानून

Sun, 21 Jun 2026 02:01 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता Published by: प्रशांत तिवारी Updated Sun, 21 Jun 2026 02:01 PM IST
सार

पश्चिम बंगाल सरकार सार्वजनिक अव्यवस्था, तोड़-फोड़, पुलिस और सरकारी कर्मचारियों पर हमलों को रोकने के लिए दो नए विधेयक लाने की तैयारी में है। इनमें एक 1972 के सार्वजनिक व्यवस्था कानून में संशोधन और दूसरा नया ‘पब्लिक सेफ्टी कंट्रोल एंड एंटी-सोशल एक्टिविटी बिल’ शामिल है। प्रस्तावित कानूनों में दोषियों से संपत्ति के नुकसान की भरपाई वसूलने और प्रशासन को अतिरिक्त अधिकार देने जैसे प्रावधान शामिल हो सकते हैं।

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No respite for rioters in West Bengal damages recovered through property Suvendu Adhikari will introduces law
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी - फोटो : ANI

विस्तार

पश्चिम बंगाल में अब पुलिस थानों पर हमला, सरकारी दफ्तरों में तोड़फोड़ और हिंसक भीड़ के उपद्रव पर लगाम कसने की तैयारी शुरू हो गई है। सुवेंदु सरकार विधानसभा में दो ऐसे अहम बिल पेश करने जा रही है, जिनका मकसद सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ कानून हाथ में लेने वालों पर कड़ा शिकंजा कसना है। राज्य सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, गृह विभाग सोमवार को इन प्रस्तावित कानूनों को कैबिनेट की मंजूरी के लिए पेश कर सकता है। इसके बाद इन्हें विधानसभा के बजट सत्र में रखा जाएगा।

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54 साल पुराने कानून को मिलेगा नया रूप
सरकार का पहला कदम 1972 के 'पश्चिम बंगाल सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के कानून' में बड़ा संशोधन करना है। यह कानून अब तक दंगे, आगजनी, लूटपाट, विस्फोटक पदार्थों के इस्तेमाल और सार्वजनिक शांति भंग करने वाली घटनाओं से निपटने का आधार रहा है। लेकिन सरकार का मानना है कि बदलते हालात में यह कानून पर्याप्त नहीं है। इसलिए इसके दायरे को बढ़ाकर प्रशासन और पुलिस को अतिरिक्त अधिकार दिए जा सकते हैं, ताकि हिंसक घटनाओं पर तेजी से कार्रवाई की जा सके।
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नया कानून: असामाजिक तत्वों पर सीधा वार
सरकार का दूसरा और शायद सबसे चर्चित प्रस्ताव है- 'पब्लिक सेफ्टी कंट्रोल एंड एंटी-सोशल एक्टिविटी बिल' अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा कानून जहां कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित है, वहीं नया बिल सार्वजनिक सुरक्षा को केंद्र में रखेगा। इसका निशाना वे असामाजिक तत्व होंगे जो हिंसा, तोड़फोड़ और सरकारी संस्थानों पर हमलों में शामिल रहते हैं। हाल के वर्षों में राज्य में कई ऐसी घटनाएं सामने आईं, जब उग्र भीड़ ने पुलिस स्टेशनों और सरकारी कार्यालयों को निशाना बनाया। कुछ मौकों पर अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को अपनी जान बचाने के लिए छिपना तक पड़ा।
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फाल्टा कांड बना टर्निंग पॉइंट
इन नए कानूनों की चर्चा फाल्टा में हुई हालिया हिंसक घटना के बाद तेज हुई। वहां गिरफ्तार टीएमसी नेता जहांगीर खान को छुड़ाने के लिए उनकी पत्नी के नेतृत्व में कुछ लोगों ने पुलिस स्टेशन पर धावा बोलने की कोशिश की थी। इस घटना के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने संकेत दिए थे कि सरकार ऐसे मामलों से निपटने के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचा तैयार कर रही है।

'कानून हाथ में लेने से पहले पांच बार सोचेंगे'
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से लंबित पड़े इन प्रस्तावों को अब अमलीजामा पहनाया जा रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी के शब्दों में, 'जब ऐसे सख्त कानून लागू होंगे तो लोग कानून अपने हाथ में लेने से पहले पांच बार सोचेंगे।'

नुकसान किया तो संपत्ति भी जा सकती है
प्रस्तावित बिल का सबसे सख्त पहलू यह हो सकता है कि हिंसा और तोड़फोड़ से हुए नुकसान की भरपाई दोषियों से कराई जाए। सूत्रों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का दोषी पाया जाता है, तो उसकी संपत्ति बेचकर भी मुआवजा वसूला जा सकता है। यानी सरकारी बसें जलाने, कार्यालय तोड़ने या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की कीमत सीधे जेब से चुकानी पड़ सकती है।


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यूपी, महाराष्ट्र और गुजरात मॉडल से प्रेरणा
दिलचस्प बात यह है कि बंगाल सरकार ने इन कानूनों का मसौदा तैयार करते समय उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात के कुछ कानूनी प्रावधानों का भी अध्ययन किया है। उत्तर प्रदेश में ऐसे कानून संगठित अपराध और जमीन माफिया पर केंद्रित हैं, महाराष्ट्र का ढांचा चरमपंथी और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों पर नजर रखता है, जबकि गुजरात ने संगठित अपराध और आतंकी नेटवर्क से निपटने के लिए कड़े प्रावधान बनाए हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि बंगाल सरकार इन मॉडलों से क्या सीख लेकर अपना नया कानूनी ढांचा तैयार करती है और विधानसभा में पेश होने वाले अंतिम बिल में कौन-कौन से सख्त प्रावधान शामिल किए जाते हैं।

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