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मौसम: ला नीना के बावजूद नहीं मिली राहत, रिकॉर्ड गर्म रहा जनवरी; वैज्ञानिकों का अनुमान औसत से अधिक रहा तापमान
Wed, 05 Feb 2025 07:32 AM IST
शुभम कुमार
अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: शुभम कुमार
Updated Wed, 05 Feb 2025 07:32 AM IST
सार
यह पहली बार है जब अल नीनो के प्रभाव के खत्म होने के बाद भी जनवरी का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। बर्कले अर्थ के जलवायु वैज्ञानिक जेक हॉसफादर के मुताबिक जनवरी 2025 अप्रत्याशित रूप से अब तक का सबसे गर्म जनवरी रहेगा।
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गर्मी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
ला नीना के प्रभाव के चलते वैज्ञानिकों को 2025 का तापमान सामान्य से कम रहने की उम्मीद थी, लेकिन जनवरी के तापमान ने इस धारणा को गलत साबित किया। ईआरए5 डेटा के विश्लेषण के अनुसार जनवरी 2025 अब तक का सबसे गर्म जनवरी साबित हुआ। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस महीने का औसत तापमान औद्योगिक युग (1850-1900) के मुकाबले 1.75 डिग्री सेल्सियस के अधिक रहा।
यह पहली बार है जब अल नीनो के प्रभाव के खत्म होने के बाद भी जनवरी का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। बर्कले अर्थ के जलवायु वैज्ञानिक जेक हॉसफादर के मुताबिक जनवरी 2025 अप्रत्याशित रूप से अब तक का सबसे गर्म जनवरी रहेगा, जिसने 2024 के पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है।
इसके पहले सबसे गर्म जनवरी 2024, 2020 और 2016 में दर्ज किए गए थे। इनमें से 2024 और 2016 के दौरान अल नीनो सक्रिय था, जबकि 2020 में प्रशांत महासागर का तापमान अल नीनो की ओर संकेत कर रहा था। ईआरए5, जो कि कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस का डेटा सेट है, वैश्विक वायुमंडलीय स्थिति, समुद्री लहरों और भूमि सतह के विभिन्न तत्वों का रिकॉर्ड रखता है। इसे यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम रेंज वेदर फोरकास्टिंग (ईसीएमडब्ल्यूएफ) द्वारा साझा किया जाता है। यह डेटा 1940 से अब तक के जलवायु परिवर्तनों को दर्शाता है।
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वैश्विक तापमान सामान्य से अधिक
जनवरी के दौरान न केवल उत्तरी गोलार्ध बल्कि दक्षिणी गोलार्ध में भी तापमान सामान्य से अधिक रहा। जलवायु इतिहासकार एम. हेरेरा के अनुसार 31 जनवरी 2025 को जमैका और मेडागास्कर जैसे क्षेत्रों में भी तापमान के रिकॉर्ड टूट गए। आमतौर पर ला नीना के दौरान तापमान में गिरावट देखने को मिलती है लेकिन इस बार इसके विपरीत हुआ है।
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यह पहली बार है जब अल नीनो के प्रभाव के खत्म होने के बाद भी जनवरी का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। बर्कले अर्थ के जलवायु वैज्ञानिक जेक हॉसफादर के मुताबिक जनवरी 2025 अप्रत्याशित रूप से अब तक का सबसे गर्म जनवरी रहेगा, जिसने 2024 के पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है।
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इसके पहले सबसे गर्म जनवरी 2024, 2020 और 2016 में दर्ज किए गए थे। इनमें से 2024 और 2016 के दौरान अल नीनो सक्रिय था, जबकि 2020 में प्रशांत महासागर का तापमान अल नीनो की ओर संकेत कर रहा था। ईआरए5, जो कि कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस का डेटा सेट है, वैश्विक वायुमंडलीय स्थिति, समुद्री लहरों और भूमि सतह के विभिन्न तत्वों का रिकॉर्ड रखता है। इसे यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम रेंज वेदर फोरकास्टिंग (ईसीएमडब्ल्यूएफ) द्वारा साझा किया जाता है। यह डेटा 1940 से अब तक के जलवायु परिवर्तनों को दर्शाता है।
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वैश्विक तापमान सामान्य से अधिक
जनवरी के दौरान न केवल उत्तरी गोलार्ध बल्कि दक्षिणी गोलार्ध में भी तापमान सामान्य से अधिक रहा। जलवायु इतिहासकार एम. हेरेरा के अनुसार 31 जनवरी 2025 को जमैका और मेडागास्कर जैसे क्षेत्रों में भी तापमान के रिकॉर्ड टूट गए। आमतौर पर ला नीना के दौरान तापमान में गिरावट देखने को मिलती है लेकिन इस बार इसके विपरीत हुआ है।