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Maharashtra: महाराष्ट्र में एक साल से नहीं बना LoP; मतदाता सूची पर उद्धव ने सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग

Sat, 06 Dec 2025 06:52 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: शिवम गर्ग Updated Sat, 06 Dec 2025 06:52 PM IST
सार

उद्धव ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र विधानसभा में एक साल से एलओपी नियुक्त नहीं किया गया। इसके अलावा उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मतदाता सूची में गड़बड़ी को लेकर तुरंत हस्तक्षेप की मांग की।

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No LoP in Maharashtra Even After a Year; Uddhav Thackeray Urges SC to Intervene in Voters’ List Mess
उद्धव ठाकरे, प्रमुख, शिवसेना (यूबीटी) - फोटो : ANI

विस्तार

शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शनिवार को राज्य सरकार पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति हुए एक साल से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन सरकार अब तक यह संवैधानिक जिम्मेदारी पूरी नहीं कर पाई है। ठाकरे ने कहा कि आगामी शीतकालीन सत्र में दोनों सदनों के लिए नेता प्रतिपक्ष की घोषणा होना जरूरी है।

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उद्धव ठाकरे ने पत्रकारों से बातचीत में कहा सरकार इतनी बहुमत में होने के बावजूद एलओपी से क्यों डर रही है? यह पद संवैधानिक है और इसे खाली छोड़ना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार LoP नियुक्त नहीं करती, तो यह पहली बार होगा कि विधानसभा सत्र बिना नेता प्रतिपक्ष के आयोजित होगा।
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ठाकरे ने तंज कसते हुए यह भी कहा कि अगर एलओपी गैर-संवैधानिक माना जा रहा है, तो उपमुख्यमंत्री का पद भी खत्म कर देना चाहिए, क्योंकि वह भी संविधान में कहीं उल्लेखित नहीं है। वर्तमान में राज्य में दो उपमुख्यमंत्री (एकनाथ शिंदे और अजित पवार) कार्यभार संभाल रहे हैं।
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विपक्ष की ओर से LoP के नाम भी तय
विधानसभा में सबसे ज्यादा विधायक होने के कारण शिवसेना (यूबीटी) ने वरिष्ठ नेता भास्कर जाधव को एलओपी पद के लिए नामित किया है। वहीं विधान परिषद में कांग्रेस ने सतेज पाटिल को अपना उम्मीदवार बनाया है, क्योंकि अगस्त में शिवसेना (यूबीटी) के अंबादास दानवे का कार्यकाल समाप्त हो गया था।

मतदाता सूची में ‘गड़बड़ी’ पर सुप्रीम कोर्ट को सख्त कदम उठाने की मांग
उद्धव ठाकरे ने राज्य की मतदाता सूची को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मसौदा मतदाता सूची में व्यापक स्तर पर त्रुटियां और गड़बड़ियां हैं, जो चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने कहा सुप्रीम कोर्ट को इस पूरे ‘मेस’ पर स्वतः संज्ञान लेना चाहिए और तब तक स्थानीय निकाय चुनाव नहीं होने चाहिए, जब तक मतदाता सूची ठीक नहीं हो जाती। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही निर्देश दिया है कि सभी स्थानीय निकाय चुनाव 31 जनवरी तक कराए जाएं।


महा-यूति सरकार की आंतरिक खींचतान पर कटाक्ष
ठाकरे ने स्थानीय निकाय चुनावों के पहले चरण में महायुति सरकार के भीतर चली तकरार पर भी निशाना साधा। उन्होंने इसे “सत्ता के लालच की राजनीति” बताया और कहा कि इससे जनता का विश्वास प्रभावित हो रहा है। उन्होंने अंत में कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में जनता की उम्मीदें केवल शिवसेना (यूबीटी) से जुड़ी हैं।

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