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SC: सुप्रीम कोर्ट में तत्काल नहीं होगी वरिष्ठ वकीलों के मामलों पर सुनवाई, CJI गवई के आदेश पर कल से होगी शुरुआत

Sun, 10 Aug 2025 02:13 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Sun, 10 Aug 2025 02:13 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील दिन की कार्यवाही के आरंभ में मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष अपने मामलों का उल्लेख करते हैं, ताकि मामलों को बारी से पहले सूचीबद्ध किया जा सके और तात्कालिकता के आधार पर सुनवाई की जा सके। अब सीजेआई गवई के आदेश पर इस व्यवस्था को सोमवार से बंद कर दिया जाएगा। 

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no immediate hearing on the cases of senior lawyers in the Supreme Court, it will start on orders of CJI Gavai
सीजेआई जस्टिस बीआर गवई - फोटो : PTI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट में अब वरिष्ठ अधिवक्ताओं के मामलों पर तत्काल सुनवाई नहीं होगा। जूनियर अधिवक्ताओं को मौका देने के लिए मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई के निर्देश पर कल से नई शुरुआत की जा रही है। इसके तहत सोमवार से किसी भी वरिष्ठ अधिवक्ता को मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अदालत के समक्ष तत्काल सूचीबद्ध और सुनवाई के लिए मामलों का उल्लेख करने की अनुमति नहीं होगी।
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सर्वोच्च न्यायालय ने नोटिस में कहा कि नामित वरिष्ठ अधिवक्ताओं को सोमवार 11 अगस्त 2025 से भारत के मुख्य न्यायाधीश की अदालत के समक्ष किसी भी मामले का उल्लेख करने की अनुमति नहीं है। इससे पहले पूर्व सीजेआई जस्टिस संजीव खन्ना ने वकीलों ने मामलों की तत्काल सुनवाई और सूचीकरण के लिए मौखिक प्रस्तुतियां देने की परंपरा को बंद कर दिया था। उन्होंने वकीलों को ईमेल या लिखित पत्र भेजने को कहा था।
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अब मुख्य न्यायाधीश वकीलों द्वारा मामलों को तत्काल सूचीबद्ध करने और सुनवाई के लिए मौखिक उल्लेख करने की पहल दोबारा शुरू करने जा रहे हैं।  सीजेआई गवई ने छह अगस्त को कहा था कि इस बात की बहुत मांग है कि किसी भी मामले का उल्लेख वरिष्ठ वकीलों द्वारा नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने अदालत के कर्मचारियों से कहा था कि वे एक नोटिस जारी करें कि सोमवार से किसी भी वरिष्ठ वकील को उनकी अदालत में तत्काल सूचीबद्ध और सुनवाई के लिए मामलों का उल्लेख करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। कनिष्ठ वकीलों को ऐसा करने का अवसर दिया जाना चाहिए।
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मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि कम से कम मेरे न्यायालय में तो इसका पालन किया जाएगा। अन्य न्यायाधीशों को भी इस परंपरा को अपनाना होगा। अब तक वकील दिन की कार्यवाही के आरंभ में मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष अपने मामलों का उल्लेख करते हैं, ताकि मामलों को बारी से पहले सूचीबद्ध किया जा सके और तात्कालिकता के आधार पर सुनवाई की जा सके।

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