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SIR: मिजोरम में एसआईआर के दौरान 46000 मतदाता हटाए गए, मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने विदेशियों को लेकर क्या कहा?
Sat, 04 Jul 2026 05:02 PM IST
Pavan
पीटीआई, आइजोल
पीटीआई, आइजोल
Published by: Pavan
Updated Sat, 04 Jul 2026 05:02 PM IST
सार
मिजोरम में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण 20 मई से 28 जून तक चलाया गया। इस दौरान राज्य के सभी मतदाताओं का घर-घर जाकर सत्यापन किया गया। वहीं, राज्य की मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राज्य की मतदाता सूची में विदेशियों के नाम शामिल होने के आरोपों को खारिज कर दिया है।
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गरिमा गुप्ता, मुख्य निर्वाचन अधिकारी, मिजोरम
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
मिजोरम की मुख्य चुनाव अधिकारी गरिमा गुप्ता ने शनिवार को राज्य में वोटर वेरिफिकेशन की प्रक्रिया के बाद वोटर लिस्ट में विदेशी नागरिकों के शामिल होने के आरोपों को खारिज कर दिया और बताया कि वोटरों की संख्या में कोई असामान्य बढ़ोतरी नहीं हुई है। सीईओ ने बताया कि मिजोरम में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण 20 मई से 28 जून तक चलाया गया। इस दौरान राज्य के सभी मतदाताओं का घर-घर जाकर सत्यापन किया गया। राजनीतिक दलों के बूथ स्तरीय एजेंट (बीएलए) भी इस प्रक्रिया में शामिल रहे, ताकि केवल पात्र मतदाता ही सूची में बने रहें।
यह भी पढ़ें- Supreme Court: एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर के आरोपी पति को बचा सकता है कानून? सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला
46 हजार से अधिक नाम हटाए गए
गरिमा गुप्ता ने बताया कि इस अभियान के दौरान कुल 8,75,068 गणना फॉर्म वितरित किए गए। इनमें से 8,28,906 फॉर्म एकत्र कर उनका 100 प्रतिशत डिजिटलीकरण किया गया। इस उपलब्धि के साथ मिजोरम तीसरे चरण में एसआईआर कराने वाले 16 राज्यों में पहला राज्य बन गया, जहां एकत्र किए गए सभी फॉर्म पूरी तरह डिजिटल कर दिए गए। न्होंने बताया कि 46,163 फॉर्म (करीब 5.28 प्रतिशत) जमा नहीं हो सके, जिसके कारण इन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए।
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किन कारणों से हटाए गए नाम?
सीईओ के अनुसार हटाए गए मतदाताओं में;
छात्र संगठन ने लगाए थे आरोप
इससे पहले मिजोरम के प्रभावशाली छात्र संगठन मिजो जिरलाई पॉल (एमजेडपी) ने सीईओ से शिकायत की थी कि राज्य के दक्षिणी हिस्से के चकमा बहुल इलाकों में मतदाताओं की संख्या में 121 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। संगठन ने आशंका जताई थी कि विदेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल हो सकते हैं और चुनाव आयोग से ऐसे मामलों की सख्ती से जांच कर संदिग्ध विदेशियों के नाम हटाने की मांग की थी। लांकि, सीईओ ने कहा कि सभी शिकायतों की जांच के बाद ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया। प्रारूप मतदाता सूची में कहीं भी मतदाताओं की संख्या में असामान्य वृद्धि नहीं दिखी।
दावा और आपत्तियों के लिए एक महीने का समय
गरिमा गुप्ता ने बताया कि संशोधित प्रारूप मतदाता सूची 1 जुलाई 2026 को अर्हता तिथि मानकर तैयार की गई है। इस पर 4 जुलाई से 4 अगस्त तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी। इनके निपटारे की प्रक्रिया 2 सितंबर तक चलेगी और 6 सितंबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
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कहां सबसे ज्यादा मतदाता?
सीईओ के अनुसार राज्य में सबसे अधिक मतदाता आइजोल जिले में हैं, जहां मतदाताओं की संख्या 2.72 लाख से अधिक है। इसके बाद लुंगलेई जिले में 98,808 और लॉन्गतलाई जिले में 90,699 मतदाता दर्ज किए गए हैं।
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46 हजार से अधिक नाम हटाए गए
गरिमा गुप्ता ने बताया कि इस अभियान के दौरान कुल 8,75,068 गणना फॉर्म वितरित किए गए। इनमें से 8,28,906 फॉर्म एकत्र कर उनका 100 प्रतिशत डिजिटलीकरण किया गया। इस उपलब्धि के साथ मिजोरम तीसरे चरण में एसआईआर कराने वाले 16 राज्यों में पहला राज्य बन गया, जहां एकत्र किए गए सभी फॉर्म पूरी तरह डिजिटल कर दिए गए। न्होंने बताया कि 46,163 फॉर्म (करीब 5.28 प्रतिशत) जमा नहीं हो सके, जिसके कारण इन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए।
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किन कारणों से हटाए गए नाम?
सीईओ के अनुसार हटाए गए मतदाताओं में;
- 21,295 लोगों की मृत्यु हो चुकी थी।
- 13,978 लोग स्थायी रूप से दूसरे राज्यों या विदेश चले गए थे।
- 8,333 लोग कई बार संपर्क करने के बावजूद नहीं मिले।
- 2,248 लोगों के नाम पहले से किसी अन्य स्थान की मतदाता सूची में दर्ज थे।
- इसके अलावा 309 मतदाताओं ने धार्मिक कारणों का हवाला देते हुए एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में शामिल होने से इनकार कर दिया।
छात्र संगठन ने लगाए थे आरोप
इससे पहले मिजोरम के प्रभावशाली छात्र संगठन मिजो जिरलाई पॉल (एमजेडपी) ने सीईओ से शिकायत की थी कि राज्य के दक्षिणी हिस्से के चकमा बहुल इलाकों में मतदाताओं की संख्या में 121 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। संगठन ने आशंका जताई थी कि विदेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल हो सकते हैं और चुनाव आयोग से ऐसे मामलों की सख्ती से जांच कर संदिग्ध विदेशियों के नाम हटाने की मांग की थी। लांकि, सीईओ ने कहा कि सभी शिकायतों की जांच के बाद ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया। प्रारूप मतदाता सूची में कहीं भी मतदाताओं की संख्या में असामान्य वृद्धि नहीं दिखी।
दावा और आपत्तियों के लिए एक महीने का समय
गरिमा गुप्ता ने बताया कि संशोधित प्रारूप मतदाता सूची 1 जुलाई 2026 को अर्हता तिथि मानकर तैयार की गई है। इस पर 4 जुलाई से 4 अगस्त तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी। इनके निपटारे की प्रक्रिया 2 सितंबर तक चलेगी और 6 सितंबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
यह भी पढ़ें- The Second Orbit: शुभांशु की इस किताब में अंतरिक्ष के किस्से; ISRO की किस चुनौती को पांच दिन में पूरा किया?
कहां सबसे ज्यादा मतदाता?
सीईओ के अनुसार राज्य में सबसे अधिक मतदाता आइजोल जिले में हैं, जहां मतदाताओं की संख्या 2.72 लाख से अधिक है। इसके बाद लुंगलेई जिले में 98,808 और लॉन्गतलाई जिले में 90,699 मतदाता दर्ज किए गए हैं।