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मुजफ्फरपुर शेल्टर होम में बच्चों की हत्या का सबूत नहीं: सीबीआई
Thu, 09 Jan 2020 01:31 AM IST
आसिम खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आसिम खान
Updated Thu, 09 Jan 2020 01:31 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट
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मुजफ्फरपुर शेल्टर होम में बच्चों की हत्या का कोई सुबूत नहीं मिला है। सीबीआई ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि शेल्टर होम परिसर से जो दो कंकाल मिले थे, फोरेंसिक जांच से पता चला कि इनमें से एक पुरुष और एक महिला का कंकाल था।
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चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष सीबीआई की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि मुजफ्फरपुर शेल्टर होम सहित 17 शेल्टर होम में कथित तौर पर बच्चों के साथ दुष्कर्म व यौन उत्पीड़न की जांच पूरी हो चुकी है। इनमें से 13 मामलों में चार्जशीट दायर की जा चुकी है।
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चार मामलों में प्रारंभिक जांच के बाद कोई सुबूत नहीं मिलने पर इन्हें बंद कर दिया गया। शेल्टर होम की जिन 35 बच्चियों की हत्या की बात कही गई थी, वे सभी जीवित हैं। पीठ ने सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया। साथ ही पीठ ने इस मामले से जांच टीम से जुड़े अधिकारियों को टीम से अलग होने की इजाजत दे दी है।
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संबंधित एनजीओ का पंजीकरण निरस्त करने की सिफारिश
अटॉर्नी जनरल ने बताया कि सीबीआई ने बिहार सरकार से शेल्टर होम से संबंधित एनजीओ का पंजीकरण निरस्त करने व ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश की है। साथ ही 25 जिलाधिकारियों समेत करीब 70 अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने की सिफारिश भी की गई है।
टाटा इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट में हुआ था खुलासा
मालूम हो कि एक एनजीओ द्वारा चलाए जा रहे मुजफ्फरपुर के शेल्टर होम में कई बच्चियों के साथ दुष्कर्म व यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया था। यह मामला टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की एक रिपोर्ट के बाद सामने आया था।
इस रिपोर्ट के बाद निवेदिता झा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर एफआईआर दर्ज कराने की गुहार की थी और अदालत की निगरानी में किसी निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराने की गुहार की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को जांच करने का निर्देश दिया था।