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Doctors Working Hours: 'डॉक्टर अधिकतम 74 घंटे काम करें, हफ्ते में छुट्टी भी मिले'; टास्क फोर्स के कई अहम सुझाव
Thu, 15 Aug 2024 10:03 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Thu, 15 Aug 2024 10:03 PM IST
सार
डॉक्टरों के कामकाजी घंटों को लेकर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने कई अहम सुझाव दिए हैं। एनएमसी के टास्क फोर्स ने कहा है कि डॉक्टरों को हफ्ते में अनिवार्य छुट्टी भी मिलनी चाहिए।
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डॉक्टरों के कामकाज पर NMC के टास्क फोर्स ने दिए अहम सुझाव (प्रतीकात्मक सुझाव)
- फोटो : एएनआई
विस्तार
मेडिकल साइंस की फील्ड कितनी चुनौतीपूर्ण इसका अंदाजा मरीजों और डॉक्टरों के अनुपात से लगाया जा सकता। देशभर के चिकित्सकों पर काम के घंटों का दबाव अधिक है, इसे लेकर अक्सर चिंता जाहिर की जाती है। डॉक्टरों और मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र जो रेजिडेंट डॉक्टर के रूप में सेवाएं देते हैं, उनकी सेहत से जुड़ी रिपोर्ट देने के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद (NMC) की टास्क फोर्स ने एक रिपोर्ट में अपने सुझाव दिए हैं। इनमें कई अहम बातें कही गई हैं। सबसे अहम सुझाव एक हफ्ते में कामकाज के घंटे और हफ्ते में अनिवार्य साप्ताहिक छुट्टी का है।
मरीजों की जान बचाने से पहले अच्छी नींद जरूरी, हफ्ते की छुट्टी यूं ही निरस्त न करें
टास्क फोर्स ने साफ किया है कि काम का अधिक दबाव डॉक्टरों रे साथ-साथ मरीजों की सेहत को भी बुरी तरह प्रभावित करता है। इसने सिफारिश की है कि रेजिडेंट डॉक्टर सप्ताह में 74 घंटे से अधिक काम न करें और उन्हें हर सप्ताह एक दिन की छुट्टी मिले। मेडिकल छात्रों के लिए प्रतिदिन सात से आठ घंटे की नींद को अनिवार्य बताते हुए टास्क फोर्स ने कहा, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त नींद जरूरी है। इनकी छुट्टियों को अनुचित तरीके से अस्वीकृत नहीं किया जाना चाहिए।
हफ्ते में अधिकतम 74 घंटे काम और छुट्टी; रैगिंग रोकने के लिए बने इकाई
एनएमसी के टास्क फोर्स ने हफ्ते में कामकाज के अधिकतम 74 घंटे के अलावा वीक ऑफ यानी छुट्टी का प्रावधान अनिवार्य बनाने का सुझाव दिया है। रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि मेडिकल कॉलेजों में सक्रिय एंटी-रैगिंग सेल होने चाहिए। टास्क फोर्स ने रैगिंग जैसे कृत्यों में संलिप्त पाए जाने पर अपराधियों के लिए कठोर दंड का प्रावधान बनाने का सुझाव भी दिया है।
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वेतन में अंतर नहीं होना चाहिए
टास्क फोर्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा, देश के सभी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्न, पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों, सीनियर रेजीडेंट, सुपर-स्पेशियलिटी छात्रों और मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को एम्स दिल्ली के वेतनमान के मुताबिक भुगतान किया जाना चाहिए। रिपोर्ट में साफ किया गया है कि निजी, सार्वजनिक, राज्य, केंद्रीय, डीम्ड विश्वविद्यालय या किसी अन्य श्रेणी की संस्था होने के आधार पर वेतन में अंतर नहीं होना चाहिए। टास्क फोर्स ने चिकित्सा शिक्षा की उच्चतम गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए शिक्षकों की निजी प्रैक्टिस पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश भी की है।
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मरीजों की जान बचाने से पहले अच्छी नींद जरूरी, हफ्ते की छुट्टी यूं ही निरस्त न करें
टास्क फोर्स ने साफ किया है कि काम का अधिक दबाव डॉक्टरों रे साथ-साथ मरीजों की सेहत को भी बुरी तरह प्रभावित करता है। इसने सिफारिश की है कि रेजिडेंट डॉक्टर सप्ताह में 74 घंटे से अधिक काम न करें और उन्हें हर सप्ताह एक दिन की छुट्टी मिले। मेडिकल छात्रों के लिए प्रतिदिन सात से आठ घंटे की नींद को अनिवार्य बताते हुए टास्क फोर्स ने कहा, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त नींद जरूरी है। इनकी छुट्टियों को अनुचित तरीके से अस्वीकृत नहीं किया जाना चाहिए।
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हफ्ते में अधिकतम 74 घंटे काम और छुट्टी; रैगिंग रोकने के लिए बने इकाई
एनएमसी के टास्क फोर्स ने हफ्ते में कामकाज के अधिकतम 74 घंटे के अलावा वीक ऑफ यानी छुट्टी का प्रावधान अनिवार्य बनाने का सुझाव दिया है। रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि मेडिकल कॉलेजों में सक्रिय एंटी-रैगिंग सेल होने चाहिए। टास्क फोर्स ने रैगिंग जैसे कृत्यों में संलिप्त पाए जाने पर अपराधियों के लिए कठोर दंड का प्रावधान बनाने का सुझाव भी दिया है।
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वेतन में अंतर नहीं होना चाहिए
टास्क फोर्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा, देश के सभी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्न, पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों, सीनियर रेजीडेंट, सुपर-स्पेशियलिटी छात्रों और मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को एम्स दिल्ली के वेतनमान के मुताबिक भुगतान किया जाना चाहिए। रिपोर्ट में साफ किया गया है कि निजी, सार्वजनिक, राज्य, केंद्रीय, डीम्ड विश्वविद्यालय या किसी अन्य श्रेणी की संस्था होने के आधार पर वेतन में अंतर नहीं होना चाहिए। टास्क फोर्स ने चिकित्सा शिक्षा की उच्चतम गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए शिक्षकों की निजी प्रैक्टिस पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश भी की है।