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लक्षण होने पर कोरोना टेस्ट जरूर कराएं लोग, देरी हुई तो होगी मुश्किल- नीति आयोग
Wed, 09 Sep 2020 10:02 AM IST
Tanuja Yadav
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Tanuja Yadav
Updated Wed, 09 Sep 2020 10:02 AM IST
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corona virus
- फोटो : sociol media
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देश में लगातार कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे हैं, हालांकि देश में कोविड-19 की रिकवरी दर काफी बेहतर है लेकिन बावजूद इसके संक्रमण का खतरा अभी भी बना हुआ है। नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर वीके पॉल ने बढ़ते मामले को देखते हुए लोगों को लक्षण होने पर टेस्ट कराने की सलाह दी है।
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डॉ वीके पॉल ने टेस्ट ना कराने की बात पर चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि ऐसा करने से सिस्टम और लोगों के लिए खतरा बढ़ सकता है। ऐसा करके वो लोग खुद को और अपने परिवार को जोखिम में डाल रहे हैं। नीति आयोग के सदस्य डॉ वी के पॉल ने कहा कि अगर स्थिति बिगड़ने पर दिखाएंगे तो इससे सबके लिए परेशानी बढ़ सकती है।
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उन्होंने कहा कि लोगों को वायरस से डरना चाहिए लेकिन टेस्टिंग से नहीं डरना चाहिए। कोरोना के टेस्ट के लिए अब डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन की भी जरुरत नहीं है, ये टेस्ट अब ऑन डिमांड किए जा रहे हैं। डॉ पॉल का कहना है कि जैसे-जैसे आर्थिक गतिविधियां खुल रही हैं, उससे वायरस को एक शख्स से दूसरे शख्स में पहुंचने पर आसानी हो रही है।
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नीति आयोग के सदस्य डॉ पॉल ने लोगों से अपील की है कि वो लापरवाही बिल्कुल ना करें और अनुशासन का पालन करें। लोगों को सलाह दी जा रही है कि मास्क पहनें और दो गज की दूरी का पालन करें। भीड़ में शामिल ना होएं, इधर-उधर ना थूकें और प्रतिदिन व्यायाम और योग करें।
डॉ पॉल का कहना है कि इन नियमों का और सख्ती से पालन करने की जरुरत है। उन्होंने कहा कि सरकार से ऐसी शिकायतें मिल रही हैं कि जनता थोड़ी बेपरवाह हो गई है। कोरोना का संक्रमण अब बड़े शहरों से छोटे शहरों औऱ वहां से आस-पास के कस्बों और गांवों में फैल रहा है।
इधर केंंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा कि देश में आठ लाख 83 हजार कोरोना के मामले हैं लेकिन 33 लाख से ज्यादा लोग कोरोना से ठीक हो चुके हैं। राजेश भूषण ने बताया कि प्रति दस लाख की आबादी पर 53 मौतें दर्ज की गई हैं, जिन देशों से भारत की तुलना की जा रही है, वहां प्रति दस लाख की आबादी पर 500-600 मौतें हो रही हैं।