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राष्ट्रपति चुनाव: नीतीश का कोविंद को समर्थन, जेडीयू में असमंजस

Fri, 23 Jun 2017 06:27 AM IST
विनोद अग्निहोत्री, अमर उजाला, नई दिल्ली 
विनोद अग्निहोत्री, अमर उजाला, नई दिल्ली  Updated Fri, 23 Jun 2017 06:27 AM IST
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Nitish Kumar's party leaders confused over Kovind in presidential election
फाइल फोटो

विपक्षी दलों के फैसले से ठीक एक दिन पहले नीतीश कुमार द्वारा भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद का समर्थन करने के ऐलान को अधिसंख्य जद यू नेता पचा नहीं पा रहे हैं। फिर संयुक्त विपक्ष द्वारा लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार को उम्मीदवार बनाये जाने से जदयू के भीतर असमंजस और बढ़ गया है।

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अब जदयू के नेताओं को लगता है कि भले ही कोविंद बिहार के राज्यपाल रहे हों लेकिन मीरा कुमार बिहार की बेटी हैं और देश की दलित राजनीति में कोविंद के मुकाबले खासा बड़ा नाम हैं। नाम न छापने की शर्त पर जदयू के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि खुद नीतीश जी को भी अब अपने फैसले का राजनीतिक बचाव करना मुश्किल होगा।
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दरअसल नीतीश कुमार शुरू से ही बिहार के हितों और बिहारी अस्मिता को अपना मुख्य मुद्दा बनाते रहे हैं। बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डीएनए वाले बयान और 1,25 लाख करोड़ रु के पैकेज की घोषणा के अंदाज को बिहार के अपमान का कारगर मुद्दा बनाया था। 
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एनडीए में रहते हुए भी नीतीश ने हमेशा बिहार के विकास और गौरव को हमेशा आगे रखा। यूपीए सरकार के दौरान नीतीश ने दिल्ली में बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर विशाल रैली भी की थी।

नीतीश को फैसला लेने से पहले बैठक तक इंतजार करना चाहिए था

Nitish Kumar's party leaders confused over Kovind in presidential election
फंस गए नीतीश कुमार - फोटो : Amar Ujala

अब मीरा कुमार के मैदान में आने के बाद कांग्रेस और लालू यादव बिहार की दलित बेटी और दलित राजनीति में अम्बेडकर के बाद आजाद भारत के सबसे बड़े नेता जगजीवन राम की वारिस के नाम पर नीतीश पर दबाव बनाएंगे।

एक अन्य जदयू नेता के मुताबिक नीतीश कुमार को फैसला लेने से पहले 22 जून की बैठक तक इंतजार करना चाहिए था। उन्हें विपक्षी दलों की बैठक में आकर अपनी बात रखनी चाहिए थी। बल्कि मीरा कुमार के नाम के ऐलान की उन्हें पहल करनी चाहिए थी। 

जदयू के एक पदाधिकारी के मुताबिक पता नहीं पार्टी ने कोविंद को समर्थन का फैसला किस दबाव में किया गया। इससे विपक्ष और गैर भाजपा राजनीति में नीतीश और जदयू की साख भी प्रभावित होगी। 

सूत्रों के मुताबिक पार्टी के फैसले से वरिष्ठ नेता शरद यादव समेत कुछ अन्य नेता बेहद असहज हैं। क्योंकि विपक्ष के साझा उम्मीदवार उतारने की पहल  खुद नीतीश कुमार ने ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलकर की थी। बाद में शरद यादव ने अन्य विपक्षी दलों से बात करके इसे आगे बढ़ाया था। अब उन्हें विपक्ष के नेताओं के सवालों का सामना करना पड़ रहा है। उधर लालू यादव ने नीतीश के निर्णय को ऐतिहासिक भूल बताकर जदयू की दुविधा और बढ़ा दी है।

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