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प्रणब को दोबारा राष्ट्रपति बनाना चाहते हैं नीतीश व ममता
अनूप वाजपेयी/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 19 May 2017 03:39 AM IST
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विपक्षी एकजुटता में शामिल दो बड़े राज्यों के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और ममता बनर्जी की खुली राय के बाद भी कांग्रेस अपने पुराने उम्मीदवार प्रणव मुखर्जी के नाम पर अपनी राय जाहिर करने से बच रही है। कांग्रेस प्रणब मुखर्जी को अपनी सोच और विचारधारा का तो मानती है लेकिन बतौर उम्मीदवार उनके नाम पर खुलकर नहीं आ रही है।
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प्रणब मुखर्जी को दुबारा राष्ट्रपति चुने जाने पर नीतीश कुमार और ममता बनर्जी तैयार तो हैं लेकिन दोनों ही उन्हें विपक्ष के उम्मीदवार न बनाकर गेंद केंद्र सरकार के पाले में डाल रहे हैं। दोनों का कहना है कि सरकार सर्वसम्मति बनाने की पहल करे।
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राष्ट्रपति चुनाव को लेकर कहीं न कहीं विपक्षी दल पर्याप्त अंकों को लेकर दुविधा में है। लिहाजा विपक्षी पार्टियों में एक खेमा अब इस कोशिश में है कि कोई उम्मीदवार तय करने की अपेक्षा प्रणव मुखर्जी का नाम आगे बढ़ाकर सर्वसम्मति पर सरकार को बाध्य किया जाए। हो सकता है कि प्रणब मुखर्जी के नाम पर सत्तापक्ष की कुछ पार्टियां भी साथ दे दें।
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कांग्रेस, वामदल समेत कुछ अन्य नेता शुरू से ये मानकर चल रहे हैं कि सरकार की ओर से सर्वसम्मति तो दूर विपक्ष की राय भी नहीं लेगी। एनडीए अपना उम्मीदवार हरहाल में उतारेगा। ऐसे में प्रणब मुखर्जी का नाम चलाने से उनके लिए दिक्कत खड़ी हो सकती है।
एनडीए की ओर से उम्मीदवार आने की स्थिति में प्रणव मुखर्जी चुनाव लड़ने के लिए कतई तैयार नहीं होंगे। क्योंकि वर्तमान में पर्याप्त संख्या नहीं है। कांग्रेस प्रणव का नाम तभी आगे बढ़ाएगी जब सत्तापक्ष की कुछ पार्टियां भी सहमत हों। लिहाजा कांग्रेस का फोकस शुरू से ही विपक्षी पार्टियों को एकजुट रखने और सर्वसम्मति बनाने पर है।
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला का कहना है कि हमें फक्र है कि प्रणव मुखर्जी हमारी सोच और विचारधारा से आते हैं और एक काबिल राष्ट्रपति हैं। कांग्रेस पार्टी विपक्ष के बीच एक सर्वसम्मति बनाने का काम कर रही है।
आमराय से सब मिलकर ही एक उम्मीदवार के नाम पर फैसला करेंगे। मनीष तिवारी का कहना है कि सरकार एक विकल्प के साथ एक राजनीतिक रणनीति से लड़ने की कोशिश में विश्वास नहीं करती है। विपक्षी नेताओं की कोशिश और उन्हें धमकाने के लिए संसाधनों का दुरुपयोग करती है। विपक्ष के नेताओं पर निशाना बनाया गया है। ऐसे में सरकार से किसी सर्वसम्मति की उम्मीद नहीं की जा सकती है।