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NITI: 'ये तकनीक लाने के लिए विदेशी कंपनियों में रुचि, निकट भविष्य में..', भारत में हाईपरलूप को लेकर बोले अफसर

Sun, 05 Nov 2023 12:10 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आदर्श शर्मा Updated Sun, 05 Nov 2023 12:10 PM IST
सार

निकट भविष्य में हाइपरलूप तकनीक अपनाने की संभावनाएं नहीं है क्योंकि यह तकनीक बहुत निम्न स्तर पर है। पढ़िए पूरा मामला

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NITI member VK Saraswat says that India unlikely to have hyperloop trains in near future
नीति आयोग - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

भारत में हाइपरलूप अल्ट्रा हाई स्पीड ट्रेनों को चलने की संभावनाओं को लेकर नीति आयोग के सदस्य वीके सारस्वत ने बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा, निकट भविष्य में हाइपरलूप तकनीक अपनाने की संभावनाएं नहीं है क्योंकि यह तकनीक बहुत निम्न स्तर पर है। साथ ही वर्तमान समय में आर्थिक रूप से ये व्यवहार्य भी नहीं है। नीति आयोग के सदस्य वीके सारस्वत ने रविवार को यह बयान दिया।
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बता दें सारस्वत वर्जिन हाइपलूप प्रौद्योगिकी की तकनीकी और वाणिज्यिक व्यवहार्यता का पता लगाने के लिए एक समिति का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने इस संबंध में कहा, कुछ विदेशी कंपनियों ने भारत में टेक्नोलॉजी को लाने में अपनी रुचि दिखाई है। साक्षात्कार में उन्होंने कहा, जहां तक हमारा सवाल है, विदेशों से जो प्रस्ताव आए थे वे सभी व्यवहार्य विकल्प नहीं है। ये टेक्नोलॉजी अपने बहुत निचले स्तर पर है।
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हाइपरलूप एक हाई स्पीड ट्रेन है, जो ट्यूब में वैक्यूम में चलती है उसके लेकर जो ऑफर आए हैं वे सभी परिपक्वता के बेहद निचले स्तर परे हैं। हम उस तरह की तकनीक पर निवेश नहीं कर सकते। महाराष्ट्र ने हाइपरलूप को एक सार्वजनिक बुनियादी ढांचा माना है और मुंबई-पुणे हाइपरलूप परियोजना के लिए मूल परियोजना प्रस्तावक के रूप में वर्जिन हाइपरलूप-डीपी वर्ल्ड कंसोर्टियम को मंजूरी दी है।
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सारस्वत बोले, हम भी जल्द बड़े उत्पादक होंगे
चीन से लिथियम आयात पर भारत की निर्भरता पर जवाब देते हुए नीति आयोग सदस्य सारस्वत ने कहा, भारत में लिथियम आयन बैटरी का उत्पादन बहुत कम है, इसलिए निर्भरता चीन और अन्य स्रोतों से बैटरी के आयात पर है। लेकिन ज्यादातर यह चीन से है क्योंकि प्रतिस्पर्धा के लिहाज से चीनी बैटरियां सस्ती हैं। उन्होंने कहा, भारत ने देश में बैटरी विनिर्माण सुविधाएं स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन दिया है।  उन्होंने कहा कि उम्मीद है अगले वर्ष भारत की बड़ी कंपनियां देश में लिथियम-आयन बैटरी के निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर उत्पादन करेंगे। लिथियम-आयन का लगभग 75 प्रतिशत आयात चीन से होता है।
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