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कृषि क्षेत्र: नीति आयोग ने कहा- खेती-किसानी पर कोरोना की दूसरी लहर का नहीं पडे़गा कोई असर
Mon, 07 Jun 2021 03:39 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Mon, 07 Jun 2021 03:39 AM IST
सार
रमेश चंद ने कहा, मई में जब संक्रमण गांवों तक फैला तो उस समय कृषि गतिविधियां बेहद कम
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
नीति आयोग के सदस्य (कृषि) रमेश चंद ने रविवार को कहा, कोरोना की दूसरी लहर का भारतीय कृषि क्षेत्र पर कोई असर नहीं पडे़गा। उन्होंने कहा, मई में जब यह संक्रमण गांवों तक फैला तो उस समय कृषि गतिविधियां कम से कम होती हैं।
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एक समाचार एजेंसी को दिए साक्षात्कार में चंद ने कहा, मई में किसी फसल की बुवाई और कटाई नहीं होती। सिर्फ कुछ सब्जियों और सीजन से इतर फसलों की खेती होती है। मार्च या अप्रैल के मध्य तक कृषि गतिविधियां चरम पर होती हैं। उसके बाद इनमें कमी आती है। मानसून के आगमन के साथ ये गतिविधियां फिर जोर पकड़ती हैं।
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उन्होंने कहा कि ऐसे में यदि मई से जून के मध्य तक श्रमिकों की उपलब्धता कम भी रहती है, तो इससे कृषि क्षेत्र पर कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला। क़ृषि क्षेत्र की वृद्धि के बारे में चंद ने कहा कि 2021-22 में क्षेत्र की वृद्धि दर तीन प्रतिशत से अधिक रहेगी। बीते वित्त वर्ष में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 3.6 प्रतिशत रही थी। वहीं, भारतीय अर्थव्यवस्था में 7.3 प्रतिशत की गिरावट आई थी।
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दलहन में आत्मनिर्भर क्यों नहीं, इस सवाल पर कहा-क्षेत्र बढ़ाए जाने की जरूरत
चंद से जब यह पूछा गया कि भारत अभी तक दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर क्यों नहीं बन पाया तो उन्होंने कहा कि सिंचाई के तहत दलहन क्षेत्र बढ़ाने की जरूरत है। इससे उत्पादन और मूल्य स्थिरता के मोर्चे पर काफी बदलाव आएगा।
उन्होंने कहा, भारत में हमारी सब्सिडी नीति, मूल्य नीति और प्रौद्योगिकी नीति बहुत ज्यादा चावल, गेहूं, गन्ने के पक्ष में झुकी हुई है। ऐसे में मेरा मानना है कि हमें अपनी खरीद तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य नीति को दलहनों के अनुकूल बनाने की जरूरत है।