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'ब्लू इकोनॉमी' बनेगा भारत, नीति आयोग ने तैयार की योजना
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 27 Sep 2016 12:45 PM IST
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- फोटो : amarujala - file
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देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत और नया रंग देने के लिए नीति आयोग ने एक खास प्रोजेक्ट पर विचार की प्रक्रिया शुरू की है। इसके तहत डिफेंस और आतंरिक सुरक्षा को जोड़ने के लिए 15 साल के एक विजन पर काम हो रहा है। इस योजना के तहत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और लंबी समुद्रीय सीमाओं का भरपूर उपयोग कर भारत को एक महत्वपूर्ण ब्लू इकोनॉमी के रूप में खड़ा करने की है।
पहली बार बीजेपी सरकार ने इन सभी विषयों को अपनी योजनाओं का हिस्सा बनाया है। ताकि इन क्षेत्रों में बेहतर तैयारी के लिए लंबी अवधि की प्लानिंग की जा सके।
इस पर बहस को शुरू करते हुए पूर्व नौसेना प्रमुख आरके धोवन ने नौसेना और समुद्रीय दृष्टिकोण को समाहित करते हुए इस योजना पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत प्राकृतिक रूप से एक समुद्रीय देश है। हमारे पास 7500 किलोमीटर लंबी समुद्रीय सीमा है, इसके ऊपर दो मिलियन स्क्वॉयर किलोमीटर का एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन है। इसके अलावा 1300 से ज्यादा आइसलैंड हैं और साथ ही नदियों का नेटवर्क भी। धोवन ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को इस प्राकृतिक और रणनीतिक समुद्रीय लाभ का पूरा फायदा उठाना चाहिए।
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पहली बार बीजेपी सरकार ने इन सभी विषयों को अपनी योजनाओं का हिस्सा बनाया है। ताकि इन क्षेत्रों में बेहतर तैयारी के लिए लंबी अवधि की प्लानिंग की जा सके।
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इस पर बहस को शुरू करते हुए पूर्व नौसेना प्रमुख आरके धोवन ने नौसेना और समुद्रीय दृष्टिकोण को समाहित करते हुए इस योजना पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत प्राकृतिक रूप से एक समुद्रीय देश है। हमारे पास 7500 किलोमीटर लंबी समुद्रीय सीमा है, इसके ऊपर दो मिलियन स्क्वॉयर किलोमीटर का एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन है। इसके अलावा 1300 से ज्यादा आइसलैंड हैं और साथ ही नदियों का नेटवर्क भी। धोवन ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को इस प्राकृतिक और रणनीतिक समुद्रीय लाभ का पूरा फायदा उठाना चाहिए।
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शिप इंडस्ट्री पर ध्यान देने की जरूरत
उन्होंने कहा कि भारत के कुल व्यापार का 90 प्रतिशत हिंद महासागर के रास्ते होता है और यह देश का सौभाग्य है कि ये स्ट्रैटजिक लोकेशन इस एरिया में हैं। धोवन ने कहा कि भारत की शिप निर्माण इंडस्ट्री दुनिया में 17वें नंबर पर है। समय आ गया है कि इस पर तत्काल ध्यान दिया जाए क्योंकि जापान, दक्षिण कोरिया और चीन इस मामले में बहुत आगे हैं।
उन्होंने कहा कि शिप निर्माण इंडस्ट्री कई समस्याओं का सामना कर रही है, जैसे कि अपर्याप्त टैक्स संरचना और कई सारे प्रतिबंध। पूर्व नौसेना प्रमुख ने जिन अन्य क्षेत्रों के बारे में बात की, उनमें मछली व्यापार भी एक महत्वपूर्ण टॉपिक रहा। उन्होंने कहा कि मछली व्यापार भी अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन इस क्षेत्र में लगातार गिरावट आ रही है। इस पर भी ध्यान देने की जरूरत है।
इसके अलावा उन्होंने समुद्र की थर्मल एनर्जी और गहरे समुद्र से खनिजों के भंडार का फायदा उठाने की भी बात कही। पूर्व नौसेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय नौसेना इस परिप्रेक्ष्य में पहले ही 15 साल की वृहद योजना तैयार कर चुकी है।
उन्होंने कहा कि शिप निर्माण इंडस्ट्री कई समस्याओं का सामना कर रही है, जैसे कि अपर्याप्त टैक्स संरचना और कई सारे प्रतिबंध। पूर्व नौसेना प्रमुख ने जिन अन्य क्षेत्रों के बारे में बात की, उनमें मछली व्यापार भी एक महत्वपूर्ण टॉपिक रहा। उन्होंने कहा कि मछली व्यापार भी अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन इस क्षेत्र में लगातार गिरावट आ रही है। इस पर भी ध्यान देने की जरूरत है।
इसके अलावा उन्होंने समुद्र की थर्मल एनर्जी और गहरे समुद्र से खनिजों के भंडार का फायदा उठाने की भी बात कही। पूर्व नौसेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय नौसेना इस परिप्रेक्ष्य में पहले ही 15 साल की वृहद योजना तैयार कर चुकी है।