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कृषि कानून: नीति आयोग के सदस्य ने कहा, बातचीत शुरू करनी है तो कानूनों में खामियां बताएं किसान
Wed, 09 Jun 2021 02:46 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Wed, 09 Jun 2021 02:46 AM IST
सार
- किसानों को इस बारे में कुछ संकेत देना चाहिए। कानूनों की वापसी की जिद छोड़ना चाहिए
- टिकैत ने 29 अप्रैल को कहा था कि किसान केंद्र सरकार से बातचीत के लिए तैयार हैं
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नीति आयोग
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
तीन कृषि कानूनों के खिलाफ जारी विरोध के बीच नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद ने कहा है कि सरकार से बातचीत के लिए किसानों को तीनों कानूनों की वापसी की मांग के बजाय कानूनों में खामियां बताना चाहिए।
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एक समाचार एजेंसी को दिए बयान में चंद ने कहा, अगर कोई दो चीज गलत है तो हमें बताएं, अगर कोई पांच चीजें, जो आपको स्वीकार नहीं हैं तो वह भी हमें बताएं। मेरा मानना है कि अगर किसान यूनियन कानूनों पर चर्चा की इच्छा जताते हैं तो यह किसान नेता राकेश टिकैत की ओर से बड़ा बयान होगा।
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दरअसल, भारतीय किसान यूनियन नेता राकेश टिकैत ने 29 अप्रैल को कहा था कि किसान केंद्र सरकार से बातचीत के लिए तैयार हैं, मगर उन्होंने कानूनों की वापसी पर चर्चा का भी समर्थन किया।
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चंद से इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, राकेश टिकैत के बयान का स्वागत है, मगर उसी वक्त कुछ और नेताओं की ओर से कानूनों की वापसी की मांग पर अडे़ रहने के भी बयान आए। ऐसे में जब लोग इस मांग पर अडे़ ही रहेंगे तो फिर बातचीत कैसे हो पाएगी।
कृषि कानूनों से इतर किसानों से हर मुद्दे पर बात को तैयार : तोमर
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मंगलवार को कहा कि सरकार आंदोलनकारी किसानों के साथ कृषि कानूनों से इतर किसी भी मुद्दे पर बात करने के लिए तैयार है।
मुरैना सीट से सांसद नरेंद्र तोमर ने कहा, केंद्र सरकार ने हमेशा किसानों के कल्याण के हित में बात की है और वह अब भी वार्ता को तैयार है। यदि किसानों के संगठन कृषि कानूनों से अलग किसी विकल्प पर चर्चा करने को राजी हैं तो सरकार उनसे बात करने पर सहमत है।
बढ़ती महंगाई के मुद्दे पर तोमर ने कहा, सरकार दलहन और खाद्य तेलों के दामों पर नजर बनाए हुए हैं। सरकार की तरफ से स्टॉक रिलीज करने के बाद दलहन के दाम काबू आ गए हैं। लेकिन सरसों के तेल के दाम इसलिए बढ़े हुए हैं, क्योंकि सरकार ने इसकी शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए किसी अन्य खाद्य तेल को इसमें मिश्रित करने पर रोक लगा दी है। उन्होंने कहा, इस निर्णय से किसानों को लाभ होगा।
लाभकारी एमएसपी की गारंटी के लिए कानून बनाए सरकार : मोर्चा
तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले साल नवंबर से आंदोलन कर रहे 40 किसान संगठनों के संयुक्त मोर्चे ने सरकार से फसल के लाभकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी देने वाला कानून बनाने की मांग की है।
संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा, तेल के बढ़ते दामों व महंगी होती अन्य लागत के साथ किसान खेती और उत्पादन का खर्च भी निकाल पाने में असमर्थ हो गया है। पंजाब में मक्का उगाने वाले किसानों को फसल का महज 700 से 800 रुपये प्रति कुंतल मूल्य मिल रहा है, जबकि सरकारी एमएसपी 1850 रुपये कुंतल है। मोर्चा ने सरकार से सवाल किया कि ऐसे में किसान कैसे जिंदा रह सकता है।
उन्होंने कहा, संयुक्त किसान मोर्चा सरकार से तत्कल सभी फसलों के लिए लाभदायक एमएसपी की गारंटी देने वाला कानून बनाने की मांग करता है ताकि फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन और समर्थन मिल सके। मोर्चा ने किसानों का समर्थन करने पर पंजाबी-कनाडाई गायक जैजी बी का अकाउंट ब्लॉक करने के लिए सोशल मीडिया हैंडल ट्विटर की भी आलोचना की।