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सवाल-जवाब: क्या एक व्यक्ति को दी जा सकती हैं अलग-अलग टीकों की खुराकें? जानिए क्या बोले डॉ. वीके पॉल
Sat, 22 May 2021 05:36 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Sat, 22 May 2021 05:36 PM IST
सार
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से देश में कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर की स्थिति को लेकर जानकारी दी गई। यहां नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने कहा कि देश के बड़े हिस्से में अब हालात नियंत्रण में आ रहे हैं।
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डॉ. वीके पॉल
- फोटो : एएनआई (फाइल)
विस्तार
प्रेस वार्ता में मौजूद रहे नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वीके पॉल ने कहा कि देश के बड़े हिस्से में कोरोना महामारी की स्थिति अब नियंत्रण में आ रही है। डॉ. पॉल ने कहा कि देश में कोरोना की सकारात्मकता दर घट रही है और महामारी के सक्रिय मामलों में भी कमी आ रही है, जो कि हमारे लिए एक सकारात्मक संकेत है।
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डॉ.पॉल ने कहा, एक व्यक्ति को पहली खुराक दूसरे टीके की और दूसरी खुराक किसी और टीके लगाना वैज्ञानिक और सैद्धांतिक रूप से यह संभव है। लेकिन इसकी सिफारिश करना अभी ठीक नहीं है क्योंकि यह स्थिति अभी विकसित हो रही है। अभी इसके बारे में पुख्ता प्रमाण नहीं हैं और आने वाले समय में ही यह पता चल सकेगा।
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Pandemic is stabilising in a major part of the country. Positivity rate is going down & active cases are going down: Dr. VK Paul, Member-Health, Niti Aayog#COVID19 pic.twitter.com/l1SeVmNuB7
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) May 22, 2021
डॉ. पॉल ने आगे कहा कि सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों पर पाबंदियां लगाकर तथा निरुद्ध क्षेत्रों और देखभाल के उपायों को अपनाकर भारत इस महामारी पर अभी तक लगाम कसने में सफल रहा है। उन्होंने कहा, ‘स्थिति में सुधार आ रहा है लेकिन हमें सुनिश्चित करना होगा कि संक्रमण की श्रृंखला टूटी रहे। संक्रमण की दर 382 जिलों में अब भी 10 फीसदी से ऊपर है, इसलिए इस लहर से लड़ने में अभी लंबा सफर तय करना है।’
उन्होंने कहा, ‘देश के बड़े हिस्से में महामारी की स्थिति में सुधार आ रहा है, संक्रमण की दर और उपचाराधीन मामलों की संख्या कम हो रही है और मरीजों के ठीक होने की दर बढ़ रही है। यह भी देखा जा रहा है कि दूसरे राज्यों में बढ़ोतरी भी हुई है, इसलिए यह मिला-जुला परिदृश्य है लेकिन इस लहर से निपटने में हमें लंबा सफर तय करना है और यह भी सुनिश्चित करना है कि हम जो कदम उठाते हैं, उनमें कोई ढिलाई नहीं हो।’