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ई-कॉमर्स पॉलिसी पर नीति आयोग के उपाध्यक्ष अमिताभ कांत की भाषा विदेशी समर्थक जैसी: कैट
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 22 Aug 2018 08:25 PM IST
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कॉन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने ई-कॉमर्स पालिसी को लेकर नीति आयोग के उपाध्यक्ष अमिताभ कांत की भाषा को विदेशी समर्थक बताया है। बुधवार को जारी एक बयान में कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल और राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया ने कहा, अमिताभ कांत ने हाल ही बेहद हास्यास्पद वक्तव्य दिया था। इसमें उन्होंने कहा था कि ई-कॉमर्स पॉलिसी को डिस्काउंट और कीमतों जैसे छोटे विषयों पर ध्यान न देकर विदेशी निवेश पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।
कैट के पदाधिकारियों ने कहा, यह दुखद है कि जब भी देश के घरेलू व्यापार से संबंधित कोई नीति बनती है तब देश के वरिष्ठ नौकरशाह उसमें अड़ंगा लगाने की पूरी कोशिश करते हैं। इससे यह जाहिर होता है कि यह अधिकारी विदेशी कंपनियों को ही देश की प्रगति का आधार मानते हैं। घरेलू व्यापार इनकी प्राथमिकता पर कहीं नहीं है। उन्होंने ऐसे अधिकारियों इस मानसिकता की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि ई-कॉमर्स पॉलिसी में घरेलू व्यापार से संबंधित मामलों पर कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा।
दोनों व्यापारी नेताओं ने कांत के इस वक्तव्य को बचकाना बताते हुए कहा, ऐसा लगता कि ये अधिकारी विदेशी कंपनियों के प्रवक्ता के रूप में बोल रहे हैं। उनका यह वक्तव्य ई-कॉमर्स पर बन रही पॉलिसी को प्रभावित करने वाला भी है। उनका यह बयान पूरी तरह गलत है। वह भी ऐसे समय में जब ई-कॉमर्स पर पॉलिसी बन रही है। कांत का सार्वजनिक रूप से ई-कॉमर्स पॉलिसी के मुख्य बिंदुओं पर टिप्पणी करना कतई उचित नहीं है।
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उन्हें ई-कॉमर्स व्यापार की जमीनी हकीकत का पता ही नहीं है। उनका ज्यादा ध्यान विदेशी निवेश पर है, फिर वो चाहे किसी भी कीमत पर क्यों न हो। कैट नेताओं ने कहा, अमिताभ कांत का विदेशी प्रेम इतना ज्यादा है तो अच्छा होगा कि वे देश के पेट्रोलियम, रिफाइनरी, रेलवे, पेट्रोल, गैस, और खनन आदि को विदेशी कंपनियों के हवाले कर दिया जाए। इससे उन्हें विदेशी निवेश बड़ी मात्रा में मिल जाएगा।
'यह वक्तव्य बिन मांगी सलाह जैसा है'
खंडेलवाल ने कहा, अमिताभ कांत का यह वक्तव्य बिन मांगी सलाह जैसा है। इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा था डिस्काउंट और कीमतों जैसे छोटी चीजों को पॉलिसी के दायरे में शामिल न किया जाए, जबकि यह दोनों विषय पॉलिसी के मुख्य आधार हैं। डिस्काउंट और कीमतों ने ही पिछले वर्षों में देश के ई-कॉमर्स व्यापार को विषाक्त कर रखा है।
हम अपने बाजार में किसी भी सूरत में विदेशी कंपनियों को नहीं सौंप सकते। ई-कॉमर्स पर पॉलिसी के ड्राफ्ट का आधार बेहद ठोस है, जिसके साथ कोई समझौता नहीं हो सकता। हालांकि ड्राफ्ट में कुछ संशोधनों की गुंजाइश अवश्य है। इन सभी बातों पर सरकार को विचार कर ई-कॉमर्स पॉलिसी को घरेलू व्यापार के लिए लाभदायक बनाया जाना चाहिए।
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कैट के पदाधिकारियों ने कहा, यह दुखद है कि जब भी देश के घरेलू व्यापार से संबंधित कोई नीति बनती है तब देश के वरिष्ठ नौकरशाह उसमें अड़ंगा लगाने की पूरी कोशिश करते हैं। इससे यह जाहिर होता है कि यह अधिकारी विदेशी कंपनियों को ही देश की प्रगति का आधार मानते हैं। घरेलू व्यापार इनकी प्राथमिकता पर कहीं नहीं है। उन्होंने ऐसे अधिकारियों इस मानसिकता की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि ई-कॉमर्स पॉलिसी में घरेलू व्यापार से संबंधित मामलों पर कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा।
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दोनों व्यापारी नेताओं ने कांत के इस वक्तव्य को बचकाना बताते हुए कहा, ऐसा लगता कि ये अधिकारी विदेशी कंपनियों के प्रवक्ता के रूप में बोल रहे हैं। उनका यह वक्तव्य ई-कॉमर्स पर बन रही पॉलिसी को प्रभावित करने वाला भी है। उनका यह बयान पूरी तरह गलत है। वह भी ऐसे समय में जब ई-कॉमर्स पर पॉलिसी बन रही है। कांत का सार्वजनिक रूप से ई-कॉमर्स पॉलिसी के मुख्य बिंदुओं पर टिप्पणी करना कतई उचित नहीं है।
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उन्हें ई-कॉमर्स व्यापार की जमीनी हकीकत का पता ही नहीं है। उनका ज्यादा ध्यान विदेशी निवेश पर है, फिर वो चाहे किसी भी कीमत पर क्यों न हो। कैट नेताओं ने कहा, अमिताभ कांत का विदेशी प्रेम इतना ज्यादा है तो अच्छा होगा कि वे देश के पेट्रोलियम, रिफाइनरी, रेलवे, पेट्रोल, गैस, और खनन आदि को विदेशी कंपनियों के हवाले कर दिया जाए। इससे उन्हें विदेशी निवेश बड़ी मात्रा में मिल जाएगा।
'यह वक्तव्य बिन मांगी सलाह जैसा है'
खंडेलवाल ने कहा, अमिताभ कांत का यह वक्तव्य बिन मांगी सलाह जैसा है। इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा था डिस्काउंट और कीमतों जैसे छोटी चीजों को पॉलिसी के दायरे में शामिल न किया जाए, जबकि यह दोनों विषय पॉलिसी के मुख्य आधार हैं। डिस्काउंट और कीमतों ने ही पिछले वर्षों में देश के ई-कॉमर्स व्यापार को विषाक्त कर रखा है।
हम अपने बाजार में किसी भी सूरत में विदेशी कंपनियों को नहीं सौंप सकते। ई-कॉमर्स पर पॉलिसी के ड्राफ्ट का आधार बेहद ठोस है, जिसके साथ कोई समझौता नहीं हो सकता। हालांकि ड्राफ्ट में कुछ संशोधनों की गुंजाइश अवश्य है। इन सभी बातों पर सरकार को विचार कर ई-कॉमर्स पॉलिसी को घरेलू व्यापार के लिए लाभदायक बनाया जाना चाहिए।