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निर्भया के चारों दोषी फांसी के वक्त पहनेंगे काले रंग की पोशाक, तिहाड़ के दर्जी करेंगे सिलाई

Wed, 08 Jan 2020 02:55 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 08 Jan 2020 02:55 PM IST
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nirbhaya case: all four rape convicts will wear black dress before hanging
निर्भया के दोषियों को होगी फांसी - फोटो : Amar Ujala
दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने निर्भया केस में चारों दोषियों को फांसी देने के लिए डेथ वारंट जारी कर दिया गया है। दोषी मुकेश, पवन, विनय और अक्षय को 22 जनवरी की सुबह सात बजे फांसी दी जाएगी। हालांकि अभी इसमें कुछ कानूनी पहलू, जैसे क्यूरेटिव याचिका दायर करना, आदि बचे हैं। दूसरी तरफ, तिहाड़ जेल प्रशासन फांसी देने से पहले की प्रक्रियाएं पूरी करने में जुट गया है।
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निर्भया के चारों दोषी फांसी के वक्त काले रंग की पोशाक पहनेंगे। इस पोशाक को तैयार करने की जिम्मेदारी तिहाड़ जेल के दर्जी को सौंपी गई है।

तिहाड़ के दर्जी तीन तरह की पोशाक तैयार करेंगे। इनमें अपर, लोअर और मुंह पर ढके जाने वाला कपड़ा शामिल है। जेल के सूत्र बताते हैं कि चारों दोषियों की पोशाक का माप ले लिया गया है।

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तिहाड़ जेल में 35 साल की सेवा करने के बाद रिटायर हुए लॉ अफसर सुनील गुप्ता ने अमर उजाला डॉट कॉम के साथ एक खास बातचीत में कई तरह की अहम जानकारियां साझा की हैं। फिल्मों में भले ही आप देखते होंगे कि फांसी देने वाले व्यक्ति को सफेद रंग की पोशाक, जिस पर काले रंग की लाइन होती हैं, वह पहनाई जाती है। यह पूरी तरह गलत हैं। सुनील गुप्ता का कहना है कि फांसी देने से पहले दोषी व्यक्ति काले रंग की पोशाक पहनता है।यह  पोशाक भी तिहाड़ जेल के कैदी ही तैयार करते हैं।

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चूंकि तिहाड़ जेल के भीतर कई तरह की फैक्ट्रियां चल रही हैं। उनमें कई विद्याओं के अच्छे-अच्छे कारीगर हैं। पेंटिंग, आभूषणों का डिजाइन तैयार करना, फर्नीचर एवं लोहे का सामान, बेकरी, दरी, टेलरिंग और दूसरे कई तरह के कामकाज के एक्सपर्ट वहां पर मौजूद हैं। दोषियों के लिए फांसी की पोशाक भी वही दर्जी तैयार करते हैं।दोषियों का माप लेकर ही पोशाक की सिलाई की जाती है।

चाय-नाश्ते के बाद होती है फांसी

तिहाड़ जेल में फांसी देने की प्रक्रिया का जिक्र करते हुए गुप्ता बताते हैं कि फांसी वाले दिन दोषी व्यक्ति को सबसे पहले चाय दी जाती है। उसके बाद कहा जाता है कि वह चाहे तो स्नान कर सकता है। स्नान करने के बाद दोषी को नाश्ता देते हैं। जैसे ही ऊपर से कॉल आती है, दोषी को काले रंग की पोशाक पहनने के लिए कहा जाता है। बाद में उसे फांसी के फंदे तक ले जाया जाता है। इस दौरान उसके साथ कई जेलकर्मी रहते हैं।

हालांकि दोषी के हाथ पीछे की ओर उसी वक्त बांध दिए जाते हैं, जब वह काले रंग की पोशाक पहनता है। फांसी के तख्ते पर खड़ा करने के बाद उसका चेहरा काले रंग के कपड़े से ही ढका जाता है। इसके बाद जल्लाद, जेल अधीक्षक की ओर देखने लगता है। वहां से इशारा होते ही वह लीवर खींच देता है। करीब दो घंटे तक मृतक के शरीर की जांच होती है। डॉक्टर कई बार उसका परीक्षण करते हैं कि अब उसमें कोई सांस नहीं बची है।



इसके बाद ही शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जाता है। दोषी को फांसी देने से पहले उसकी वसीयत या जायदाद के बारे में पूछा जाता है कि वह किसी को दान या किसी के नाम करना चाहता है। कई मामलों में परिजनों को शव नहीं सौंपा जाता है, जिनमें सुरक्षा एजेंसियां यह रिपोर्ट देती हैं कि शव का दुरुपयोग किया जा सकता है।

 

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