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अंतर-धार्मिक विवाहों में धर्मांतरण कानून बनेंगे दीवार, क्या युवाओं की स्वतंत्रता पर लग जाएगा अंकुश?

Sun, 01 Nov 2020 07:55 PM IST
संजीव कुमार झा अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Sun, 01 Nov 2020 07:55 PM IST
सार

  • हरियाणा के निकिता हत्याकांड में विवाह के लिए धर्मांतरण कराने की बात सामने आने पर सुलगी सियासत 
  • विवाह के लिए धर्मांतरण विरोधी कानून बनाए जाने की मांग उठी

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Nikita Murder Case, Conversion laws will arise a problem In inter religious marriages
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay

विस्तार

हमारे संविधान में विवाह दो लोगों के बीच का आपसी मामला माना जाता है। कानूनन 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके कोई भी दो युवक-युवती आपसी सहमति से विवाह करने का निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं। लेकिन हरियाणा के निकिता हत्याकांड में विवाह के लिए निकिता पर धर्मांतरण करने का दबाव डालने की बात सामने आने के बाद माहौल गर्म हो गया है। अब कई तरफ से विवाह के लिए धर्मांतरण के विरोध में सख्त कानून बनाए जाने की मांग उठने लगी है। लेकिन क्या ऐसा कानून युवाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार के विरुद्ध नहीं होगा?

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सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील एमआर शमशाद ने अमर उजाला से कहा कि जबरन, लालच देकर या किसी भी गलत तरीके से किसी का धर्मांतरण कराना गैर-कानूनी है। ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई के लिए हमारे संविधान में पहले से ही प्रावधान मौजूद हैं। लेकिन हमारा कानून किसी भी दो बालिग युवक-युवती को आपस में शादी करने की अनुमति देता है। अगर इसमें किसी भी तरह से धर्म के आधार पर अड़चन डालने की कोशिश की जाती है तो यह संविधान के मौलिक अधिकारों का हनन होगा क्योंकि हमारा संविधान व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।
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उन्होंने कहा कि शादी और धर्म दोनों अलग-अलग चीजें हैं। कोई भी व्यक्ति किसी भी धर्म का होते हुए किसी दूसरे धर्म के व्यक्ति से विवाह कर सकता है। विवाह के बाद भी दोनों व्यक्ति अपना-अपना धर्म मानते रहने के लिए स्वतंत्र हैं। इसलिए केवल शादी के लिए धर्मांतरण को भी सही नहीं ठहराया जा सकता है।
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क्यों है इसकी जरूरत
वहीं, विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के वरिष्ठ नेता डॉक्टर सुरेंद्र जैन ने अमर उजाला को बताया कि निकिता हत्याकांड मीडिया की सुर्खियों में आ गया है, जिसके कारण इसकी चर्चा हो रही है। लेकिन अनेक ऐसे मामले हो रहे हैं जो चर्चा में भी नहीं आ रहे हैं और इनमें महिलाओंं के साथ ज्यादती हो रही है। उन्होंने बताया कि केवल पिछले एक हफ्ते में हरियाणा की पंद्रह लड़कियों के साथ दूसरे धर्म के युवकों के द्वारा जबरदस्ती किए जाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। लेकिन मीडिया की चुप्पी और पुलिस बल की शिथिलता के कारण इस तरह के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों को रोकने के लिए धर्मांतरण कानून का सख्त बनाया जाना बेहद जरूरी है।


उन्होंने बताया कि यह केवल विवाह तक का विषय नहीं है। अगर इन मामलों पर रोक नहीं लगाई जाती है तो इससे दो समुदायों में टकराव की स्थिति बनेगी जो शांति-सद्भाव की दृष्टि से बेहद संवेदनशील हो सकता है। इसलिए देश के सभी राज्यों में इस तरह का कानून बनाया जाना चाहिए जिससे केवल शादी के लिए धर्म बदलने की घटनाओं पर रोक लग सके। अगर सरकार ने जल्दी ही कोई कदम नहीं उठाया तो इसे लेकर जनता में आक्रोश बढ़ सकता है।


हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में पहले ही इस तरह के कानून बनाए जा चुके हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को मल्हनी विधानसभा में चुनाव प्रचार के दौरान स्पष्ट कर दिया है कि उनकी सरकार इस तरह के मामलों पर जल्दी ही सख्त कानून लाने की तैयारी कर रही है। इसके पूर्व इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी कठोर टिप्पणी की है कि केवल विवाह के लिए धर्मांतरण करना गलत है।

कैसा हो सकता है धर्मांतरणविरोधी कानून

हिमाचल और उत्तराखंड में जबरन, धमकी देकर या लालच दिखाकर धर्मांतरण कराने पर सात साल की कैद हो सकती है। यहां विवाह के लिए धर्मांतरण करने को भी अवैध बना दिया गया है। लेकिन अपनी इच्छा से धर्मांतरण पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। लेकिन धर्मांतरण करने के एक महीने पहले स्थानीय जिलाधिकारी को सूचना देकर धर्मांतरण की अनुमति लेनी पड़ती है। माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश का कानून भी इसी के आसपास हो सकता है।

महापंचायत के बाद बवाल
हरियाणा के निकिता हत्याकांड में शादी के लिए धर्मांतरण का दबाव बनाए जाने की बात सामने आने के बाद माहौल गर्म हो गया है। रविवार को वल्लभगढ़ में इसे लेकर एक महापंचायत की गई जिसमें इस तरह के मामलों में कठोर रूख अपनाने का निर्णय लिया गया है। महापंचायत के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया और कुछ लोगों ने एक हाईवे को जाम करने की कोशिश की। इसे खाली कराने गए पुलिस बल पर कुछ लोगों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। अब स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।

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