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एनआईए रिपोर्ट में खुलासा, केरल सोना तस्करी मामले का एक आरोपी टेरर फंडिंग में शामिल
Sun, 26 Jul 2020 10:34 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Sun, 26 Jul 2020 10:34 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
केरल के सोना तस्करी मामले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की रिपोर्ट में मामले के एक आरोपी के टेरर फंडिंग से जुड़े होने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुसाबिक तस्करी मामले का आरोपी केटी रमीज दक्षिण भारत में देश विरोधी गतिविधियों की फंडिंग में एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
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एनआईए ने रमीज की रिमांड अवधि बढ़ाने के लिए दायर याचिका में कहा कि वह देश के खिलाफ काम कर रहे कुछ लोगों के सीधे संपर्क में था। एनआईए ने रमीज को इस मामले का किंगपिन (सरगना) बताया है। बता दें कि रमीज को सीमा शुल्क विभाग ने मलप्पुरम स्थित उसके आवास से गिरफ्तार किया था।
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एनआई के मुताबिक, रमीज अन्य आरोपियों से कहता था कि लॉकडाउन का फायदा उठाते हुए इस दौरान ज्यादा से ज्यादा सोने की तस्करी की जाए। वह देश की आर्थिक स्थिति को कमजोर करना चाहता था। वह कई ऐसे लोगों के साथ संपर्क में था जो गैरकानूनी गतिविधियों में संलिप्त थे। उसने कई बार विदेश यात्रा भी की।
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मामले में दो अन्य आरोपियों स्वप्ना सुरेश और उसके साथी संदीप नायर की एनआईए द्वारा गिरफ्तारी के बाद रमीज को हिरासत में लिया गया था। ये गिरफ्तारियां तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर संयुक्त अरब अमीरात वाणिज्य दूतावास के कर्मी के नाम पर एक कंसाइनमेंट में मिले 30 किलो सोने को लेकर की गई थीं।
एनआईए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, रमीज ने पांच साल के दौरान यूएई समेत अन्य देशों की यात्रा की थी। पूछताछ में उसने कहा कि वह दुबई में होटल चलाता है। बाद में यह बात गलत निकली। हमारे पास जानकारी है कि तस्करी से जुटाए गए धन का एक बड़ा हिस्सा देशविरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों को जाता था।
रमीज को सबसे पहले साल 2014 में कोझिकोड में कारगो के माध्यम से 15 किलो सोने की तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया गया था। लेकिन, बाद में वह जुर्माना देकर बच निकला था। साल 2016 में वन विभाग ने उसे एक हिरन का शिकार करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। लेकिन यह मामला भी बाद में बंद हो गया था।