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सोनागाछी में देह व्यापार: मानवाधिकार आयोग ने बंगाल सरकार से मांगी रोकथाम नीतियों पर रिपोर्ट
Sat, 15 May 2021 09:23 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Sat, 15 May 2021 09:23 PM IST
सार
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने शनिवार को पश्चिम बंगाल सरकार से सोनागाछी में देह व्यापार को रोकने के लिए बनाई गई नीतियों पर रिपोर्ट तलब की। इसके साथ ही आयोग ने एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन पर कार्रवाई रिपोर्ट जमा करने को भी कहा है।
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सांकेतिक तस्वीर
विस्तार
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने शनिवार को पश्चिम बंगाल सरकार के मुख्य सचिव से सोनागाछी इलाके में देह व्यापार को रोकने के लिए बनाई गई नीतियों पर रिपोर्ट मांगी। उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल के सोनागाछी इलाके को एशिया सा सबसे बड़ा रेड लाइट इलाका कहा जाता है।
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इसके साथ ही मानवाधिकार आयोग ने बंगाल सरकार से कहा है कि वह बुद्धदेव कर्मस्कर बनाम पश्चिम बंगाल राज्य सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए निर्देशों के अनुपालन को लेकर एक कार्रवाई रिपोर्ट जमा करे। आयोग ने इसके लिए राज्य सरकार को छह महीने का समय दिया है।
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आयोग ने महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और राज्य सरकार को यह निर्देश भी दिया कि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के साथ सामाजिक, वैधानिक और स्वास्थ्य बिंदुओं पर सोनागाछी की पीड़िताओं की स्थिति पर एक सर्वेक्षण कराएं और क्षेत्र में वेश्यावृत्ति के निषेध के साथ उनका पुनर्वास सुनिश्चित करें।
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मानवाधिकार आयोग ने प्रख्यात मानवाधिकार कार्यकर्ता और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता राधाकांत त्रिपाठी की एक याचिका पर यह आदेश जारी किया है। त्रिपाठी ने सोनागाछी इलाके में नाबालिग लड़कियों के मानवाधिकारों के उल्लंघन, दुष्कर्म और यौन शोषण और मानव तस्करी का आरोप लगाया था।
त्रिपाठी ने अपनी शिकायत में राज्य सरकार पर कार्रवाई न करने और लापरवाही बरतने का आरोप लागाय। उन्होंने दशकों से चले आ रहे इस मुद्दे के स्थायी समाधान के लिए आयोग से अपील की कि दखल दे और नजर बनाए रखे। वहीं, कोलकाता पुलिस ने कहा है कि इलाके में लगातार नजर रखी जा रही है।
कोलकाता पुलिस कमिश्नर ने कहा, स्थानीय पुलिस स्टेशन और कोलकाता पुलिस का जासूसी विभाग अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम के प्रावधानों के तगत मामले भी दर्ज करते हैं। त्रिपाठी ने कहा कि इलाके में रहने वाली महिलाओं और लड़कियों की स्थिति और उनके बच्चों की हालत बेहद खराब है।