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नियुक्ति : सेवानिवृत जस्टिस अरुण मिश्रा बने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष, आज संभालेंगे पदभार

Wed, 02 Jun 2021 07:05 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Wed, 02 Jun 2021 07:05 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत जस्टिस अरुण कुमार मिश्रा की नियुक्ति पर प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय नियुक्ति समिति ने सोमवार को मुहर लगा दी थी।  

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Nhrc new chairman, Retd Justice Arun Kumar Mishra to take over as the Chairman of the National Human Rights Commission tomorrow
अरुण कुमार मिश्रा - फोटो : फाइल

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत जस्टिस अरुण कुमार मिश्रा को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के नए अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है। मिश्रा कल यानी बुधवार को पदभार संभालेंगे। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय नियुक्ति समिति ने सोमवार को इनकी नियुक्ति पर मुहर लगा दी थी।  

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बता दें कि एनएचआरसी में अध्यक्ष का पद पिछले पांच महीने से भी अधिक समय से खाली है। जस्टिस एचएल दत्तू पिछले साल दिसंबर महीने में इसके अध्यक्ष पद से रिटायर हो गए थे।

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खास बात ये है कि इस पद के लिए तीन पूर्व मुख्य न्यायाधीशों को भी शॉर्टलिस्ट किया गया था, लेकिन समिति ने जस्टिस मिश्रा को तरजीह दी। जम्मू और कश्मीर हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश महेश मित्तल कुमार और खुफिया ब्यूरो के पूर्व निदेशक राजीव जैन को भी एनएचआरसी के सदस्यों के रूप में नियुक्त किया गया है। हालांकि इस संबंध में अभी तक सरकार की ओर से आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है। 

चयन समिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल थे। 

खड़गे ने खुद को किया अलग 

इस दौरान कांग्रेस नेता खड़गे ने सुझाव दिया था कि चूंकि एनएचआरसी में अधिकांश शिकायतें दलित, आदिवासी या अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़ी होती हैं, इसलिए आयोग में इन समुदायों का कम से कम एक प्रतिनिधि होना चाहिए। इसे नहीं माने जाने पर मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपना विरोध दर्ज कराया। 

सोमवार शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर आयोग के नए अध्यक्ष एवं सदस्यों का चयन करने वाली नियुक्ति समिति की बैठक के दौरान खड़गे ने इन पदों पर नियुक्ति के लिए नामों के पैनल की सिफारिश किए जाने से संबंधित समिति के फैसले पर अपना विचार रखा था।



खड़गे ने अपने पत्र में कहा, मैंने आज की बैठक में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यकों पर बढ़ते अत्याचारों को लेकर अपनी चिंता जाहिर की थी। साथ ही अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यकों से संबंधित कम से कम एक व्यक्ति को नियमों के तहत आयोग का अध्यक्ष या सदस्य नियुक्त किए जाने का प्रस्ताव किया था। 

कांग्रेस नेता ने प्रस्ताव रखा था कि यदि फिलहाल यह संभव नहीं है तो नियुक्ति समिति की बैठक को एक सप्ताह के लिए टाला जा सकता है और बाद में इन वर्गों के उम्मीदवारों के नाम प्रस्तावित किए जा सकते हैं। खड़गे ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि समिति ने उनके एक भी प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है, ऐसे में वह खुद को इस प्रक्रिया से अलग करते हैं। 
 

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