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Devadasi System: एनएचआरसी ने केंद्र समेत छह राज्यों को भेजा नोटिस, देवदासी प्रथा पर मांगी विस्तृत रिपोर्ट

Fri, 14 Oct 2022 08:26 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 14 Oct 2022 08:26 PM IST
सार

आयोग ने कहा कि देवदासी प्रथा को रोकने के लिए अतीत में कई कानून बनाए गए, लेकिन यह अभी भी प्रचलित है। सुप्रीम कोर्ट ने भी युवा लड़कियों को देवदासी बनाने के कृत्य की निंदा करते हुए कड़ा रुख अपनाया है। 

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NHRC issues notices to Centre, 6 states seeking report on Devadasi system
NHRC

विस्तार

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने केंद्र और छह राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है। आयोग ने उनसे विभिन्न मंदिरों, विशेष रूप से दक्षिण भारत में देवदासी प्रथा को रोकने के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। 

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एनएचआरसी ने कहा कि उसने एक मीडिया रिपोर्ट का स्वत: संज्ञान लिया है जिसमें व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं। आयोग ने कहा कि देवदासी प्रथा को रोकने के लिए अतीत में कई कानून बनाए गए, लेकिन यह अभी भी प्रचलित है। सुप्रीम कोर्ट ने भी युवा लड़कियों को देवदासी बनाने के कृत्य की निंदा करते हुए कड़ा रुख अपनाया है। 
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अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सबसे ज्यादा पीड़ित
आयोग ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इसे महिलाओं के जीवन के अधिकार, सम्मान और समानता के उल्लंघन का एक गंभीर मुद्दा बताया है। आयोग ने एक मीडिया रिपोर्ट का जिक्र करते हुए बताया कि अधिकांश पीड़ित गरीब परिवारों और अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के हैं। 
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देवदासी प्रथा क्या है?
रिपोर्ट में कहा गया है कि लड़की को देवदासी बनाने की प्रक्रिया में किसी भी मंदिर के देवता से उसकी (लड़की) शादी करा दी जाती है और वह अपना शेष जीवन पुजारी और मंदिर के दैनिक अनुष्ठानों की देखभाल करने में बिताती है। इस कदाचार में अधिकांश पीड़ितों का यौन शोषण किया जाता है। उनका पुरुषों द्वारा यौन शोषण किया जाता है। गर्भवती की जाती हैं और उन्हें उनके भाग्य पर छोड़ दिया जाता है। 

आंध्र प्रदेश और कर्नाटक सरकार ने प्रथा को अवैध घोषित किया था
एनएचआरसी ने आगे कहा कि कर्नाटक और आंध्र प्रदेश की सरकारों ने क्रमश: 1982 और 1988 में इस प्रथा को अवैध घोषित किया था। हालांकि कथित तौर पर 70 हजार से ज्यादा महिलाएं अकेले कर्नाटक में देवदासी के रूप में अपना जीवन बिता रही हैं। न्यायमूर्ति रघुनानथ राव की अध्यक्षता में गठित एक आयोग ने माना था कि तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में 80 हजार देवदासियां हैं।


इन मंत्रालयों और राज्य सरकारों को भेजा गया नोटिस
एनएचआरसी ने केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के सचिवों और कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी किया है। उन्हें छह सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। 

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