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चिंता: चकमा, हाजोंग के साथ भेदभाव रोकने को क्या किया, आयोग ने केंद्र और राज्य से मांगा जवाब

Wed, 26 Jan 2022 06:15 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Wed, 26 Jan 2022 06:15 AM IST
सार

शिकायत के मुताबिक, शरणार्थियों ने आरोप लगाया है कि उन्हें कथित जनगणना के माध्यम से राज्य से बाहर करने का प्रयास किया जा रहा है।

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NHRC has raised concerns about the human rights of Chakma and Hajong refugees
NHRC - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने चकमा और हाजोंग शरणार्थियों के मानवाधिकारों को लेकर चिंता जताई है। आयोग ने गृह मंत्रालय और अरुणाचल प्रदेश सरकार से कहा है कि किसी भी सूरत में इन शरणार्थियों के मानवाधिकारों की रक्षा होनी चाहिए।  

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चकमा, हाजोंग के साथ होनेवाले भेदभाव को रोकने और उनके पुनर्वास को लेकर क्या किया गया, इसको लेकर भी आयोग ने छह सप्ताह के अंदर गृह सचिव भारत सरकार और मुख्य सचिव अरुणाचल प्रदेश से रिपोर्ट मांगी है। 
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चकमा विकास संगठन (सीडीएफआई) ने मानवाधिकार आयोग से, 65,000 चकमा और हाजोंग जनजातीय समूहों के साथ 11 दिसंबर, 2021 को शुरू हुई जनगणना में किए जा रहे जातीय भेदभाव को रोकने और अपने मानवाधिकारों की रक्षा के लिए अविलंब हस्तक्षेप करने की मांग की है। शिकायत के मुताबिक, शरणार्थियों ने आरोप लगाया है कि उन्हें कथित जनगणना के माध्यम से राज्य से बाहर करने का प्रयास किया जा रहा है।
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करीब 60 हजार शरणार्थी जन्म से भारतीय
शिकायत में कहा गया है कि 65,000 चकमा और हाजोंग में से 60,500 जन्म से ही यहां के नागरिक हैं और सालों से मतदान करते आ रहे हैं। इनमें से 4,000 शरणार्थियों के नागरिकता संबंधी आवेदनों का अभी तक निस्तारण नहीं किया गया है। 

सुप्रीम कोर्ट ने भी भारतीय नागरिक बताया था
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अक्तूबर, 1995 में सुप्रीम कोर्ट से चकमा, हाजोंग  के जीवन और अधिकारों की रक्षा करने की गुहार लगाई थी। 9 जनवरी, 1996 को सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) बनाम अरुणाचल प्रदेश मामले में सुनवाई करते हुए चकमा और हाजोंग को यहां का नागरिक घोषित किया था।


साथ ही भारत सरकार और अरुणाचल प्रदेश सरकार से इन शरणार्थियों के नागरिकता संबंधी आवेदनों पर, इस दिशा में कार्रवाई करने को कहा था। लेकिन आज तक इस दिशा में ज्यादा प्रगति नहीं हुई है।

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